
गायत्री प्रजापति की बेटी की शादी में पहुंचे अखिलेश यादव, एक महीने की पैरोल पर बाहर पूर्व मंत्री,दो दिन बाद फिर लौटेंगे जेल (फोटो सोर्स : Akhilesh Yadav Whatsapp News Group )
Gayatri Prajapati Parole: उत्तर प्रदेश के पूर्व खनन मंत्री और गैंगरेप मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति एक महीने की पैरोल पर बाहर हैं। इसी बीच उनकी छोटी बेटी अंकिता प्रजापति का विवाह 29 नवंबर को धूमधाम से संपन्न हुआ। विवाह समारोह में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी शिरकत की, जिसकी तस्वीरें उन्होंने स्वयं सोशल मीडिया पर साझा कीं। गायत्री प्रजापति वर्तमान में लखनऊ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। उन्हें 3 नवंबर 2024 से एक माह की पैरोल मिला है, जो दो दिन बाद समाप्त होने वाली है। इसके बाद उन्हें वापस जेल लौटना होगा। शासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि वह तय समय पर वापस नहीं आते, तो भविष्य में उन्हें किसी भी प्रकार की पैरोल नहीं मिलेगी।
अंकिता प्रजापति की शादी लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी स्थित द सेंट्रम होटल में संपन्न हुई। दूल्हे अभिषेक मिश्र प्रतापगढ़ में तिलक इंटर कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल ओम शंकर मिश्र के पुत्र हैं। अभिषेक की मां लालमती मिश्र महिला एवं बाल विकास विभाग में परियोजना अधिकारी हैं। दुल्हन अंकिता की मां महाराजी प्रजापति वर्तमान में अमेठी से विधायक हैं। गायत्री प्रजापति के परिवार में कुल पाँच बच्चे हैं,दो बेटे और तीन बेटियां। बेटियों संजू और सुधा की शादी पहले ही हो चुकी है। बड़े बेटे अनिल प्रजापति विवाहित हैं, जबकि छोटा बेटा अनुराग अविवाहित है।
गायत्री प्रसाद प्रजापति का राजनीतिक सफर जितना चर्चित रहा, उतना ही विवादों से घिरा रहा। सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहते हुए वह लगातार सुर्खियों में बने रहे। खनन विभाग का प्रभार मिलने के बाद उनके विरुद्ध अवैध खनन, बेनामी संपत्तियों और भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे। आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर ने उन पर अवैध खनन से हजारों करोड़ की संपत्ति बनाने का आरोप लगाया। कई अन्य मामलों में भी जांच हुई, हालांकि कई आरोप सबूतों के अभाव में बंद कर दिए गए।
सबसे बड़ा झटका उन्हें वर्ष 2017 में लगा, जब चुनाव प्रचार के दौरान ही उन पर चित्रकूट की एक नाबालिग लड़की ने गैंगरेप का आरोप लगाया। FIR दर्ज होने के बाद वह लंबे समय तक फरार भी रहे थे। यूथ वोटिंग के बीच 11 मार्च 2017 को उनका चुनाव हारना और बाद में गिरफ्तारी राजनीति में उनके पतन की शुरुआत साबित हुई। 12 नवंबर 2021 को एमपी-एमएलए कोर्ट ने गायत्री प्रजापति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अमेठी से चार किमी दूर स्थित परसाना गांव में जन्मे गायत्री के पिता सुकई राम कुम्हार थे। गायत्री ने कुम्हार का काम छोड़कर पुताई का काम शुरू किया। 1984 में राजीव गांधी द्वारा HAL का कारखाना लाने से निर्माण कार्य बढ़ा और गायत्री को पुताई का बड़ा ठेका मिला। यहीं से उनकी आर्थिक स्थिति बदली और राजनीति में रुचि बढ़ी। धीरे-धीरे वह समाजवादी पार्टी के निकट आए और 2012 में अमेठी से विधायक बने। अखिलेश यादव की कैबिनेट में पहले सिंचाई विभाग में राज्य मंत्री और बाद में खनन विभाग के स्वतंत्र प्रभार मंत्री बने। खनन विभाग संभालते ही उनकी हैसियत, पहुंच और धनबल तेजी से बढ़ा,इसी दौरान वह "स्कैम किंग" कहे जाने लगे।
अखिलेश यादव की उपस्थिति अब राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी है। विपक्ष लगातार सवाल खड़ा कर रहा है कि गैंगरेप केस में उम्रकैद पा चुके नेता के समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री की मौजूदगी क्या संदेश देती है। हालांकि, सपा में कई नेता इसे "सांस्कृतिक और पारिवारिक उपस्थिति" बताते हैं। गायत्री की पत्नी वर्तमान विधायक हैं और पार्टी से जुड़े कई नेता उनके संपर्क में रहे हैं।
शासन द्वारा जारी पैरोल आदेश में स्पष्ट लिखा गया है कि पैरोल अवधि पूरी होने पर उसी दिन जेल में वापसी अनिवार्य है। देरी या अनुपालन न होने पर भविष्य में पैरोल स्थायी रूप से रोकी जा सकती है। जेल, IG कारागार और शासन को वापसी की जानकारी तुरंत भेजनी होगी। गायत्री पर पहले से ही CBI और ED की कई जांचें लंबित हैं, इसलिए पैरोल पर उनकी गतिविधियों पर पूरी निगरानी रखी जा रही है।
Published on:
30 Nov 2025 12:01 pm
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