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बच्चों की कलम से, मासूमियत और अहसास

किड्स कॉर्नर: चित्र देखो कहानी लिखो 75 .... बच्चों की लिखी रोचक कहानियां परिवार परिशिष्ट (22 अप्रेल 2026) के पेज 4 पर किड्स कॉर्नर में चित्र देखो कहानी लिखो 75 में भेजी गई कहानियों में क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय विजेता रहे। इनके साथ सराहनीय कहानियां भी दी जा रही हैं।

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जयपुर

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Tasneem Khan

Apr 30, 2026

किड्स कॉर्नर: चित्र देखो कहानी लिखो 75 .... बच्चों की लिखी रोचक कहानियां

गर्मी में खेत का सुकून

तनिष्का खारोल, 07 वर्ष

गर्मी की छुट्टियों के दिन थे। सूरज बहुत तेज चमक रहा था। तन्नू और उसका छोटा भाई रुद्र अपने खेत पर गए थे। खेत तक जाने में उनके पैर गरम हो गए थे और उन्हें बहुत थकान महसूस हो रही थी। खेत के पास एक कुंआ था और उसके पास ही एक गोल सा छोटा सीमेंट का गड्ढा बना हुआ था, जहां पानी इकट्ठा किया जाता था। तन्नू ने बाल्टी से कुंए से पानी निकाला और उस गड्ढे में भर दिया। फिर दोनों भाई-बहन किनारे बैठ गए और अपने पैर ठंडे पानी में डाल दिए। जैसे ही उनके पैर पानी में गए, उन्हें बहुत सुकून मिला। रुद्र मुस्कुराते हुए बोला, “दीदी, अब कितना अच्छा लग रहा है!” तन्नू भी हंसकर बोली, “हां, ठंडा पानी सारी थकान दूर कर देता है।” दोनों कुछ देर तक ऐसे ही बैठे रहे, बातें करते रहे और गर्मी को भूल गए। खेत की हवा और ठंडा पानी उन्हें बहुत अच्छा लग रहा था। शाम होने लगी तो वे खुश होकर घर लौट गए।

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हिम्मत और साथ

असद खान, 07 वर्ष
रीना और छोटू नदी किनारे बैठे अपने पैर पानी में डालकर खेल रहे थे और बहुत खुश थे। रीना अपने छोटे भाई का हाथ पकड़े हुए थी ताकि वह सुरक्षित रहे। अचानक छोटू का पैर फिसल गया और वह डर गया, लेकिन रीना ने तुरंत उसका हाथ कसकर पकड़ लिया और उसे गिरने से बचा लिया। छोटू ने मुस्कुराकर कहा, “दीदी, आप मेरी हीरो हो।” उस दिन छोटू ने सीखा कि मुश्किल समय में हिम्मत और अपनों का साथ सबसे बड़ी ताकत होती है।
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गांव की पगडंडी और यादों का तालाब

शिवांश सोनी, 07 वर्ष
आर्यन और सुमी हर साल गर्मियों में शहर के शोर-शराबे से दूर अपनी नानी के घर आते थे। एक शांत दोपहर, खेतों में दौड़ने, पौधों को पानी देने और तितलियों के पीछे भागने के बाद, दोनों थककर एक छोटे से जलकुंड के पास रुक गए। सुमी ने अपना नारंगी फ्रॉक संभाला और पत्थर की मेड़ पर बैठ गई। उसने धीरे से अपने पैर पानी में डाले और सुकून की एक ठंडी आह भरी। पास में रखी पुरानी लोहे की बाल्टी उनकी मेहनत की गवाह थी, जिससे उन्होंने सुबह पौधों को पानी दिया था। अब वही पानी उन्हें शीतलता दे रहा था। पानी की लहरों को देखते हुए आर्यन ने कहा, "सुमी, हम बड़े होकर भी हर साल यहां जरूर आएंगे।" सुमी ने मुस्कुराते हुए सिर हिला दिया। जीवन की भागदौड़ में हम अक्सर ठहरना भूल जाते हैं। कभी-कभी बस शांत बैठकर पानी की लहरों को महसूस करना ही सबसे बड़ी खुशी है।
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मदद का हाथ

