
prabhakar prasad| image credit gemini and linkedin- Vipul Kumar
Success Stories: लॉस एंजिल्स के एक चमक-धमक वाले फार्मर्स मार्केट में वैसे तो हजारों स्टॉल्स लगते हैं, लेकिन यहां एक दुकान ऐसी है जहां सबसे ज्यादा भीड़ होती है। इस दुकान पर एक शख्स बनियान पहने और गले में बिहारी गमछा डाले बड़े टशन के साथ देसी चाय पिलाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि ये दुकानदार कोई विदेशी नहीं भारत से ही हैं जिनका नाम प्रभाकर प्रसाद है, जिन्हें आज पूरी दुनिया 'चाय-गाय' (Chaiguy) के नाम से जानती है। आज प्रभाकर भले ही सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं लेकिन बिहार के एक छोटे से कस्बे से निकलकर अमेरिका के मशहूर चाय वाले बनने का उनका यह सफर इतना आसान नहीं था। आज की इस स्टोरी में आइए जानते हैं बिहार से निकलकर लॉस एंजिल्स में चाय की दुकान लगाने तक के प्रभाकर प्रसाद के सफर के बारे में विस्तार से।
प्रभाकर की कहानी बिहार के बाढ़ (Baadh) कस्बे से शुरू होती है। बचपन में एक हादसे की वजह से उनके पिता को बिजनेस छोड़ना पड़ा और पूरा परिवार मध्य प्रदेश शिफ्ट हो गया। वहां एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में प्रभाकर का खूब मजाक उड़ाया गया क्योंकि उनकी अंग्रेजी कमजोर थी और बोलने का लहजा बिहारी था। उस वक्त वो महीनों तक चुप रहे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कड़ी मेहनत की, अच्छी अंग्रेजी सीखी और इंदौर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।
इंजीनियरिंग के बाद पुणे की एक बड़ी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी मिल गई। लेकिन प्रभाकर का मन कोडिंग में नहीं लगता था। इसलिए उन्होंने एक दिन अचानक ऑफिस जाना बंद कर दिया और मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा। वो एक बड़े ब्यूटी पेजेंट के विनर भी बने और फिल्मों के ऑफर भी मिलने लगे। लेकिन वहां के गलत माहौल और समझौतों को देखकर उन्होंने ग्लैमर की दुनिया को भी अलविदा कह दिया।
प्रभाकर अपनी पुरानी दोस्त के लिए लोन लेकर अमेरिका चले गए, लेकिन किस्मत देखिए वहां पहुंचते ही उनका ब्रेकअप हो गया। वो अकेले पड़ गए और एक कॉर्पोरेट नौकरी करने लगे जो उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं थी। इसी दौरान एक बीमारी ने उन्हें मौत के करीब पहुंचा दिया। अस्पताल के उस अकेलेपन ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया कि वो आखिर अपनी जिंदगी के साथ कर क्या रहे हैं? वो डिप्रेशन में चले गए, फिर अध्यात्म की ओर मुड़े और ऑटोबायोग्राफी ऑफ अ योगी जैसी किताबों से उन्हें नई दिशा मिली।
एक दिन उन्होंने सोचा कि वो ऐसा क्या काम है जिसे वो पूरी खुशी से कर सकते हैं? जवाब मिला चाय। उन्होंने हार नहीं मानी और चाय पर गहरी रिसर्च की। उन्होंने आयुर्वेदिक डॉक्टरों से सलाह ली और अमेरिकी लोगों के स्वाद को समझा। कागजी कार्रवाई से लेकर परमिशन लेने तक, यह सफर IIT के एग्जाम से भी मुश्किल था। लेकिन उनके दोस्त ने उनका साथ दिया और आखिरकार प्रभाकर ने अपना चाय का स्टॉल लगा ही लिया।
आज प्रभाकर सिर्फ एक दिन में करीब 500 डॉलर कमा लेते हैं। वो क्वालिटी पर इतना ध्यान देते हैं कि आम 4 डॉलर वाले दूध की जगह 20 डॉलर वाला प्रीमियम दूध इस्तेमाल करते हैं। उनका कहना है कि "अगर आप किसी काम में अपनी पूरी जान लगा देते हैं, तो कामयाबी मिलकर ही रहती है।" प्रभाकर की कहानी हमें सिखाती है कि फेलियर असल में अंत नहीं, बल्कि एक नया और बेहतर रास्ता ढूंढने का मौका है।
Updated on:
21 Mar 2026 12:48 pm
Published on:
21 Mar 2026 12:43 pm
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