
बृजभूषण शरण सिंह ने अखिलेश यादव की तारीफ की। फोटो सोर्स- पत्रिका न्यूज
Brijbhushan Singh Praises Akhilesh Yadav:उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘बाहुबली’ छवि वाले नेता बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के बीच रिश्ते हमेशा सुर्खियों में रहे हैं। अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के बावजूद दोनों के बीच दिखने वाली सहजता और सम्मान ने सियासी गलियारों में एक अलग ही चर्चा को जन्म दिया है। हाल के बयानों में बृजभूषण द्वारा अखिलेश की तारीफ ने इस ‘केमिस्ट्री’ को फिर से केंद्र में ला दिया है।
भले ही बृजभूषण शरण सिंह आज भाजपा के साथ जुड़े हैं, लेकिन अखिलेश यादव के प्रति उनका सकारात्मक रुख किसी से छिपा नहीं है। हाल में की गई उनकी खुली तारीफ को राजनीतिक जानकार 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक संकेत के रूप में भी देख रहे हैं। यह रिश्ता सिर्फ सियासी नहीं, बल्कि निजी स्तर पर भी गहरा माना जाता है।
दोनों नेताओं के बीच संबंधों की एक बड़ी कड़ी कुश्ती का खेल भी रहा है। बृजभूषण लंबे समय तक कुश्ती संघ के अध्यक्ष रहे तो वहीं अखिलेश यादव भी इस खेल में रुचि रखते हैं। अखाड़े की परंपरा जहां मुकाबले के साथ सम्मान भी जरूरी होता है…दोनों नेताओं के रिश्ते में भी झलकती है।
जब बृजभूषण शरण सिंह पर गंभीर आरोप लगे और देशभर में राजनीतिक हलचल मची, तब उन्होंने एक अहम बात कही। उनके मुताबिक, जहां अन्य दलों ने इस मुद्दे को लेकर उन पर हमला बोला, वहीं अखिलेश यादव ने इसे राजनीतिक हथियार नहीं बनाया। बृजभूषण इसे एक सम्मानजनक और परिपक्व राजनीतिक व्यवहार के रूप में देखते हैं।
हाल ही में एक घटना के दौरान जब विधायक अनुपमा जायसवाल पुतला दहन के दौरान घायल हो गईं, तो अखिलेश यादव उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे। इस कदम की बृजभूषण शरण सिंह ने सराहना की और कहा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत और संवेदनाएं हमेशा ऊपर होनी चाहिए।
यह भी एक महत्वपूर्ण पहलू है कि बृजभूषण का समाजवादी पार्टी से पुराना जुड़ाव रहा है। साल 2009 में मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) ने उन्हें सपा से चुनाव लड़ने का मौका दिया था, जिसमें वे सफल भी रहे। मुलायम सिंह के प्रति सम्मान समय के साथ अखिलेश यादव के प्रति स्नेह में बदल गया।
राजनीति में हर बयान के मायने निकाले जाते हैं। भाजपा में रहते हुए भी बृजभूषण शरण सिंह का अखिलेश यादव की तारीफ करना कई तरह के संकेत दे रहा है। यह आने वाले चुनावों से पहले नए समीकरणों या सॉफ्ट कॉर्नर की ओर इशारा भी हो सकता है। यह पूरा घटनाक्रम इस बात को दर्शाता है कि राजनीति में भले ही कड़ी प्रतिस्पर्धा हो, लेकिन व्यक्तिगत रिश्ते और पुरानी पहचान अपनी जगह बनाए रखते हैं। बृजभूषण और अखिलेश का रिश्ता इसी का एक उदाहरण है, जो सियासी सीमाओं से परे जाकर भी कायम है।
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Published on:
30 Apr 2026 12:53 pm
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