कार्तिक लोधी, 11 वर्ष
एक दिन रिया और उसका छोटा भाई सोनू तालाब के किनारे खेल रहे थे। खेलते-खेलते सोनू का पैर फिसल गया और वह गिर पड़ा। उसके पैर में हल्की चोट लग गई और वह रोने लगा। रिया तुरंत उसके पास आई और उसे सहारा देकर बैठा दिया। रिया ने धीरे-धीरे सोनू के पैर पानी में डालकर उसकी चोट साफ की। वह बहुत ध्यान से उसका पैर धो रही थी ताकि उसे दर्द न हो। सोनू अपनी बहन को देखता रहा और थोड़ी देर में उसका रोना बंद हो गया। रिया ने कपड़े से उसका पैर पोंछा और प्यार से पूछा, “अब ठीक लग रहा है?” सोनू मुस्कुराकर बोला, “हां दीदी।” तभी एक बुजुर्ग व्यक्ति वहां आए। उन्होंने यह देखा और बोले, “बेटा, तुम बहुत दयालु हो। दूसरों की मदद करना सबसे बड़ी अच्छाई है।” रिया उनकी बात सुनकर खुश हुई। उसे समझ आ गया कि अपनों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है।

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हिम्मत और समझदारी

फिओना जैन, 09 वर्ष
परी और काशु नदी किनारे पानी में पैर डालकर ठंडी हवा का आनंद लेते हुए खेल रही थीं। अचानक काशु का पैर फिसल गया और वह घबरा गई। परी ने घबराने के बजाय समझदारी दिखाई। उसने तुरंत काशु का हाथ कसकर पकड़ लिया और उसे धीरे-धीरे अपनी ओर खींच लिया। काशु अब सुरक्षित थी। उसने मुस्कुराकर कहा, “तुमने मेरी जान बचा ली!” परी ने कहा, “डरने से नहीं, सोच-समझकर काम करने से समस्या हल होती है।” दोनों ने सावधानी से खेलना जारी रखा और शाम को खुशी-खुशी घर लौट गईं।

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प्रकृति का आनंद

परिणीति कठोर, 09 वर्ष
गर्मी की एक सुहानी दोपहर थी। रिया और उसका छोटा भाई रोहन पास के एक बाग में खेल रहे थे। खेलते-खेलते उन्हें थोड़ी गर्मी महसूस हुई, तो वे पास ही बह रही एक छोटी सी नदी के किनारे जा बैठे। नदी का पानी बहुत साफ और ठंडा था। दोनों ने अपने जूते उतारे और किनारे पर बैठकर अपने पैर पानी में डाल दिए। ठंडे पानी के स्पर्श से दोनों के चेहरे पर मुस्कान आ गई। पास में ही उनका पानी का एक छोटा डिब्बा भी रखा था, जिससे वे पानी के साथ खेल रहे थे। रोहन ने चहकते हुए कहा, "दीदी, देखो पानी कितना ठंडा और प्यारा है!" रिया ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "हां रोहन, और देखो आसपास कितनी शांति है।" वे दोनों काफी देर तक वहां बैठे रहे, लहरों को अपने पैरों से टकराते हुए देखते रहे और प्रकृति का आनंद लेते रहे। यह उनके लिए दिन का सबसे सुकून भरा समय था।
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फुर्सत के पल

मीत, 12 वर्ष
गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही हम सब भाई-बहन नानी के घर पहुंच जाते थे। नानी का घर गांव में था, जहां चारों तरफ हरियाली, खेत और आम के बगीचे थे। वहां पहुंचते ही मन खुशी से भर जाता था। घर के पीछे एक छोटी सी पानी की धार बहती थी। हम रोज सुबह से ही वहां पहुंच जाते और घंटों पानी में पैर डालकर बैठते रहते। ठंडा-ठंडा पानी हमारी सारी थकान दूर कर देता। पास में ही आम का बगीचा था। हम पेड़ों से गिरे हुए आम उठाते और मिल-बांटकर खाते। उन मीठे आमों का स्वाद आज भी याद आता है। नानी हमें बीच-बीच में बुलाकर खाना खिलातीं, लेकिन हमारा मन तो बस खेल-कूद में ही लगा रहता। न स्कूल के होमवर्क की चिंता थी, न मम्मी की डांट का डर। बस पूरे दिन हंसी, शरारत और मस्ती चलती रहती। शाम को हम सब साथ बैठकर दिनभर की बातें करते और अगले दिन की नई योजनाएं बनाते। नानी की कहानियां सुनते-सुनते कब नींद आ जाती, पता ही नहीं चलता। वो दिन सच में बहुत खास थे।
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सच्ची दोस्ती

