
Mayawati (Photo: IANS)
Dalit Vote Bank UP: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव (मिशन 2027) की आहट के बीच बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने विरोधियों पर तीखा हमला बोला है। शनिवार को जारी बयान में बसपा प्रमुख ने विरोधी दलों पर दलित संगठनों और गुलाम मानसिकता वाले लोगों का इस्तेमाल कर बहुजन समाज को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह के नापाक इरादों और जातिवादी साजिशों से सतर्क रहें।
मायावती ने विरोधी पार्टियों पर तंज कसते हुए कहा कि बसपा दूसरी पार्टियों की तरह राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ साधने के लिए धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, हल्लाबोल, और सरकारी व प्राइवेट संपत्तियों में तोड़फोड़ करने जैसी हिंसक गतिविधियों में विश्वास नहीं करती। उन्होंने कहा कि बसपा देश की एकमात्र ऐसी अम्बेडकरवादी पार्टी है जो सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय के सिद्धांत पर चलती है। उत्तर प्रदेश में बसपा के नेतृत्व में चार बार रही सरकार इस बात का प्रमाण है, जहां अपराध-नियंत्रण और कानून-व्यवस्था के मामले में कानून द्वारा कानून का राज स्थापित किया गया था।
मायावती ने कहा कि पार्टी की असली चिंता यह है कि विरोधियों के उकसावे में आकर गरीब, मजदूर और बेरोजगार नौजवान सड़कों पर उतरकर सरकारी उत्पीड़न और मुकदमों का शिकार न बनें। उन्होंने कहा कि अगर नौजवान सरकारी ज्यादती के कारण मुकदमों और जेल के चक्कर में उलझ जाएंगे, तो उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। यदि परिवार का मुखिया इस जाल में फंसता है, तो पूरा घर तबाह हो जाएगा। विरोधी यही चाहते हैं ताकि बसपा का अम्बेडकरवादी मिशन प्रभावित हो।
मायावती ने साफ किया कि बसपा मगरमच्छ के आंसू बहाने या गिरगिट की तरह रंग बदलने की राजनीति नहीं करती। पार्टी महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायणा गुरु, छत्रपति शाहूजी महाराज, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर और मान्यवर श्री कांशीराम जी के दिखाए रास्तों पर चल रही है। पार्टी का मुख्य लक्ष्य 'सत्ता की मास्टर चाबी' हासिल कर शोषितों का सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक उत्थान करना है।
मायावती ने पार्टी के संघर्षों को याद दिलाते हुए कहा कि दलित विरोधी सहारनपुर कांड के समय बसपा नेतृत्व ने सड़क से लेकर संसद तक लड़ाई लड़ी थी। जब संसद में दलितों की आवाज को दबाया गया, तो बाबा साहेब द्वारा कानून मंत्री पद से इस्तीफा देने की राह पर चलते हुए बसपा नेतृत्व ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। यह उदाहरण दर्शाता है कि बसपा केवल खोखली बयानबाजी नहीं, बल्कि वास्तविक त्याग और संघर्ष में विश्वास रखती है।
मायावती ने स्पष्ट किया कि कांशीराम बसपा का गठन सदियों से सताए गए लोगों को आपसी भाईचारे के जरिए एकजुट कर 'हुकमरान जमात' (शासक वर्ग) बनाने के लिए किया था, ताकि सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से आत्म-सम्मान के मूवमेंट को मंजिल तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बसपा के बढ़ते प्रभाव को देखकर विरोधी दल बौखला गए हैं। इस राह में रोड़ा अटकाना सीधे तौर पर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर विरोधी कृत्य है, जिससे सर्वसमाज को सावधान रहने की जरूरत है।
Updated on:
11 Jul 2026 04:15 pm
Published on:
11 Jul 2026 03:45 pm
