1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

BJP Government : डीएम-एसपी जनप्रतिनिधियों के फोन पर कहेंगे ‘जी सर’…BJP पदाधिकारियों को नजरंदाज करना पड़ेगा भारी

यूपी के उद्यान विभाग के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि कुशीनगर मंडल में अब से डीएम और एसपी किसी भी जनप्रतिनिधि के फोन को नजरअंदाज नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर किसी विधायक का इन अधिकारियों के पास फोन जाता है तो एसपी हो या डीएम उन्हें 'जी सर' ही कहना पड़ेगा। साथ ही कुशीनगर में BJP मंडल अध्यक्ष के क्षेत्र में जितने भी थाना, तहसील, SDM, तहसीलदार आते हैं, उन्हें अपने मोबाइल में मंडल अध्यक्ष का मोबाइल नंबर सेव करना होगा।

2 min read
Google source verification

कुशीनगर में यूपी सरकार के मंत्री और उद्यान विभाग के प्रभारी दिनेश प्रताप सिंह अपने एक फरमान को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कुशीनगर मंडल में अब से DM और SP किसी भी जनप्रतिनिधि के फोन को नजरअंदाज नहीं कर सकेंगे।उन्होंने अधिकारियों को आदेशित किया कि जब भी किसी विधायक का फोन आए, उन्हें सम्मानपूर्वक ‘जी सर’ कहना होगा।

BJP पदाधिकारियों के नंबर सेव करें अधिकारी

मंत्री ने इस संबंध में मंडल के सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि उनके मोबाइल में भाजपा संगठन के पदाधिकारियों के फोन नंबर सेव होने चाहिए। आदेश के अनुसार, डीएम, एसपी, एडीएम और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बीजेपी के पदाधिकारियों का फोन वे जरूर उठाएं और फोन पर ‘भाई साहब’ या ‘जी सर’ कहें।

पदाधिकारियों को न किया जाए नजरंदाज

यह फरमान कुशीनगर स्थित बीजेपी कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान जारी किया गया, जिसमें मंडल के सांसद, विधायक और पार्टी संगठन के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान, दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि मंडल अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के फोन किसी भी अधिकारी द्वारा नजरअंदाज नहीं किए जाने चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि एसडीएम, तहसीलदार, और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के पास मंडल अध्यक्ष का नंबर हो और वे तत्काल प्रतिक्रिया दें।

लोकसभा चुनाव की हार के बाद शिकायतें

मंत्री के इस आदेश के पीछे लोकसभा चुनावों में बीजेपी की हार के बाद की शिकायतों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। कई विधायक और भाजपा पदाधिकारियों ने अधिकारियों पर उनकी अनदेखी का आरोप लगाया था, जिससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा। इन शिकायतों के बाद, पार्टी नेतृत्व ने अधिकारियों से जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए यह कदम उठाया है।यह देखा जाएगा कि इस आदेश का प्रभाव किस हद तक होगा और क्या इससे बीजेपी को भविष्य के चुनावों में लाभ मिलेगा।