
Online Gaming Addiction Children ( Image: ChatGPT)
Online Gaming Addiction Children: गाजियाबाद में सामने आई एक गंभीर घटना ने ऑनलाइन गेमिंग और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीन नाबालिग सगी बहनों की मौत हो गई। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि तीनों एक टास्क-बेस्ड ऑनलाइन गेम से जुड़ी गतिविधियों में अत्यधिक समय बिता रही थीं। मामले की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना किसी एक ऐप या गेम तक सीमित नहीं माना जानी चाहिए, बल्कि इसे टास्क-बेस्ड और इमर्सिव ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े व्यापक जोखिम के रूप में देखना जरूरी है। बीते वर्षों में भी इस तरह के कुछ मामलों में बच्चों और किशोरों पर मानसिक दबाव बढ़ने की बात सामने आती रही है।
टास्क-बेस्ड गेम्स ऐसे गेम होते हैं, जिनमें खिलाड़ी को लगातार लक्ष्य, चुनौतियां या निर्देश दिए जाते हैं। ये गेम अक्सर रोल-प्ले या सिमुलेशन के रूप में होते हैं, जिनमें खिलाड़ी को वर्चुअल किरदार से भावनात्मक रूप से जोड़ा जाता है। कुछ मामलों में इन गेम्स के अनौपचारिक या थर्ड-पार्टी वर्जन और उनसे जुड़े ऑनलाइन ग्रुप्स खिलाड़ियों को खतरनाक या मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाने वाले टास्क की ओर ले जा सकते हैं।
आज कई ऑनलाइन गेम्स में इन-गेम चैट या सोशल फीचर मौजूद होते हैं। इससे अजनबी लोग बच्चों से सीधे संपर्क कर सकते हैं। साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, कम उम्र के खिलाड़ी अक्सर यह समझ नहीं पाते कि सामने वाला व्यक्ति कौन है और उसकी मंशा क्या हो सकती है। इसी वजह से बच्चों की ऑनलाइन बातचीत पर निगरानी जरूरी मानी जाती है।
मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर कोई बच्चा अचानक अकेला रहने लगे, परिवार या दोस्तों से कटने लगे, फोन या टैब को लेकर अत्यधिक गोपनीयता बरतने लगे, रात में देर तक जागकर गेम खेले और व्यवहार में चिड़चिड़ापन या डर दिखाए तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
1. स्क्रीन टाइम और कंटेंट पर निगरानी
अभिभावकों को यह जानना जरूरी है कि बच्चा कौन-सा गेम खेल रहा है, उसमें क्या कंटेंट है और उसमें चैट या ऑनलाइन संपर्क की सुविधा है या नहीं। जरूरत पड़ने पर पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।
2. उम्र के हिसाब से गेम चुनने पर जोर
ऐप स्टोर पर दी गई उम्र-रेटिंग और कंटेंट विवरण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कम उम्र के बच्चों को रोल-प्ले या टास्क-बेस्ड गेम्स से दूर रखना विशेषज्ञ बेहतर मानते हैं।
3. बच्चों से खुलकर बातचीत
बच्चों को डराने या डांटने के बजाय उनसे बातचीत करना ज्यादा असरदार होता है। अगर बच्चा किसी गेम या ऑनलाइन अनुभव को लेकर असहज महसूस कर रहा है, तो उसे खुलकर बताने का माहौल मिलना चाहिए।
गाजियाबाद की यह घटना ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े संभावित खतरों की ओर इशारा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समाधान केवल प्रतिबंध नहीं, बल्कि जागरूकता, संवाद और निगरानी है। डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभिभावकों, स्कूलों और प्लेटफॉर्म्स तीनों की भूमिका अहम मानी जाती है।
यदि किसी बच्चे या किशोर में गंभीर मानसिक परेशानी के संकेत दिखें, तो तुरंत किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या काउंसलर से संपर्क करना जरूरी है।
Published on:
05 Feb 2026 11:41 am
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