
बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले ने बढ़ाई मुसीबत, आज अपनी ही सरकार के खिलाफ भरेेंगी हुंकार
लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी की सांसद सावित्री बाई फुले अपनी ही सरकार के खिलाफ बड़ी मुसीबत बनती जा रही हैं। फुले आज राजधानी लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन में आरक्षण के समर्थन में हुंकार भरेंगी। फुले की यह रैली नमो बुद्धाय जन सेवा समिति करवा रही है। इस रैली में सावित्री बाई फुले के तेवर और जुटी भीड़ से उनका आगे का सियासी रास्ता भी साफ होगा।
केंद्र सरकार पर बोलेंगी हमला
भले ही सावित्री बाई फुले इस रैली को बीजेपी सरकार और संगठन के खिलाफ मानने से इनकार कर चुकी हों और यह सफाई दे रही हों कि उनका मुद्दा सिर्फ आरक्षण है। लेकिन समिति की तरफ से शनिवार को आयोजन को लेकर जो जानकारी दी गई है उससे बीजेपी और केंद्र सरकार को लेकर सावित्री बाई फुले के बागी तेवर का ही पता चलता है। समिति के अध्यक्ष और रैली के संयोजक अक्षयवर नाथ कनौजिया ने रैली के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि देश में दलित पिछड़े, अल्पसंख्यक और महिलाओं पर लगातार अत्याचार बढ़ रहा है। सरकार की नीति दलितों और पिछड़ों को बांटने वाली है। इसी के विरोध में संविधान और आरक्षण बचाओ हुंकार महारैली का आयोजन किया जा रहा है। इस रैली को भारतीय जनता पार्टी की सांसद सावित्री बाई फुले संबोधित करेंगी। तो कुल मिलाकर इससे साफ है कि सावित्री बाई फुले रैली में बीजेपी और केंद्र सरकार पर भी हमला बोलेंगी।
फुले का शक्ति प्रदर्शन
जानकार इस रैली को सावित्री बाई फुले के शक्ति प्रदर्शन का भी हिस्सा मान रहे हैं। चर्चा तो इस बात की भी है कि वह केंद्र सरकार और संगठन में कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारी चाहती हैं। लेकिन जब काफी इंतजार के बाद भी पार्टी ने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया तो उन्होंने आरक्षण को मुद्दा बनाकर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया। सावित्री बाई फुले को भी अब इस बात का पूरी तरह से एहसास हो चुका है कि उनके तेवरों के चलते बीजेपी अब शायद ही उन्हें कुछ दे। इसी को समझते हुए सावित्री बाई फुले आरक्षण को हथियार बनाकर अपनी ताकत दिखाना चाहती हैं। फुले बीजेपी पर दबाव बनाना चाहती हैं जिससे पार्टी उनपर में कोई कठोर फैसला लेने से पहले सोचे और अगर बीजेपी उन पर कोई कार्रवाई करे भी तो वह उसे दलितों-पिछड़ों के हक की लड़ाई से जोड़कर उसका सियासी फायदा उठा सके।
खतरे में संविधान
सावित्री बाई फुले यूपी के बहराइच से सांसद हैं और वह अपनी ही सरकार के खिलाफ हो गई हैं। आपको बता दें कि फुले ने अपनी ही सरकार और पार्टी के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा था कि केंद्र सरकार आरक्षण खत्म करना चाह रही है। फुले ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से भारतीय संविधान, एससी-एसटी, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक बड़े खतरे में हैं।
Published on:
01 Apr 2018 09:07 am
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