
Bihari makar sankranti thali
Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति बिहार का ऐसा त्योहार है जहां आपको आस्था और स्वाद का अनोखा संगम देखने को मिलता है। अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्या खास है, तो जान लें कि बिहार के लिए यह पर्व सिर्फ एक हंसी-ठहाकों का त्योहार ही नहीं, बल्कि इस पर्व को व्यंजन के जरिए अपनी संस्कृति को दर्शाते हैं। यहां पर एक विशेष पारंपरिक थाली सजाई जाती है, जिसमें स्वादिष्ट और पोषक तत्वों से भरपूर कई पकवान होते हैं और सबसे रोचक बात यह है कि हर एक व्यंजन की एक कहानी है, जो बिहार की संस्कृति को खाने में भी समेटे रखी है। आइए जानते हैं मकर संक्रांति पर बिहार की थाली में कौन-कौन से व्यंजन होते हैं और उनका क्या महत्व है।
बिहार में मकरसंक्रांति के समय पर तिलकुट का बड़ा ही महत्व है, इसे खासतौर पर इस दिन खाया जाता है। तिल शरीर को ऊर्जा देता है और गुड़ शरीर को गर्म रखता है। तिलकुट का सेवन मकर संक्रांति के दिन शरीर को गर्माहट देने के साथ-साथ समृद्धि और खुशहाली की कामना भी करता है।
गुड़ और तिल के लड्डू इस दिन के सबसे प्रसिद्ध मीठे पकवानों में से एक माने जाते हैं। गुड़ के मीठे स्वाद और तिल के स्वास्थ्य लाभ के कारण ये लड्डू खाने से शरीर गर्म रहता है।
चिउड़ा (पोहा) और गुड़ का मिश्रण मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2025) के दिन खास रूप से खाया जाता है। यह व्यंजन हल्का, स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है। चिउड़ा और गुड़ को खाने का एक उद्देश्य शरीर को गर्माहट देना और सर्दी से बचाव करना है।
मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाना एक पारंपरिक परंपरा है। इसे विशेष रूप से पूजा के दौरान खाया जाता है और सूर्य देव को अर्पित किया जाता है। खिचड़ी का सेवन शीतकाल में शरीर को हल्का, गर्म और पौष्टिक बनाने का काम करता है।
मालपुआ एक मीठा और स्वादिष्ट पकवान होता है, जो मकर संक्रांति के दिन खासतौर पर बनाया जाता है। यह पकवान त्योहार के उल्लास को बढ़ाने के साथ-साथ खुशी और समृद्धि का प्रतीक होता है। मालपुआ की मिठास जीवन में सुख और समृद्धि लाने का आह्वान करती है।
Published on:
12 Jan 2025 10:19 am
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