
रेसिज्म पर टीसीएस को मिली अमरीका में क्लीन चिट, ज्यूरी ने कहा, कंपनी नहीं एंटी अमरीकन
नर्इ दिल्ली। देश की सबसे बड़ी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विस (TCS) को अमरीका में बड़ी राहत मिली है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार अमरीकी कर्मचारियों ने कंपनी पर भेदभाव का आरोप लगाया था जिसपर कैलिफोर्निया की ज्यूरी द्वारा टीसीएस को क्लीन चिट मिली है। जांच पूरी होने के बाद कैलिफोर्निया की ज्यूरी ने कहा कि टीसीएस एंटी अमेरिकन नहीं है। आदेश के बाद कंपनी ने बड़ी राहत की सांस ली है।
कंपनी पर लगे थे आरोप
कंपनी के 4 पूर्व कर्मचारियों ने आरोप लगाए थे कि उन्हें सिर्फ इसलिए निकाल दिया गया क्योंकि वे साउथ एशियन नहीं हैं। वहीं आरोप में यह भी कहा गया था कि अमरीका में आईटी सेक्टर में साउथ एशियन सिर्फ 12 फीसदी हैं, जबकि टीसीएस में इनकी संख्या 80 फीसदी के करीब है। इसके पहले भी इंडियन आईटी कंपनियों पर हायरिंग को लेकर भेदभाव के आरोप लग चुके हैं। ज्यूरी के आदेश आने के बाद इंडियन आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री को भी बड़ी राहत मिली है, जिनका बिजनेस मॉडल यूएसए में इंजीनियर्स के एक्सपोर्ट पर टिका है।
टीसीएस के स्पोकपर्सन का बयान
टीसीएस के स्पोकपर्सन बेन ट्राउनसन के अनुसार पूर्व कर्मचारियों का आरोप बेबुनियाद था। ब्लूमबर्ग को अपने मेल से दिए बयान में उन्होंने कहा कि हमें जूरी पर पूरा भरोसा था, जिन्होंने हमारे फेवर में फैसला दिया। हम किसी कर्मचारी को रखने का फैसला पूरी तरह से उसकी योग्यता को देखकर लेते हैं। टीसीएस के पूरी दुनिया में करीब 4 लाख के कर्मचारी काम कर रहे हैं।
टीसीएस है देश की सबसे बड़ी कंपनी
आपको बता दें कि TCS के शेयरों में बुधवार को आई तेजी के बाद कंपनी एक बार फिर मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की सबसे वैल्यूबल कंपनी बन गई है। इससे पहले 16 नवंबर को रिलायंस इंडस्ट्रीज मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से TCS को पीछे छोड़ते हुए सबसे मूल्यवान कंपनी बन गर्इ थी। इस लिहाज से भी कंपनी की सेहत के लिए यह खबर काफी अच्छी है।
Published on:
29 Nov 2018 11:37 am
