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मासूम से दरिंदगी के बाद गला रेत कर हत्या, 6 साल बाद कोर्ट का कड़ा फैसला…

विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट एवं अपर सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार की अदालत ने दुष्कर्म कर किशोरी की हत्या करने वाले को जीवित रहने तक कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

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फ़ोटो सोर्स: सोशल मीडिया, आरोपी को आजीवन कारावास

कुशीनगर जनपद में एक दिल दहला देने वाले दुष्कर्म व हत्या के मामले में न्यायालय ने सख्त फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दी है। यह निर्णय 24 मार्च 2026 को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार, पडरौना (कुशीनगर) की अदालत ने सुनाया।

खेत से निकली बच्ची रात तक घर नहीं पहुंची

बता दें कि घटना वर्ष 2020 की है। गुरवलिया बाजार के मठिया टोला की रहने वाली एक नाबालिग बच्ची शुक्रवार की सुबह अपने माता-पिता के साथ खेत में गई थी। शाम को माता-पिता ने गंजी का बोरा साइकिल पर लादकर बच्ची को घर जाने के लिए कहा, जबकि वे खुद खेत की मेड़ के रास्ते लौट रहे थे। बच्ची सड़क के रास्ते घर के लिए निकली, लेकिन रात 8 बजे तक नहीं पहुंची।

परिजनों ने खोजबीन शुरू की, गांव के बाहर हत्या कर अर्धनग्न फेंकी थी लाश

चिंतित परिजनों ने खोजबीन शुरू की और पुलिस को सूचना दी। रात करीब 10 बजे गांव के बाहर एक खेत में बच्ची का शव बरामद हुआ। उसकी हत्या गला रेतकर की गई थी, शरीर पर कई चोटों के निशान थे और शव अर्धनग्न अवस्था में मिला। सूचना मिलते ही तत्कालीन एसपी विनोद कुमार सिंह और एएसपी अयोध्या प्रसाद सिंह मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कराई। पुलिस ने गहन छानबीन, घटनास्थल के निरीक्षण और ग्रामीणों से पूछताछ के आधार पर कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी माईगर महेशिया का नाम सामने आया, जिसने बच्ची को रास्ते से अगवा कर उसके साथ दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी थी।

छह साल बाद कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास, सरकारी वकील ने की प्रभावी पैरवी

मामले में विशेष सत्र परीक्षण संख्या-42/2021 के तहत सुनवाई हुई। अदालत ने आरोपी को धारा 363, 376, 302 आईपीसी व 3/4 पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक) और 4.25 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि यह अपराध अत्यंत अमानवीय है और समाज को झकझोर देने वाला है, ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है।

वहीं, सह-अभियुक्त रामचन्द्र गुप्ता को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। न्यायालय ने अर्थदंड की राशि का एक हिस्सा पीड़िता के परिजनों को प्रतिकर के रूप में देने का भी निर्देश दिया। इस मामले में सरकारी पक्ष की ओर से विशेष शासकीय अधिवक्ता फुल बदन और अजय गुप्ता ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर न्यायालय ने यह अहम फैसला सुनाया।