
Famous Indian Sarees/image credit instagram/komalvora_/filmygyan/sanika_kashikar/kalaimalaii/streehere/meri_saas_ki_saree/manishmalhotra05
7 Famous Indian Sarees: भारत में साड़ी सिर्फ एक ट्रेडिशनल कपड़े के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ी पहचान के तौर पर देखी जाती है। इसलिए देश के अलग अलग राज्यों के शहरों में बनने वाली साड़ियां अपनी खास बुनाई, डिजाइन और रंग के साथ साथ अपने शहर की पहचान भी बन चुकी हैं। आइए जानते हैं ऐसी ही 7 साड़ियों के बारे में, जो अपनी खासियत के साथ ही अपने शहर के नाम की वजह से भी जानी जाती हैं।
बनारसी साड़ी का नाम उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) यानी बनारस शहर के नाम पर पड़ा है। यह साड़ी अपने खूबसूरत जरी के काम, सिल्क के कपड़े और शाही लुक के लिए जानी जाती है। शादी में दुल्हन की पहली पसंद बनारसी साड़ी आज भी बनी हुई है।
चंदेरी साड़ी मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले में स्थित चंदेरी कस्बे में बनाई जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका हल्का वजन और महीन कपड़ा है। सिल्क और कॉटन के मेल से बनने वाली यह साड़ी गर्मियों के लिए भी आरामदायक मानी जाती है।
चंदेरी साड़ी के अलावा महेश्वरी साड़ी भी मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में स्थित महेश्वर शहर में बनाई जाती है। इसकी पहचान इसकी खूबसूरत बॉर्डर और हल्के कपड़े से होती है। इसे पहनने में आसानी होती है और यह देखने में बेहद एलिगेंट लगती है। यही कारण है कि यह साड़ी हर उम्र की महिलाओं के बीच पसंद की जाती है।
तमिलनाडु के कांचीपुरम (Kanchipuram) शहर में बनने वाली कांजीवरम साड़ी अपनी मजबूत सिल्क और चौड़े जरी बॉर्डर के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इसकी चमक और डिजाइन इसे शादी और बड़े समारोहों के लिए खास बनाते हैं।
पैठणी साड़ियां आज के समय में मुख्य रूप से महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) और नासिक जिलों में बनाई जाती हैं। हालांकि, इस कला की शुरुआत औरंगाबाद जिले के पैठण शहर से हुई थी, इसलिए इसे पैठणी साड़ी कहा जाता है। वर्तमान में नासिक जिले का येओला (Yeola) शहर इसका सबसे बड़ा और प्रमुख उत्पादन केंद्र है। इसके पल्लू पर बने मोर, फूल और पारंपरिक डिजाइन इसकी सबसे बड़ी पहचान हैं।
राजस्थान के कोटा शहर में बनने वाली कोटा डोरिया साड़ी का सबसे बड़ा और पारंपरिक बुनाई केंद्र कोटा के पास स्थित कैथून (Kaithun) कस्बा है। यह साड़ी बेहद हल्की और आरामदायक होती है। इसके कपड़े में छोटे छोटे चौकोर डिजाइन बने होते हैं, जिन्हें 'खाट' कहा जाता है।
बालूचरी साड़ी का नाम पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बालूचर गांव से जुड़ा है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसके पल्लू और बॉर्डर पर पारंपरिक कहानियों से जुड़े डिजाइन बुने जाते हैं। यह साड़ी कला और परंपरा का बेहतरीन मेल मानी जाती है और खास मौकों पर पहनने के लिए बेहतरीन विकल्प है।
Updated on:
17 Jul 2026 12:54 pm
Published on:
17 Jul 2026 12:54 pm
