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इन लोगों का साथ अपके जीवन को बना सकता है दुखदायी, जानिए क्या कहती है चाणक्य नीति

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में किन लोगों के साथ जीवन बिताना चाहिए इस पर उल्लेख किया।

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लखनऊ

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Snigdha Singh

Apr 30, 2022

Chanakya niti on Sad Life about Wife and Student

Chanakya niti on Sad Life about Wife and Student

आचार्य चाणक्य की अर्थनीति, कूटनीति और राजनीति विश्व विख्यात है, जो हर एक को प्रेरणा देने वाली है। चाणक्य नीति कहती है कि मनुष्य को हर परिस्थिति के लिए स्वयं को तैयार रखना चाहिए। भले ही आपको आचार्य चाणक्य की नीतियां और विचार थोड़े कठोर लगे लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। भागदौड़ भरी जिंदगी में आप इन विचारों को नजरअंदाज ही क्यों न कर दें लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आचार्य चाणक्य ने अपनी एक नीति में ऐसे लोगों के बारे में बताया जो सुखी रहते हैं लेकिन इन लोगों के बीच रहने से उनको हमेशा दुखी रहना पड़ता है।

मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च।

दुःखितैः सम्प्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति॥
आचार्य चाणक्य ने इस श्लोक के माध्यम से बताया है कि मूर्ख शिष्य को पढ़ाने पर, दुष्ट स्त्री के साथ जीवन बिताने पर और दुखियों- रोगियों के बीच में रहने पर विद्वान व्यक्ति भी दुःखी हो ही जाता है। यदि ये जीवन में है तो कभी भी पीड़ा और दुःख मिल सकता है।

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गुरु शिष्य का ऐसा होता है संबन्ध

दरअसल, आचार्य चाणक्य के मुताबिक गुरु और शिष्य का रिश्ता बेहद ही अच्छा माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि गुरु ही वह चाबी होता -जो एक शिष्य को उसकी मंजिल का ताला खोलने में मदद करती है। गुरु अपने छात्रों को हर मुश्किल को आसानी से पार करने और जीवन मे सफलता पाने के लिए तैयार करता है। लेकिन, अगर किसी तेज यानी विद्वान व्यक्ति के जीवन में कोई ऐसा शिष्य आ जाए जिसे कुछ भी न आता हो न ही उसका ध्यान गुरु द्वारा बताए गए रास्ते पर चलता हो तो ऐसे मूर्ख शिष्य से विद्वान व्यक्ति कभी न कभी दुखी जरूर होता है।

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दुष्ट पत्नी काल से कम नही

कहते हैं जैसे काल कभी भी आ जाता है वैसे ही दुष्ट पत्नी के साथ दुःख और मौत कभी भी आ सकता है। चाणक्य कहते हैं कि अगर कोई विद्वान व्यक्ति की जीवनसंगिनी अच्छी और समझदार हो तो उसका असर उसके पूरे जीवन पर पड़ता है जिससे वह हर मुश्किल का आसानी से सामना कर सुखी जीवन जीता है। लेकिन ठीक इसके उल्टे अगर किसी विद्वान व्यक्ति के जीवन में अच्छी जीवनसंगिनी का साथ न मिले तो उसका पूरा जीवन ही दुखों से भर जाता है।

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