सपा शासन में जल निगम में सहायक अभियंता, अवर अभियंता और लिपिकों के करीब 1342 पदों पर भर्ती हुई थी। ऐसे अभ्यर्थी जिनके नंबर कम थे उनका चयन किया गया। और अधिक नम्बर वालों को छोड़ दिया गया। इस पर अधिक नम्बर वाले अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया था। वर्ष 2016 में यह मामला सामने आया। हाईकोर्ट के आदेश पर, यूपी सरकार ने अभ्यर्थियों की शिकायत के आधार पर, जांच एसआईटी को सौंप दी थी। जांच में दोषी मिलने पर शासन ने आजम व अन्य अफसरों पर मुकदमा कायम कर विवेचना के आदेश दिए थे। विवेचना के बाद एसआईटी ने सभी आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर की है।