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घर में सीलन लगने से हैं परेशान? तो एल्युमिनियम फॉयल टेस्ट से जानें इसकी असल वजह

दीवारों की सीलन चेक करने का तरीका: अगर आपके घर में भी सीलन लग रही है और आपको समझ में नहीं आ रहा है कि यह क्यों लग रही है, तो आप यहां बताए गए हैक्स से पता लगा सकते हैं।

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How To Check Wall Moisture

How To Check Wall Moisture| image credit gemini

How To Check Wall Moisture: अक्सर देखा गया है कि कई साल पहले बनवाए गए घरों में कहीं भी सीलन नहीं लगती, जबकि हाल ही में बने नए घरों में नमी की समस्या तुरंत दिखने लगती है। यह न केवल दिखने में खराब लगती है, बल्कि दीवारों की मजबूती और पेंट को भी बर्बाद कर देती है। ऐसे में अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो बिल्डिंग एक्सपर्ट्स द्वारा बताया गया किचन एल्युमिनियम फॉयल (Aluminum Foil) का एक हैक आपकी मदद कर सकता है। इस हैक के जरिए आप 24 से 48 घंटे में पता लगा सकते हैं कि सीलन की असल वजह क्या है।

सीलन का पता लगाने का तरीका (A Simple Test Borrowed from Building Science)

इंजीनियर मोहम्मद खरसेह और उनकी टीम ने एक रिसर्च में बताया था कि एल्युमिनियम फॉयल नमी का पता लगाने का सबसे सस्ता और आसान जरिया है। इसकी जांच करने के लिए दीवार के प्रभावित हिस्से को फॉयल से पूरी तरह कवर करके सील कर दिया जाता है। ऐसा करने से उस जगह पर हवा का आना-जाना बंद हो जाता है। जब हवा का बहाव रुक जाता है, तो नमी को सूखने या उड़ने की जगह नहीं मिलती और वह फॉयल पर जमा होने लगती है। इसी से यह पता चल जाता है कि पानी दीवार के अंदर से आ रहा है या बाहर की हवा से।

जांच के नतीजों को ऐसे समझें (How to Interpret the Results Without Guesswork)

दीवारों में नमी आने की मुख्य रूप से दो वजहें होती हैं। पहली वजह सीपेज (Seepage) है, यानी दीवार के अंदर किसी पाइप का रिसाव या बाहर से पानी का रिसना। दूसरी वजह कंडेनसेशन (Condensation) है, यानी कमरे की उमस और भाप का ठंडी दीवार पर जम जाना। 

ऐसे में फॉयल हटाने पर यदि उसके पीछे यानी दीवार वाली साइड पानी दिखता है, तो इसका मतलब है कि पानी दीवार के अंदर से आ रहा है। यदि पानी फॉयल के ऊपर यानी कमरे वाली साइड पर जमा है, तो समस्या कमरे की हवा और उमस की है। इसके अलावा, यदि दीवार पर सफेद पाउडर जैसा कुछ दिखे, तो इसे एफ्लोरेसेंस कहते हैं, जो संकेत है कि पानी ईंटों के बीच से आ रहा है।

टेस्ट करने की सही विधि (How to Perform the Test in 24 to 48 Hours)

इस टेस्ट के लिए आपको एल्युमिनियम फॉयल, एक मजबूत टेप और एक सूखा कपड़ा चाहिए। इसे करने के लिए सबसे पहले सीलन वाली जगह को सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछ लें। इसके बाद लगभग 12 इंच का फॉयल का टुकड़ा लें और उसे नमी वाली जगह पर रख के टेप की मदद से इसके चारों कोनों को अच्छी तरह चिपका दें ताकि बाहर की हवा अंदर न जा सके। इसे 24-48 घंटे के लिए ऐसे ही छोड़ दें। उसके बाद फॉयल हटाकर देखें कि नमी किस तरफ जमा हुई है।

अगर हवा में नमी है तो क्या करें (Steps to Take If the Issue Is Air Humidity and Airflow)

यदि टेस्ट से पता चले कि नमी कमरे की हवा के कारण है, तो इसका मतलब है कि घर का वेंटिलेशन (Airflow) सही नहीं है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, घर के अंदर नमी का स्तर 30% से 50% के बीच रहना चाहिए। खाना बनाते या नहाते समय एग्जॉस्ट फैन (Exhaust fan) जरूर चलाएं और काम खत्म होने के बाद भी इसे थोड़ी देर चलने दें। अगर बाहर का मौसम सूखा है, तो खिड़कियां खोलें ताकि ताजी हवा आ सके। ज्यादा उमस वाले कमरों में डीह्यूमिडिफायर (Dehumidifier) का इस्तेमाल करना भी एक बेहतर विकल्प है।

यदि दीवार अंदर से गीली है (What to Do If the Wall itself is Wet)

अगर फॉयल के पीछे दीवार वाली साइड पर पानी मिलता है, तो इसे हल्के में न लें। यह किसी पाइप के फटने, छत से पानी टपकने या दीवारों में आई दरारों की वजह से हो सकता है। ऐसी स्थिति में किसी प्रोफेशनल प्लम्बर को बुलाना ही बेहतर है। इसे जल्दी ठीक करना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि गीली दीवारों पर बहुत जल्दी फफूंद लग जाती है। यदि आप 24 से 48 घंटे के भीतर लीकेज को सुखा देते हैं, तो फफूंद लगने का खतरा काफी कम हो जाता है।

सेहत के लिए भी है खतरनाक (Damp Walls: A Serious Health Risk)

दीवार पर नमी सिर्फ दिखने में खराब नहीं लगती, बल्कि यह सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकती है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, नम और सीलन वाले घरों में रहने से सांस की तकलीफ, खांसी और अस्थमा जैसी बीमारियां बढ़ सकती हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह ज्यादा खतरनाक होता है।