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गोरखपुर में जहां जन्मे थे योग के विश्वदूत, वहीं बन रहा दिव्य आध्यात्मिक धाम, जानें खास बातें

उत्तर प्रदेश सरकार गोरखपुर में विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु परमहंस योगानंद महाराज की जन्मस्थली पर एक भव्य स्मारक का निर्माण करा रही है। इस स्मारक का निर्माण कार्य साल 2026 के अंत तक पूरा हो जाएगा।
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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jun 23, 2026

27.68 करोड़ की परियोजना से सजेगी आध्यात्मिक धरोहर, संग्रहालय, ध्यान कक्ष और ऑडियो-विजुअल सेंटर होंगे आकर्षण का केंद्र (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

आध्यात्मिक गुरु परमहंस योगानंद महाराज की जन्मस्थली (फोटो- पत्रिका)

Grand Memorial at Paramahansa Yoganand Birthplace: भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार एक महत्वपूर्ण पहल कर रही है। गोरखपुर में विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु परमहंस योगानंद महाराज की जन्मस्थली पर एक भव्य स्मारक का निर्माण तेजी से चल रहा है। लगभग 27.68 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह स्मारक न केवल योगानंद की आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करेगा, बल्कि आने वाले समय में देश और दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में भी स्थापित होगा।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि परियोजना का लगभग 50 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसे दिसंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह स्मारक रांची स्थित योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया आश्रम की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है और इसे आधुनिक सुविधाओं तथा आध्यात्मिक वातावरण के सुंदर समन्वय के रूप में तैयार किया जा रहा है।

आध्यात्मिक धरोहर को नई पहचान

गोरखपुर की यह पवित्र भूमि दुनिया भर में इसलिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यहां 5 जनवरी, 1893 को मुकुंद लाल घोष के रूप में उस बालक का जन्म हुआ, जिसने आगे चलकर परमहंस योगानंद के रूप में विश्व को भारतीय योग और ध्यान की अनमोल विरासत से परिचित कराया।

प्रदेश सरकार का मानना है कि योगानंद केवल एक संत या आध्यात्मिक गुरु नहीं थे, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना के ऐसे दूत थे, जिन्होंने पूर्व और पश्चिम के बीच आध्यात्मिक सेतु का निर्माण किया। यही कारण है कि उनकी जन्मस्थली को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है।

रांची आश्रम की तर्ज पर बनेगा स्मारक

निर्माणाधीन स्मारक की विशेषता यह है कि इसे रांची स्थित योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया आश्रम की स्थापत्य शैली से प्रेरित होकर तैयार किया जा रहा है। भवन की डिजाइन में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक सुविधाओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

परिसर में लगी मौजूदा टेराकोटा जालियों को पत्थर की जालियों से बदला जा रहा है, जिससे पूरे परिसर की वास्तुशैली में एकरूपता बनी रहे। स्मारक को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति, सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का एक साथ अनुभव हो सके।

तीन मंजिलों में विकसित होगा भव्य परिसर

स्मारक को तीन मंजिलों में विकसित किया जा रहा है। भूतल पर पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके साथ ही भवन के सामने और किनारे के हिस्सों में सुंदर उद्यान विकसित किए जा रहे हैं, जहां लोग शांति और ध्यान का अनुभव कर सकेंगे।

पहली मंजिल पर एक विशाल ध्यान कक्ष और आधुनिक संग्रहालय बनाया जा रहा है। यहां आने वाले लोग परमहंस योगानंद के जीवन, उनके विचारों, शिक्षाओं और आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों से परिचित हो सकेंगे। संग्रहालय में उनके जीवन से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज, तस्वीरें और डिजिटल प्रस्तुतीकरण भी शामिल किए जाने की योजना है।

मूल जन्मस्थली की पवित्रता रहेगी बरकरार

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि स्मारक निर्माण के दौरान योगानंद की जन्मस्थली के मूल स्वरूप को संरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए परिसर में एक विशेष जन्मस्थली खंड विकसित किया जा रहा है।

इस खंड में पैतृक आवास की मूल ईंटों के कुछ हिस्सों का उपयोग किया जा रहा है, ताकि इस स्थान की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान अक्षुण्ण बनी रहे। सरकार का मानना है कि श्रद्धालु जब इस स्थल पर आएंगे तो वे योगानंद की आध्यात्मिक ऊर्जा और ऐतिहासिक विरासत को निकटता से महसूस कर सकेंगे।

श्रद्धालुओं के लिए भोजन और आवास की व्यवस्था

दूसरी मंजिल पर भोजनशाला और आधुनिक रसोई घर बनाया जा रहा है, जहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रसाद वितरण और भोजन की व्यवस्था की जाएगी। तीसरी मंजिल पर दो बीएचके आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा यहां एक अत्याधुनिक ऑडियो-विजुअल सेंटर भी बनाया जाएगा, जहां आध्यात्मिक कार्यक्रम, व्याख्यान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विशेष आयोजन आयोजित किए जा सकेंगे। यह ऑडियो-विजुअल सेंटर नई पीढ़ी को परमहंस योगानंद के जीवन और उनके संदेश से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

गोरखपुर के आध्यात्मिक पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महान आध्यात्मिक विभूतियों की विरासत को संरक्षित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में गोरखपुर में लगभग 30.42 लाख पर्यटक पहुंचे थे। ऐसे में योगानंद जन्मस्थली स्मारक के निर्माण से शहर के आध्यात्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह स्मारक न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि स्थानीय रोजगार, पर्यटन उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा।

भारत के आध्यात्मिक दूत थे परमहंस योगानंद

परमहंस योगानंद को आधुनिक युग में भारतीय योग और ध्यान परंपरा के सबसे प्रभावशाली प्रचारकों में गिना जाता है। वे लाहिड़ी महाशय की गौरवशाली गुरु परंपरा के शिष्य थे और उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन क्रिया योग के प्रचार-प्रसार को समर्पित कर दिया।

वर्ष 1920 में वे अमेरिका गए और वहां सेल्फ-रियलाइजेशन फेलोशिप की स्थापना की। उन्होंने लाखों लोगों को भारतीय योग, ध्यान और आध्यात्मिक दर्शन से परिचित कराया। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक "ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी" आज भी दुनिया की सबसे प्रभावशाली आध्यात्मिक पुस्तकों में गिनी जाती है। योगानंद ने पूर्व और पश्चिम की आध्यात्मिक परंपराओं के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण किया और दुनिया को यह संदेश दिया कि आध्यात्मिकता मानवता को जोड़ने की सबसे बड़ी शक्ति है।

आध्यात्मिक विरासत का बनेगा नया केंद्र

पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप इस परियोजना को एक प्रमुख आध्यात्मिक विरासत स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्मारक परमहंस योगानंद को सच्ची श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ गोरखपुर को वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाने का काम करेगा। दिसंबर 2026 तक इसके पूर्ण होने के बाद यह स्मारक केवल एक भवन नहीं होगा, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक चेतना, योग परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत केंद्र बनकर उभरेगा, जहां आने वाला हर व्यक्ति शांति, प्रेरणा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर सकेगा।

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