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PMO में बढ़ रही है सरकारी विभागों को लेकर नाराजगी, कहा – मेक इन इंडिया को तहरीज नहीं देते अधिकारी

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सभी सरकारी विभागों को विदेशी प्रोडक्ट का प्रयोग करने से मना किया है। उनका कहना है कि हमें अपने देश में रहकर अपने ही देश के प्रोडक्ट को बढ़ावा देना चाहिए और उनकी मैन्युफैक्चरिंग को भी आगे बढ़ाना चाहिए।
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Manish Ranjan

Feb 04, 2019

pm

इस वजह से PMO में बढ़ रही है सरकारी विभागों को लेकर नाराजगी, चुनाव में पड़ सकता है इसका सीधा असर

नई दिल्ली। पीएम मोदी ने हमेशा से ही 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सभी सरकारी विभागों को विदेशी प्रोडक्ट का प्रयोग करने से मना किया है। उनका कहना है कि हमें अपने देश में रहकर अपने ही देश के प्रोडक्ट को बढ़ावा देना चाहिए और उनकी मैन्युफैक्चरिंग को भी आगे बढ़ाना चाहिए।


सचिव ने लिखा पत्र

पीएम को सचिव नृपेंद्र मिश्रा ने 3 जनवरी को सभी सचिवों को पत्र लिखकर कहा कि हमें पिछले कुछ दिनों से ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि सरकारी संस्थाएं अपने टेंडर में विदेशी उत्पादों को बढ़ावा दे रही हैं, जिसके कारण देश के लोकल मैन्युफैक्चरर्स बिडिंग प्रोसेस से बाहर हो गए हैं। उन्होंने पत्र में लिखकर कहा कि ऐसा करना कानून के खिलाफ है। हमें भारत में रहकर विदेशी उत्पादों और ब्रैंड्स के इस्तेमाल से बचना चाहिए।


हमें मेक इन इंडिया की चिंता है

आपको बता दें कि उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि हमें मेक इन इंडिया की फ्रिक है। हमें अपने देश के प्रोडक्ट को बढ़ावा देना चाहिए। हमें विदेश के ऐसे किसी भी टेंडर को बढ़ावा नहीं देना चाहिए, जिससे लोकल मैन्युफैक्चरर्स और प्रवाइडर्स को परेशानी हो।


इससे पहले भी लिखा जा चुका है पत्र

इससे पहले भी प्रमुख सचिव ने सभी सरकारी विभागों को नियमों का पालन करने के लिए कहा था। इसके साथ ही उन्होंने दिसंबर 2017 में भी डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी ऐंड प्रमोशन (डीआईपीपी) को भी पत्र लिखकर कहा था कि हमें भारत के प्रोडक्टस को बढ़ावा देना चाहिए।


अधिकारियों द्वारा नियमों का पालन किया जाए

प्रमुख सचिव ने 10 दिसंबर 2017 को डीआईपीपी के सेक्रटरी रमेश अभिषेक को भी पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कई विभाग मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने वाले नियमों का पालन नहीं कर रहे। सभी विभागों के अालाअधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि वह इन नियमों का पालन करें और देश को आगे बढ़ाने में सहायता करें। इसके साथ ही हर टेंडर की इंडियन मैन्युफैक्चरर्स को ध्यान में रखकर समीक्षा होनी चाहिए।

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