रियांशी अग्रवाल, 07 वर्ष
एक गांव में तालाब के किनारे दो दोस्त खेल रहे थे, एक का नाम रिया था और दूसरे का रोहन। खेलते-खेलते रोहन का पैर फिसल गया और वह तालाब के पास गिर पड़ा, जिससे उसके घुटने में चोट लग गई। रोहन दर्द से रोने लगा। रिया ने तुरंत घबराने के बजाय समझदारी दिखाई। उसने रोहन की मदद की और उसे सहारा देकर किनारे बैठाया, फिर पास की बाल्टी से पानी लेकर उसने धीरे-धीरे रोहन का पैर धोया और उसकी चोट साफ की। उसने रोहन से कहा, "डर मत, मैं हूं ना, तुम दुखी मत हो, मैं तुम्हें तुम्हारे घर तक पहुंचा दूंगी।" रोहन ने मुस्कुराते हुए कहा, “धन्यवाद रिया, तुम बहुत अच्छी दोस्त हो।” रिया रोहन को धीरे-धीरे घर ले गई। रोहन खुश हुआ और समझ गया कि सच्चा दोस्त वही होता है, जो मुसीबत में साथ दे और हिम्मत बढ़ाए।

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भाई-बहन का प्यार

शिवम सैन, 07 वर्ष
एक दिन दो छोटे भाई-बहन, रीना और मोनू, अपने घर के पास वाले तालाब के किनारे बैठे थे। गर्मी का मौसम था, इसलिए दोनों ने अपने पैर पानी में डाल रखे थे। ठंडा पानी उनके पैरों को छूकर बहुत अच्छा लग रहा था। रीना अपने छोटे भाई का हाथ पकड़े हुए थी, ताकि वह फिसल न जाए। मोनू पानी में हल्के-हल्के पैर हिला रहा था, जिससे पानी में छोटी-छोटी लहरें बन रही थीं। दोनों हंस रहे थे और उस पल का आनंद ले रहे थे। पास में एक बाल्टी रखी थी, जिसमें वे पानी भरकर खेलना चाहते थे। अचानक मोनू का पैर थोड़ा फिसला, लेकिन रीना ने तुरंत उसे संभाल लिया। मोनू डर गया, पर रीना ने प्यार से कहा, “डर मत, मैं हूं ना।” मोनू मुस्कुराने लगा और फिर से खेलने लगा। कुछ देर बाद उनकी मां ने उन्हें घर बुलाया। दोनों खुशी-खुशी उठे और घर की ओर चल पड़े। उस दिन उन्होंने सीखा कि साथ रहने से डर कम हो जाता है और खुशी बढ़ जाती है।
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एक प्यारी दोस्ती

शेख अरशद, 12 वर्ष
नदी के किनारे एक छोटे से गांव में अमीरा और आयशा रहती थीं। वे सबसे अच्छी दोस्त थीं। एक सुनहरी दोपहर, वे किनारे पर बैठ गईं और अपने पैर ठंडे पानी में डाल दिए। अमीरा ने एक पुरानी बाल्टी निकाली और पानी से खेलने लगी। पानी की लहरें उनके पैरों को छू रही थीं, जिससे उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था। दोनों ने ढेर सारी बातें कीं और खिलखिलाकर हंसने लगीं। ढलते सूरज की रोशनी में, वह पल उनकी दोस्ती की एक खूबसूरत याद बन गया।
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साफ पानी, सुखी जिंदगानी

तनु जोशी, 11 वर्ष
सुसनेर नामक गांव में चम्मू और नन्नू नाम के दो भाई-बहन रहते हैं। उनके ही गांव के पास एक बावड़ी है जो कि पूरी तरह से सूखी हुई है और गांव के लोग उसमें कचरा डालते हैं। यह देख चम्मू और नन्नू दोनों उदास हो गए और उनके मन में उसे साफ करने का विचार आया। अगले ही दिन उन्होंने उसे साफ करने का काम चालू किया। यह देख गांव के बड़े लोगों ने भी उनकी सहायता की। यही काम लगातार 15 दिन तक चलता रहा। 15 दिन बाद काम पूर्ण हो गया और बावड़ी पूरी तरह से साफ हो गई। अगले ही दिन उन्होंने पानी के लिए खुदाई चालू कर दी और यह सिलसिला भी लगातार 8 दिनों तक चला। 8 दिन बाद उस बावड़ी में से जल की एक धारा निकल आई। यह देख पूरे गांव वालों ने उनकी बहुत प्रशंसा की और गांव में पानी की समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो गई।

