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यहां लड़कियों की एक नहीं बल्कि 3 बार होती है शादी, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान!

नेवारी समुदाय की तीन शादियां: आज के इस लेख में हम एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां लड़कियों की तीन बार शादी की जाती है और यह रिवाज अपनी इसी खासियत की वजह से पूरी दुनिया में मशहूर है। आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Newari Girl 3 Marriages Ritual

Newari Girl 3 Marriages Ritual: instagram| shainal_trivedii

Newari Girl 3 Marriages Ritual: शादी किसी भी इंसान के जीवन का एक बेहद खूबसूरत पल होता है, इसीलिए लोग इसे हमेशा सोच-समझकर करने की सलाह देते हैं। हर धर्म में शादी से जुड़ी अपनी कुछ रस्में और मान्यताएं होती हैं, जिनका पालन करना जरूरी माना जाता है। वैसे तो आमतौर पर एक इंसान की शादी एक ही बार होती है, लेकिन किसी वजह से अलग होने या तलाक के बाद लोग दूसरी शादी करते हैं। पर क्या आपने कभी सुना है कि किसी लड़की की तीन बार शादी की जाती है? सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह बिल्कुल सच है। आज के इस लेख में हम शादी की एक ऐसी ही रस्म के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां लड़कियों की तीन बार शादी की जाती है और यह रिवाज अपनी इसी खासियत की वजह से पूरी दुनिया में मशहूर है। आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

भगवान विष्णु के साथ पहली शादी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम चैनल shainal_trivedii पर CA Shainal Trivedi द्वारा शेयर किए गए वीडियो के अनुसार, नेपाल की नेवारी कम्युनिटी अपनी सदियों पुरानी और अनोखी परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां की सबसे खास बात यह है कि लड़कियों की जिंदगी में शादी का मौका एक बार नहीं, बल्कि तीन बार आता है। ये रस्में न सिर्फ उनके कल्चर को दिखाती हैं, बल्कि समाज में उनकी अहमियत को भी बढ़ाती हैं। जब लड़की करीब 5 से 9 साल की होती है, तब उसकी पहली शादी बेल के फल से करवाई जाती है। इसे इही (Ihi) या बेल बिबाह कहते हैं। नेवारी समाज में बेल के फल को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। चूंकि यह फल कभी खराब नहीं होता, इसलिए माना जाता है कि लड़की का पति हमेशा अमर रहेगा। यह रस्म लड़की की शुद्धि और उसके अच्छे भविष्य के लिए की जाती है।

सूरज की रोशनी से दूर दूसरी शादी

लड़की की दूसरी शादी सूरज से होती है। यह रस्म लड़की के पीरियड्स शुरू होने के बाद की जाती है। इसमें लड़की को 12 दिनों के लिए एक ऐसे कमरे में रखा जाता है जहां सूरज की किरणें बिल्कुल न पहुंच सकें। खिड़कियों को कपड़ों से ढक दिया जाता है ताकि वह सूरज न देख सके। इन 12 दिनों के दौरान लड़की किसी भी ऐसे पुरुष का चेहरा नहीं देख सकती और न ही उनसे बात कर सकती है। वह कमरे में अकेली नहीं होती, उसके साथ उसकी मां, चाची या कोई गुड़िया सहेली बनकर रहती है। 12वें दिन जब वह पहली बार कमरे से बाहर निकलकर सूरज को देखती है, तो इसे सूर्य दर्शन या सूरज से शादी कहा जाता है।

दूल्हे के साथ तीसरी शादी

दो शादियों के बाद, आखिर में लड़की की शादी एक इंसान यानी दूल्हे से होती है। इस परंपरा की सबसे सुंदर बात यह है कि क्योंकि लड़की की शादी पहले ही भगवान विष्णु और सूरज से हो चुकी है, इसलिए नेवारी समाज में उसे कभी विधवा नहीं माना जाता।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, समुदाय या परंपरा की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। इन परंपराओं की गहराई और ऐतिहासिक परिपेक्ष्य को पूरी तरह से समझने के लिए, हम आपको संबंधित विशेषज्ञों या आधिकारिक स्रोतों से परामर्श करने की सलाह देते हैं।