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23 मार्च का वो इतिहास, जिसने भारत और पाकिस्तान दोनों का भविष्य बदल दिया, जानिए इस दिन की पूरी दास्तां

23 March History in Hindi: आज के लेख में आइए विस्तार से जानते हैं कि आज के दिन दोनों देशों में ऐसा क्या हुआ था, जिसने दोनों देशों का भविष्य बदल दिया।

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23 March History

23 March History| image credit gemini

23 March History in Hindi: 23 मार्च की तारीख इतिहास के पन्नों पर दर्ज वो स्याही है, जिसने भारत और पाकिस्तान की तकदीर को अलग-अलग रंगों से लिखा। यह दिन सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान के लिए भी खास है। एक ही तारीख सरहद के दोनों तरफ अलग-अलग यादें लेकर आती है। जहां एक तरफ यह दिन भारत के वीरों की कुर्बानी और उनके हौसले की याद दिलाकर हर हिंदुस्तानी की आंखें नम कर देता है, वहीं दूसरी तरफ यह पाकिस्तान के एक इस्लामी देश के रूप में खड़े होने की कहानी कहता है। भले ही आज दोनों देशों के रास्ते अलग हैं, लेकिन 23 मार्च वो बड़ा मोड़ है जिसने दोनों मुल्कों की तकदीर हमेशा के लिए बदल दी। आइए जानते हैं कि आज के दिन दोनों देशों में ऐसा क्या हुआ था।

भारत के लिए क्यों खास है यह दिन?


भारत के लिए 23 मार्च बहादुरी और देशभक्ति का प्रतीक है। साल 1931 में इसी दिन आजादी के दीवाने भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु ने मुस्कुराते हुए फांसी के फंदे को गले लगा लिया था। लाहौर जेल में दी गई उनकी यह कुर्बानी सिर्फ एक घटना नहीं थी, बल्कि इसने पूरे देश में क्रांति की ऐसी आग लगा दी थी, जिसने अंग्रेजी सरकार की जड़ें हिला दीं। इन महान क्रांतिकारियों का निस्वार्थ बलिदान आज भी हर हिंदुस्तानी को यह अहसास कराता है कि हमारी आजादी कितनी कीमती है। हर साल यह दिन उन अमर शहीदों को सलाम करने और उनका आभार व्यक्त करने का है और इसीलिए इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।

पाकिस्तान के लिए क्यों खास है यह दिन?


पाकिस्तान हर साल 23 मार्च को अपना नेशनल डे (National Day of Pakistan) मनाता है। वैसे तो पाकिस्तान 14 अगस्त को अपनी आजादी का जश्न मनाता है, लेकिन 23 मार्च का उनके लिए एक अलग ही महत्व है। 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान काफी समय तक अपने कायदे-कानून और पहचान की तलाश में रहा। पाकिस्तान बनने के करीब नौ साल बाद, 23 मार्च 1956 को वहां पहला संविधान (Constitution) लागू किया गया था और इसी दिन पाकिस्तान को आधिकारिक तौर पर एक इस्लामी गणराज्य घोषित किया गया। हालांकि वहां का लोकतंत्र सेना और आतंकवाद की वजह से काफी मुश्किलों में रहा और उनका पक्का संविधान 1973 में जाकर लागू हुआ, लेकिन पहले संविधान की याद में आज भी पाकिस्तान इस दिन को अपना नेशनल डे मानता है।

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