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बचपन की यादें

विहान अग्रवाल, 07 वर्ष
आज मैं और मेरे पापा साथ बैठे थे। पापा अखबार पढ़ रहे थे। तभी उनकी नजर एक तस्वीर पर पड़ी—तालाब के किनारे बैठे दो बच्चे, पैर पानी में डाले, और पीछे लहराते हुए हरे-भरे खेत। पापा कुछ देर तक उस तस्वीर को देखते रहे, फिर हल्का सा मुस्कुराए। मैंने पूछा, “क्या हुआ पापा?” उन्होंने कहा, “इस तस्वीर को देखकर मुझे अपना बचपन याद आ गया…” फिर उन्होंने बताना शुरू किया— “जब मैं छोटा था, मैं भी अपने दोस्तों के साथ ऐसे ही तालाब के किनारे बैठता था। हम पैर पानी में डालकर खेलते थे और दूर खेतों को हवा में लहराते देखते रहते थे। उस समय न कोई चिंता थी, न कोई जल्दी… बस हंसी और सुकून था।” पापा ने मेरी तरफ देखकर कहा, “बेटा, बचपन के ये छोटे-छोटे पल ही सबसे खास होते हैं, इन्हें हमेशा याद रखना।” उस दिन मुझे समझ आया कि पुरानी यादें कभी पुरानी नहीं होतीं।
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पर्यावरण की मदद

रियांसी मीना, 08 वर्ष
एक छोटे से गांव में मीना और राजू नाम के दो पक्के दोस्त रहते थे। एक दिन वे दोनों गांव के पास वाली नदी के किनारे खेल रहे थे। खेलते-खेलते उन्होंने देखा कि नदी का पानी बहुत साफ और ठंडा है। मीना ने एक बाल्टी ली और पानी भरने लगी, जबकि राजू पास ही एक पत्थर पर बैठकर उसे देख रहा था। अचानक राजू का पैर फिसल गया, लेकिन मीना ने फुर्ती से उसका हाथ थाम लिया। दोनों खिलखिलाकर हंस पड़े। उन्होंने तय किया कि वे मिलकर पानी भरेंगे और पास के बगीचे में सूख रहे पौधों को पानी देंगे। इस तरह खेल-खेल में उन्होंने न केवल मजे किए, बल्कि पर्यावरण की मदद भी की। उनकी यह छोटी सी कोशिश हमें सिखाती है कि साथ मिलकर काम करने से कोई भी काम आसान और आनंददायक बन जाता है।
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एक नया दोस्त

गर्विष्ठ पनेरी, 08 वर्ष
मीरा अपनी मम्मी की सबसे सुंदर अंगूठी लेकर झील के किनारे अकेले बैठी थी। वह अंगूठी से खेल रही थी तभी अचानक उसका हाथ फिसला और अंगूठी छपाक से पानी में गिर गई। मीरा बहुत डर गई और रोने लगी क्योंकि उसे लगा कि अब मम्मी उसे डांटेंगी। तभी वहां छवि नाम की एक लड़की आई। छवि ने पास आकर पूछा, "तुम क्यों रो रही हो?" मीरा ने बताया कि अंगूठी गहरे पानी में गिर गई है। छवि ने कहा, "रो मत, हम दोनों मिलकर उसे ढूंढ लेंगे।" दोनों ने किनारे पर रखी बाल्टी ली और उसकी मदद से पानी को थोड़ा-थोड़ा हटाकर ध्यान से देखना शुरू किया। छवि ने हाथ डालकर रेत के बीच से वह अंगूठी निकाल ली। मीरा बहुत खुश हो गई। मीरा को अब अंगूठी भी मिल गई थी और एक बहुत प्यारी सहेली भी।
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आपसी मदद और भाईचारा

केशव तिवारी, 13 वर्ष
एक छोटे से गांव में आरव और रिया नाम के दो भाई-बहन रहते थे। एक शाम जब वे नदी किनारे खेल रहे थे, तब आरव का पैर फिसल गया और उसके घुटने पर चोट लग गई। वह दर्द से रोने लगा। रिया ने तुरंत अपनी खेल-कूद छोड़ी और पास की बाल्टी से ठंडा पानी लाकर आरव के घाव को साफ करने लगी। उसने बड़े प्यार से आरव को सहारा दिया और उसे ढांढस बंधाया। उस दिन दोनों ने सीखा कि मुसीबत में एक-दूसरे का साथ देना ही सबसे बड़ा धर्म है और भाई-बहन का रिश्ता निस्वार्थ प्रेम की नींव पर टिका होता है।
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प्रकृति का साथ

