
संतुलित जीवनशैली के लिए टिप्स (representative image) | image credit gemini
Digital Addiction Impact: देर रात तक जागने की आदत अब युवाओं में एक गंभीर हेल्थ समस्या बनती जा रही है। मनोचिकित्सक डॉ. संध्या चौकसे के अनुसार, लगातार कम नींद लेने से तनाव, मोटापा, डायबिटीज, PCOD और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म युवाओं की Sleep Cycle बिगाड़ रहे हैं, जिसका असर पढ़ाई और Emotional Health पर भी पड़ रहा है।
यह समझना जरूरी है सफलता सही समय पर आराम करने से मिलती है। एक स्वस्थ शरीर और शांत मन ही आपकी वास्तविक शक्ति होते हैं। यदि युवा पीढ़ी नींद और दिनचर्या को प्राथमिकता देती है, तो वह न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकती है, बल्कि मानसिक रूप से भी सशक्त बनकर आत्मविश्वासी बन सकती है।
नियमित व्यायाम या चहलकदमी शरीर को थकान देती है, जिससे नींद गहरी और सुकूनभरी होती है। शाम के समय चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन कम करना भी लाभकारी होता है।
अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। वे न केवल मार्गदर्शक होते हैं, बल्कि युवाओं के लिए आदर्श भी होते हैं। वे स्वयं संतुलित जीवन शैली अपनाएं ताकि बच्चों पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़े।
मानव शरीर प्राकृतिक लय में कार्य करता है, जिसे जैविक घड़ी या सर्केडियन रिदम कहा जाता है। रात शरीर के विश्राम और पुनर्निर्माण के लिए है। जब हम देर रात तक जागते हैं, तो प्राकृतिक प्रक्रिया बाधित होती है, इससे कोर्टिसोल की मात्रा बढ़ती है और शरीर लगातार तनाव की स्थिति में रहने लगता है।
डॉ. संध्या चौकसे के अनुसार, यह परिवर्तन धीरे-धीरे हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। कम उम्र के युवाओं में ही मधुमेह, थायरॉयड विकार, मोटापा और हृदय संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं, जैसे- चिंता, अवसाद और एकाग्रता की कमी भी आम होती जा रही है।
विशेष रूप से युवतियों में हार्मोनल असंतुलन एक बड़ी चिंता बनकर उभरा है। अपर्याप्त नींद के कारण पीसीओडी के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, जो शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ आत्मविश्वास और भावनात्मक संतुलन को भी प्रभावित करता है।
शैक्षणिक दृष्टि से भी देर रात तक जागने की आदत हानिकारक है। इससे स्मरण शक्ति कमजोर होती है, नई जानकारी को समझने और लंबे समय तक याद रखने की क्षमता घटती है, और निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित होती है।
स्मार्टफोन, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन गेम्स और ओटीटी कंटेंट ने युवाओं को एक ऐसे चक्र में बांध दिया है, जहां कुछ और समय बिताने की इच्छा धीरे-धीरे पूरी रात को निगल जाती है। यह डिजिटल निर्भरता न केवल नींद को प्रभावित करती है, बल्कि मानसिक शांति को भी समाप्त कर देती है।
Updated on:
31 May 2026 02:48 pm
Published on:
31 May 2026 02:46 pm
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