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Rising Temperature: बढ़ते टेम्प्रेचर के कारण हो सकती हैं किडनी से जुड़ी ये बीमारियां

Rising Temperature and Kidney Problems: बढ़ते टेम्परेचर और हियुमिडीटी के कारण लोग गर्मी से जुडी बिमारियों, जिन्हें हीट इलनेस (Heat illness) कहते हैं, से जूझ रहे है। बढ़ते हुए टेम्परेचर से हीट क्रैम्प्स , हीट एग्सहोशन और हीट स्ट्रोक (heat cramps, heat exhaustion and heat stroke) के केसेज बढ़ने लगते हैं। हीट इलनेस से अन्य समास्याओं के साथ ही हमारी किडनी की फंक्शनिंग पर भी बुरा असर पड़ता है।

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Rising Temperature and Kidney Problems: The Dangerous Connection

Rising Temperature and Kidney Problems: पिछले कुछ सालों से गर्मी में बहुत ज़्यादा टेम्परेचर और हियुमिडीटी रहने लगी है। इसके कारण लोग गर्मी से जुडी बिमारियों जिन्हें हीट इलनेस (Heat illness) कहते हैं, से जूझ रहे है। नेशनल किडनी फाउंडेशन में पब्लिश्ड एक आर्टिकल के अनुसार जब हमारा बॉडी टेम्परेचर 104 डिग्री फ़ारेनहाइट से अधिक हो जाता है तो वो हमारी किडनी के लिए भारी समस्याएं बन सकता है। गर्मी में होने वाली बीमारी के लक्षण आमतौर पर तब देखे जाते हैं जब शरीर का तापमान 104 डिग्री फ़ारेनहाइट तक पहुंच जाता है और हियुमिडीटी 70% से अधिक होती है। हियुमिडीटी के बढ़ने ही पसीना शरीर की गर्मी को नष्ट नहीं कर पाता जिससे शरीर का कोर टेम्परेचर बढ़ना शुरू हो जाता है। जैसे-जैसे टेम्परेचर बढ़ता है वैसे ही हीट इलनेस जैसे हीट क्रैम्प्स , हीट एग्सहोशन और हीट स्ट्रोक के केसेज बढ़ने लगते हैं। गर्मी में बढ़ते डिहाइड्रेशन से लौ ब्लड प्रेशर और किडनी की फंक्शनिंग पर बुरा असर पड़ता है।


Rising Temperature and Kidney Problems:
किडनी हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग हैं जो शरीर से वेस्ट और अतिरिक्त फ्लुइड्स को फ़िल्टर करता है, इलेक्ट्रोलाइट लेवल्स को नियमित करता है और ब्लड प्रेशर व रेड ब्लड सेल को नियंत्रित करने में मदद करने वाले हार्मोन का उत्पादन करने के लिए जिम्मेदार हैं। नेशनल किडनी फाउंडेशन में पब्लिश्ड एक आर्टिकल के अनुसार गर्मी में बढ़ते डिहाइड्रेशन से लौ ब्लड प्रेशर और किडनी की फंक्शनिंग पर बुरा असर पड़ता है। हीट इलनेस से हमारी बॉडी के कई मेटाबोलिक सिस्टम्स बंद होने लगते हैं जिससे किडनी की फंक्शनिंग कम होने लगती है। इसी के साथ मसल टिशू के टूटने से किडनी फेलियर हो सकता है। बहुत ज़्यादा हीट स्ट्रोक होने से हार्ट फेलियर और शॉक के कारण किडनी फेलियर भी हो सकता है।


Dehydration: बढ़ते टेम्परेचर से पसीना बढ़ सकता है जिसके कारण डिहाइड्रेशन हो सकता है। जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो किडनी शरीर के वेस्ट और टॉक्सिन्स को ब्लड से फ़िल्टर करने में असमर्थ हो जाती है।

Electrolyte imbalances: पसीने के बहने से हमारी बॉडी अपना फ्लुइड्स खोने लगती है। ऐसे में यह सोडियम, पोटेशियम और क्लोराइड जैसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट्स भी खो सकती है। किडनी की फंक्शनिंग के लिए यह सब बेहद जरूरी है।

Kidney stones: गर्मियों में बढ़ते टेम्परेचर के कारण यूरिन में मिनरल्स जाम होने लगते हैं। ऐसे में ब्लड में वेस्ट एलिमेंट्स बढ़ने लगते हैं जिन्हें किडनी फ़िल्टर नहीं कर पाती है और यही वेस्ट एलिमेंट आगे जाकर पथरी या किडनी स्टोन्स एबीएन जाते हैं।


Urinary tract infections: गर्म मौसम लोगों को अधिक पसीना आने का कारण बन सकता है। ऐसे में बैक्टीरिया के बढ़ने की सम्भावना ज़्यादा होती है। इसी कारण हामरी यूरिनरी ट्रैक्ट में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है जो आगे जा कर किडनी के लिए खतरा साबित होता है।

Heat exhaustion / stroke : तेज धूप में बाहर रहने से हीट एग्सहोशन होने का डर रहता है। इसके कारण डिहाइड्रेशन, लौ ब्लड प्रेशर और अन्य समस्याएं हो सकती हैं जो किडनी पर बुरा असर डालती हैं। लंबे समय तक तेज धूप के संपर्क में रहने से हीट स्ट्रोक हो सकता है, जिससे किडनी और अन्य ऑर्गन डैमेज हो सकते हैं।

गर्मियों में अपनी किडनी की सही देखभाल के लिए पानी और अन्य हेल्दी लिक्विड्स पिएं, तेज धूप में जाने से बचें, ठन्डे वातावरण में रहें और साथ ही हेल्दी खाना खाएं।

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