सम्राट पूनिया, 10 वर्ष
ये दोनों बच्चे हमेशा साथ खेलते थे। उस दिन उन्होंने सोचा कि क्यों न पानी के साथ थोड़ी मस्ती की जाए। दोनों नदी के किनारे एक पत्थर पर बैठ गए और अपने नन्हे पैर पानी में डाल दिए। पानी की ठंडक ने उन्हें चिलचिलाती धूप से राहत दी। पास ही में उनकी एक छोटी बाल्टी रखी थी। वे पानी की लहरों के साथ खेल रहे थे और आपस में अपनी छोटी-छोटी बातें साझा कर रहे थे। चारों तरफ हरियाली थी और नदी का पानी शांत था। उस पल में न कोई शोर था और न ही कोई जल्दबाजी, बस भाई-बहन का प्यार और प्रकृति का साथ था।
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पशु-पक्षियों की सेवा

केयांश बांठिया, 08 वर्ष
सानवी और कियांश भाई-बहन थे। वे खूब मस्तीखोर थे। गर्मी की छुट्टियों में वे घूमते-घूमते अपने घर के पास के पार्क में पहुंच गए। बहुत गर्मी थी। तभी उन्हें पानी का एक छोटा सा कुंड दिखा। वे उस कुंड की पार पर बैठ गए और अपने पांव कुंड में डाल दिए। उन्हें शीतलता का अहसास हुआ। तब सानवी बोली, "भैया देखो पानी में कितनी शीतलता है। हम तो पानी पीकर प्यास बुझा लेते हैं, किंतु पशु-पक्षियों को पानी कौन पिलाता होगा?" कियांश को भी बात समझ में आई। दोनों ने तय किया कि वे घर जाकर पशु-पक्षियों के लिए पानी रखेंगे। घर जाकर उन्होंने एक स्वच्छ बर्तन की व्यवस्था की और पानी भर कर रखा। जब छोटे-छोटे पक्षी आकर पानी पीने लगे तो वे खुशी से नाच उठे। उनके मम्मी-पापा भी बच्चों के इस कार्य से बहुत खुश हुए।
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स्वच्छता का महत्व

आञ्जनेय तिवारी, 07 वर्ष
एक बार की बात है दो लड़कियां रीना और अंजली बहुत अच्छी दोस्त थीं। एक दिन वे जहां खेलने जाती थीं वहां एक छोटा सा कुआं बारिश के पानी से भर गया था। रीना और अंजली ने उस कुएं का पानी पिया तो उन्हें वह बहुत मीठा और ठंडा लगा। वे रोज वहां से बाल्टी भरकर घर भी ले जाती थीं। एक दिन खेलते समय उनके पांव गंदे हो गए तो उन्होंने गलती से कुएं में ही पैर धो दिए। बाद में जब उन्हें प्यास लगी और उन्होंने पानी पीना चाहा, तो देखा कि पानी गंदा हो चुका है। उन्हें अपनी गलती समझ आई कि जल स्रोत को सीधा गंदा नहीं करना चाहिए। उन्होंने सीख ली कि आगे से वे पानी निकालकर बाहर ही हाथ-पैर धोएंगे ताकि पानी उपयोग के लायक रहे।
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पुरानी यादें

हर्ष, 15 वर्ष
खेतों के बीच बना वो छोटा सा हौद, शाम की सुनहरी रोशनी में चमक रहा था। उसके किनारे हर्ष और रीना बैठे थे। हर्ष धीरे से बोला, "ये क्या है, जो हमें पानी में दिख रहा है?" रीना मुस्कुराकर बोली, "ये हमारी परछाई है, जो हमें बताती है कि हम कैसे हैं।" हर्ष ने फिर पानी में देखा, पर इस बार कुछ अजीब था। उसका चेहरा तो था, लेकिन रीना का प्रतिबिंब नहीं था! हर्ष चौंक गया और रीना से पूछा। रीना बोली, "कुछ यादें सिर्फ दिल में रहती हैं, पानी में नहीं दिखतीं।" हर्ष का दिल तेजी से धड़कने लगा। उसे अचानक याद आया कि रीना तो दो साल पहले इसी हौद में डूब गई थी। उसने फिर पानी में देखा—अब वहां सिर्फ उसका ही चेहरा था। खेतों में सन्नाटा था, बस पास पड़ी बाल्टी में पानी हिल रहा था, जैसे किसी ने अभी-अभी उसे छुआ हो।
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सच्चा मित्र

