सनस्क्रीन दो तरह से काम करते हैं। जिंक ऑक्साइड और टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसे भौतिक अवरोधक यूवी किरणों को परावर्तित करते हैं, जबकि एवोबेंजोन, ऑक्सीबेंजोन, ऑक्टोक्रिलीन और ऑक्टिसलेट जैसे रासायनिक अवरोधक उन्हें अवशोषित और बेअसर करते हैं। ज्यादातर आधुनिक उत्पाद इन दोनों का संयोजन करते हैं, जिससे भारतीय त्वचा के लिए उपयुक्त हल्के, गैर-चिकना बनावट वाले उत्पाद मिलते हैं।