
Consumer Commission
नई दिल्ली। अब अगर किसी दुकानदार या निर्माता के सामान में खराबी पाई जाती है तो उसे पांच साल तक की जेल हो सकती है। यहीं नहीं उन पर 50 करोड़ रुपए का जुर्माना तक ठोका जा सकता है। यह नियम नए उपभोक्ता कानून ( consumer bill ) में दिए गए हैं। जिसे केंद्रीय मंत्रीमंडल से मंजूरी मिल चुकी है। यह नया कानून 1986 में तैयार हुए पुराने उपभोक्ता संरक्षण कानून ( Consumer Protection Law ) को रिप्लेस करेगा। इसके अलावा कानून में उपभोक्ता अधिकार ( Consumers Rights ) और उनकी निगरानी के लिए कार्यसमिति बनाने का भी प्रावधान किया गया है। आपको बता दें कि इस कानून को पहले भी लोकसभा में पारित किया गया था, लेकिन राज्यसभा में पास ना होने के कारण कानून ठंडे बस्ते में चला गया था। अब इसे दोबारा से मंजूरी दी गई है।
कंज्यूमर्स की कंप्लेन सुनने को बनेगी
कानून के अनुसार कंज्यूमर के हितों के लिए एक सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटक्शन एजेंसी तैयार की जाएगी। इस एजेंसी की पूरे देश में ब्रांच होगी। हर ब्रांच का काम कंज्यूमर की शिकायतों को सिर्फ सुनना भर नहीं होगा बल्कि उसका निपटान करना भी होगा। यह एजेंसी कार्रवाई करने में भी सक्षम होगी। इस कानून को अमरीकी फेडरल ट्रेड कमीशन की तर्ज पर तैयार किया गया है।
कानून में जोड़ा गया क्लॉस सूट एक्शन
वहीं इस कानून में क्लॉस सूट एक्शन को भी जोड़ा गया है। जिसके तहत अगर किसी खराब उत्पाद का प्रभाव बड़े स्तर पर पड़ता है तो उसकी पूरी जवाबदेही आपूर्तिकर्ता कंपनी पर होगी। यानी उस क्लॉस सूट एक्शन तहत कार्रवाई की जाएगी। जानकारों के अनुसार क्लॉस एक्शन सूट का प्रावधान के तहत किसी खराब सामान पर निर्माता या सेवा देने वाले की जिम्मेदारी सिर्फ प्रभावित कंज्यूमर तक ही नहीं, बल्कि उस सेवा से जुड़े सभी उपभोक्ताओं तक होगी।
5 साल की जेल और 50 करोड़ रुपए जुर्माना
किसी सामान से कंज्यूमर को किसी तरह की हानि या मौत हो जाती है तो उसकी जिम्मेदारी मैन्यूफेक्चरर, सर्विस प्रोवाइडर और सेलर तीनों पर होगी। जिसके तहत कंपनी पर शिकंजा कसते हुए 5 साल जेल और 50 करोड़ तक जुर्माना लगाया जाएगा। खास बात तो ये है कि पीडि़त को लंबी सुनवाईयों के दौर से नहीं गुजरना पड़ेगा। जिला, राज्य या राष्ट्रीय स्तर में एक ही जगह सुनवाई होगी।
ई-कॉमर्स कंपनियों पर भी कसा जाएगा शिकंजा
अब नए कानून में ई-कॉमर्स कंपनियों पर भी नकेल कसी जाएगी। अब उन्हें प्रोडक्ट के प्रोडक्शन, लेबलिंग और नए विधेयक के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों की भी जवाबदेही बढ़ेगी। उन्हें उत्पाद के निर्माण, उसकी लेबलिंग, साइड इफेक्ट्स के बारे में भी जानकारी देनी होगी। वहीं कंपनियां कंज्यूमर्स द्वारा खरीदे गए सामान का डाटा किसी दूसरी कंपनी को नहीं दे सकेंगे। वहीं ई-कॉमर्स कंपनियों पर भी खराब सामान की जिम्मेदारी होगी।
झूठे विज्ञापन पर होगी जेल
वहीं कानून में झूठे और भ्रम फैलाने वाले विज्ञापनों पर भी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए मैन्यूफेक्चरर और सर्विस प्रोवाइडर के खिलाफ दो साल की जेल या दस लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है। खास बात तो ये है कि अगर कोई नामी सेलेब्रिटी भ्रम फैलाने वा विज्ञापनों को करता है तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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Published on:
25 Jun 2019 12:32 pm
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