कियान सोनी, 07 वर्ष
एक दिन दो बच्चे तालाब के किनारे बैठे थे। वे अपने पैर पानी में डालकर खेल रहे थे। अचानक लड़के के पैर में चोट लग गई। लड़की ने तुरंत उसका हाथ पकड़ा और उसे संभाला। उसने पास में रखी बाल्टी से पानी लेकर उसका पैर साफ किया। लड़का थोड़ा डर गया था, लेकिन लड़की ने उसे हिम्मत दी। कुछ देर बाद लड़का ठीक महसूस करने लगा और दोनों फिर से मुस्कुराने लगे। इस घटना से हमें सीख मिलती है कि हमें हमेशा अपने दोस्तों की मदद करनी चाहिए।
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नदी किनारे खुशी

कशिश कश्यप, 12 वर्ष
रीना और मोहन अच्छे मित्र थे। एक दिन दोनों नदी किनारे गए। वहां वे चट्टान पर बैठकर अपने पैर पानी में डालकर खेलने लगे। ठंडा पानी पाकर दोनों बहुत खुश हुए। दोनों ने देखा कि कुछ लोग वहां कूड़ा फेंक रहे थे। उन्होंने उन्हें समझाया कि पानी गंदा करने से सबको नुकसान होता है। दोनों ने मिलकर नदी किनारे सफाई की। उन्हें देखकर दूसरे बच्चे भी आ गए। सबने मिलकर जगह साफ कर दी। नदी किनारा फिर से सुंदर दिखने लगा। रीना और मोहन ने निश्चय किया कि वे हमेशा सफाई रखेंगे।
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एक-दूसरे की मदद

वेदिका, 07 वर्ष
रीना और उसका भाई सोनू गर्मी के दिन तालाब के किनारे खेलने गए। दोनों ने अपने पैर पानी में डालकर ठंडक का आनंद लिया। खेलते-खेलते सोनू का पैर फिसल गया और वह गिरने लगा, लेकिन रीना ने तुरंत उसका हाथ पकड़कर उसे संभाल लिया। सोनू डर गया था, पर रीना ने उसे हिम्मत दी। थोड़ी देर बाद वह फिर से मुस्कुराने लगा। घर लौटते समय सोनू ने रीना को धन्यवाद कहा। इस घटना से दोनों ने सीखा कि हमें हमेशा एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।
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मिट्टी के गड्ढे में मस्ती

विदिशा सुथार, 07 वर्ष
दो भाई-बहन थे पेप्पा और जॉर्ज। दोनों घर पर बोर हो रहे थे। जॉर्ज के दिमाग में एक आइडिया आया कि हम मिट्टी का गड्ढा बनाते हैं और मस्ती करते हैं। दोनों अपनी मम्मी से पूछकर गार्डन में खेलने गए। गार्डन में जाकर दोनों ने मिट्टी का गड्ढा बनाया और उसमें पानी डाला। फिर दोनों गड्ढे में कूद पड़े और उछल-उछलकर मिट्टी में खूब मस्ती की।
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बारिश का उपहार

जीनत खान, 09 वर्ष
चांदनी और रोशनी दो बहनें थीं जो दूसरे शहर में पढ़ाई करती थीं। एक बार बारिश का मौसम हुआ तो चांदनी ने रोशनी से कहा कि हम आंगन में एक बड़ा गड्ढा खोदते हैं ताकि उसमें बारिश का पानी भर जाए। रात में बहुत बारिश हुई। जब वे सुबह उठकर बाहर गईं तो वह गड्ढा पूरी तरह से भरा हुआ था। दोनों बहुत खुश हुईं और गड्ढे में पैर डालकर बैठ गईं। दोनों ने वहां बहुत मस्ती की।
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पानी में मस्ती

उदय शर्मा, 12 वर्ष
रीना और मीना दोनों बहनें थीं। मई का महीना था और गर्मी बहुत तेज थी। दोनों शाम के समय टहलने निकलीं। रीना को पार्क में पानी का हौद दिखाई दिया। दोनों बहनें हौद के किनारे पैरों को पानी में लटका कर बैठ गईं और ठंडे पानी में मस्ती करने लगीं। उन्हें बहुत मजा आ रहा था। रात होने से पहले दोनों घर वापस आ गईं।
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शीतलता और स्नेह

नाव्या कुशवाहा,08 वर्ष
धूप से भरी एक शांत दोपहर थी। गांव में खेत के मोटर पंप हौद के किनारे हरी घास पर बैठी छोटी सी गुड़िया अपने नन्हे पैर पानी में डाले मुस्कुरा रही थी। उसके पास ही उसका छोटा भाई भी बैठा था। दोनों के पैर पानी में हल्के-हल्के हिल रहे थे, जिससे पानी में बनती गोल-गोल लहरें उनके मन को शीतलता दे रही थीं। पास में रखी छोटी सी बाल्टी उनकी खेल की साथी थी। बहन प्यार से अपने भाई का हाथ थामे उसे संतुलन सिखा रही थी, ताकि वह फिसले नहीं।
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छोटी सी मछली

