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Success Story : पेशाब से भीगी किताब-बाथरूम में खाई रोटियां, आज दुनिया ठोकती है सलाम, मिलिए PCS सविता प्रधान से

Savita Pradhan PCS Success Story: पीसीएस सविता प्रधान की रोंगटे खड़े कर देने वाली सक्सेस स्टोरी एक ऐसा सफर है, जो साबित करता है कि सफलता किसी सुविधा या अच्छे हालातों की मोहताज नहीं होती। आइए, उनके जीवन के संघर्ष की पूरी कहानी विस्तार से जानते हैं।

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Savitri Pradhan PCS Success Story

Savitri Pradhan PCS Success Story: image credit gemini and instagram

Savita Pradhan PCS Success Story: आज के समय में जहां महिलाओं के हक और समानता की बातें हो रही हैं। सरकार भी उनके बेहतर भविष्य के लिए कई योजनाएं चला रही है, वहीं पीसीएस (PCS) सविता प्रधान की कहानी रौंगटे खड़े कर देने वाला एक ऐसा सफर है। यह साबित करता है कि सफलता किसी सुविधा या अच्छे हालातों की मोहताज नहीं होती। एक ऐसी महिला जिसे बचपन में गरीबी ने घेरा और शादी के बाद अपनों के ही जुल्मों ने तोड़ना चाहा, उसने अपनी हिम्मत से किस्मत की लकीरें ही बदल दी। उनकी यह दास्तान उन करोड़ों महिलाओं के लिए एक मिसाल है जो आज भी खामोशी से अन्याय सह रही हैं। आइए, उनके जीवन के संघर्ष की पूरी कहानी विस्तार से जानते हैं।

गरीबी में भी नहीं छोड़ा पढ़ने का जज्बा

PCS सविता प्रधान का जन्म मध्य प्रदेश के एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था। उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में हुई। जब उन्होंने 10वीं में अच्छे नंबर हासिल किए, तो उनके माता-पिता ने उन्हें शहर के स्कूल में दाखिला दिलवा दिया। लेकिन शहर जाना इतना आसान नहीं था। बस का किराया सिर्फ 2 रुपये था, मगर सविता के पास उतने पैसे भी नहीं होते थे। अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए वह कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाती थीं। बाद में उनकी मां को उसी शहर में नौकरी मिल गई, जिससे उनका संघर्ष थोड़ा कम हुआ और उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की।

शादी के बाद नर्क जैसी जिंदगी

सविता की जिंदगी तब पूरी तरह बदल गई जब उनकी मर्जी के खिलाफ उनकी शादी कर दी गई। ससुराल वालों ने पढ़ाई जारी रखने का वादा तो किया था, लेकिन शादी होते ही वे मुकर गए। उन्हें घर में एक नौकरानी से भी बदतर रखा जाता था। सविता बताती हैं कि उन्हें भरपेट खाना तक नहीं दिया जाता था, वह भूख के मारे रोटियां छिपाकर बाथरूम में जाकर खाती थीं।

शारीरिक और मानसिक टॉर्चर इतना बढ़ गया था कि एक बार उन्होंने खुदकुशी करने की कोशिश की, लेकिन सोच-विचार कर उन्होंने फैसला किया कि वह इन लोगों के लिए अपनी जान नहीं देंगी। इसके बाद वह अपने दो बच्चों को लेकर वहां से भाग गईं।

फटी किताबों और अपमान के बीच पढ़ाई

घर छोड़ने के बाद सविता ने एक पार्लर में हेल्पर का काम शुरू किया और साथ ही ट्यूशन पढ़ाकर अपना घर चलाया। उन्होंने इसी दौरान अपनी ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन पूरी की। उनकी हिम्मत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके पास नई किताबें खरीदने के पैसे नहीं थे।

एक बार उनकी किताब पर एक कुत्ते ने पेशाब कर दिया था, लेकिन मजबूरी में उन्होंने उसी किताब को सुखाकर अपनी पढ़ाई जारी रखी। यहां तक कि उनके पति ने एक बार परीक्षा के दिन उन पर बाल्टी में पेशाब करके फेंक दी थी, लेकिन सविता हार नहीं मानीं और वह नहाने के बाद अपना पेपर देने चली गईं।

अफसर बनने के बाद भी पति की प्रताड़ना जारी

एक दिन अखबार में विज्ञापन देखकर सविता ने तैयारी शुरू की और अपनी कड़ी मेहनत से परीक्षा पास कर अफसर बनीं। लेकिन पद हासिल करने के बाद भी उनका पति उन्हें परेशान करता रहा। वह उनके ऑफिस आकर मारपीट करता और पैसे छीन लेता। सविता को लगता था कि अगर लोगों को उनकी निजी जिंदगी के बारे में पता चला तो उनकी इज्जत कम हो जाएगी, इसलिए वह चुप रहीं।

आखिर में उन्होंने अपने सीनियर पुलिस ऑफिसर (SP) की मदद ली और अपने पति को सबक सिखाया। आज सविता एक सफल ऑफिसर हैं।