मीरा नागर, 10 वर्ष
एक समय की बात है दो भाई-बहन तालाब के किनारे घूमने गए। एक दिन वे तालाब से अपनी बाल्टी में पानी और एक मछली पकड़कर घर ले आए। माता-पिता ने समझाया कि मछली तालाब में ही सुरक्षित है और घर पर मर जाएगी। दोनों भाई-बहन समझ गए और मछली को वापस तालाब में छोड़ दिया। उन्होंने निर्णय लिया कि भविष्य में कभी भी किसी जीव-जंतु को परेशान नहीं करेंगे।
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भविष्य के सपने

आद्या व्यास, 11 वर्ष
घर के आंगन में बनी पानी की टंकी सुहानी और श्याम के लिए गर्मी से बचाव का साधन थी। दोनों भाई-बहन पैदल स्कूल जाते थे क्योंकि उनके पिता की कमाई कम थी। सुहानी और श्याम अपने माता-पिता की मेहनत को समझते थे और मन लगाकर पढ़ते थे। घर में कूलर या पंखा नहीं था, इसलिए स्कूल से आने के बाद वे टंकी के ठंडे पानी में पैर डालकर बैठ जाते। घंटों बातें करते हुए वे स्कूल में पढ़े पाठों को दोहराते और अपने भविष्य के सपनों को बालमन में संजोते।
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गर्मी और सुकून

दिव्यम माहेश्वरी, 11 वर्ष
सूरज बहुत तेज चमक रहा था। पिंकी और गोलू बगीचे में खेल रहे थे। खेलते हुए उन्हें बहुत गर्मी लगने लगी। तभी उन्हें बगीचे में पानी का एक छोटा सा गड्ढा दिखाई दिया। दोनों ने उस ठंडे पानी में अपने पांव डाले और गर्मी से राहत पाई। दोनों ने मिलकर वहां खूब मजे किए।
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लहरों की मस्ती

कृष्णा माहेश्वरी,11 वर्ष
मीनू और रोहन दो दोस्त थे। एक दिन दोनों पार्क में खेलने गए। वहां उन्होंने पानी का एक गड्ढा देखा। मीनू ने रोहन से कहा, "देखो, जब हम पानी में पैर हिलाते हैं तो गोल-गोल लहरें बनती हैं।" दोनों ने पानी में अपने पैर हिलाए और छोटी-छोटी लहरें बनते देख बहुत खुश हुए। उस दिन दोनों ने पानी में खूब मस्ती की।
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परोपकारी भाई-बहन

शांतनु पारीक, 12 वर्ष
माधव और पीहू दो भाई-बहन थे। उनके क्षेत्र में पानी की कमी के कारण जानवर प्यास से मर रहे थे। यह देखकर उन्होंने एक जल स्रोत बनाने की सोची। उन्होंने तालाब के आकार का एक गड्ढा खोदा और उसे पक्की मिट्टी से लीप दिया। जब वह सूख गया, तो उसमें पानी भर दिया। जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था कर दोनों भाई-बहन ने परोपकार की मिसाल पेश की।
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नन्हीं लहरें और दोस्ती

गर्विष्ठ प्रताप सिंह, 07 वर्ष
गांव के पुराने कुएं से बहते ठंडे पानी के पास बैठकर त्रियक्ष और वेदांशी अपनी ही दुनिया में खोए थे। वेदांशी बहते पानी की ठंडक महसूस कर रही थी, जबकि त्रियक्ष पानी में अपनी हिलती परछाईं देख रहा था। चिलचिलाती दोपहर में कुएं का यह कोना उनकी सबसे पसंदीदा जगह थी। सादगी भरा यह पल उनके बचपन की सबसे अनमोल याद बन गया।
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रिया और रयान का अपना समुद्र तट

नियांश नामा, 07 वर्ष
रिया और रयान गर्मियों की छुट्टियों में गांव गए थे। रयान का मन समुद्र तट पर खेलने का हुआ। गांव में समुद्र नहीं था, तो रिया ने अपना समुद्र बनाने का विचार दिया। दोनों ने बगीचे में एक गड्ढा खोदा और उसे पानी से भर दिया। उन्होंने पास की रेत से किले बनाए और पानी में पैर डालकर खूब मस्ती की। उन्हें महसूस हुआ कि खुश रहने के लिए बस साथ की जरूरत होती है।
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अपनों का साथ

मितांश चौहान, 07 वर्ष
सीमा और उसका भाई राहुल स्कूल से लौटते हुए नदी किनारे रुक गए। उन्होंने पत्थर पर बैठकर अपने पैर पानी में डाल दिए। अचानक राहुल का पैर फिसल गया, लेकिन सीमा ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया। सीमा ने कहा, "डरो मत, मैं हूं ना।" राहुल ने मुस्कुराते हुए सीखा कि अगर परिवार का साथ हो, तो डर भी छोटा लगने लगता है।
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गलती से सीख

आर्या जैन, 08 वर्ष
वीर को स्कूल में डांट पड़ी तो वह उदास होकर तालाब किनारे बैठ गया। उसकी बहन क्रिशा उसे ढूंढते हुए वहां पहुंची। वीर ने सारी बात बताई। क्रिशा ने समझाया कि डांट हमें सही रास्ता दिखाने के लिए होती है, उदास होने के लिए नहीं। वीर को अपनी गलती समझ आ गई और उसने उसे सुधारने का निश्चय किया।
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सच्ची मित्रता

मनस प्रताप सिंह, 10 वर्ष
रिया और कबीर तालाब किनारे ठंडे पानी का मज़ा ले रहे थे। अचानक कबीर के पैर में खरोंच लग गई। रिया ने घबराने के बजाय साफ पानी से उसका पैर धोया और अपने रुमाल से पट्टी बांध दी। कबीर ने सीखा कि सच्चा दोस्त वही है जो मुश्किल समय में साथ देता है।
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जल बचाओ अभियान

तनिष्का गौतम, 08 वर्ष
चेष्ठा और चित्रांशी ने देखा कि तालाब का पानी कम हो रहा है। उन्होंने घर और पड़ोस में सबको समझाया कि पानी बेकार न बहाएं। उन्होंने स्कूल में "जल बचाओ अभियान" चलाया। गांव के लोग जागरूक हुए और सबने मिलकर तालाब की सफाई की। बारिश होने पर तालाब फिर से भर गया।
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लहरों सी दोस्ती

आद्या, 12 वर्ष
मीरा और कुशल नदी किनारे पानी में पैर डालकर बैठे थे। तभी मीरा का पैर फिसल गया और कुशल ने उसे संभाल लिया। मीरा ने लहरों को देखकर कहा कि ये लहरें दोस्ती जैसी हैं जो हमेशा लौटकर आती हैं। कुशल ने भी माना कि सच्चा दोस्त वही है जो हर मुश्किल में साथ निभाता है।
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अनोखी शरारत

दीवांशी, 08 वर्ष
ये कहानी है दो बहनों गीता और रीटा की जो गर्मियों की छुट्टियों में रोज कुछ न कुछ नया खेल खेलती थीं। आज उन्होंने घर के नजदीक कच्ची जमीन पर एक छोटा गड्ढा बनाया और बाल्टी से पानी भरकर उसमें पैर लटका कर बैठ गईं। जब उन्होंने घर पर अपनी इस शरारत के बारे में बताया, तो सब हंसे और इसे एक 'अनोखी शरारत' कहा।
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बराबरी का प्यार

हिमांगी गौड़, 09 वर्ष
रीमा और आरव नदी किनारे खेल रहे थे। आरव का पैर गहरे गड्ढे में फिसलने लगा तो रीमा ने अपनी पूरी ताकत लगाकर उसे बचा लिया। मां, जो पहले आरव को ज्यादा महत्व देती थीं, उन्हें आज रीमा की बहादुरी का एहसास हुआ। उस दिन के बाद मां दोनों बच्चों को बराबर प्यार देने लगीं।
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सुनहरी यादें

दीपिका जैन, 12 वर्ष
रोहन और महक गांव की नदी किनारे पानी में पैर डालकर खेल रहे थे। सूरज ढल रहा था और आसमान नारंगी हो गया था। दोनों के लिए यह बचपन की खूबसूरत यादें बन रही थीं। मां की आवाज सुनकर दोनों हाथ पकड़कर खुशी-खुशी घर की ओर चल दिए।
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पानी व्यर्थ न जाने दें

अक्षिता चौधरी, 11 वर्ष
वर्षा और विधा बगीचे के तालाब के पास गईं। विधा ने पानी में पैर डाले, लेकिन समझदार वर्षा ने उसे मना किया कि इससे जल जीव मर सकते हैं। विधा ने अपनी बड़ी बहन की बात मानी और दोनों सुरक्षित घर लौट गईं।

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