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एसपीजी और एनएसजी कमांडो की तर्ज पर तैयार किए गए ‘साइबर कमांडो’, संभालेंगे डिजिटल जिम्मेदारी

Digital Commando Team : यूपी सरकार ने साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए साइबर कमांडो की एक विशेष टीम तैयार की है। इस टीम में कुल 15 पुलिसकर्मी शामिल हैं।
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लखनऊ

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Avaneesh Kumar Mishra

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Updated: 3 Jan 2026, 9:23 PM IST

य़ूपी में तैयार हुई साइबर कमांडो की एक विशेष टीम, PC- IANS

लखनऊ : सरकार ने साइबर अपराधियों की कमर तोड़ने और साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए साइबर कमांडो की एक विशेष टीम तैयार की है। इन कमांडो को एसपीजी और एनएसजी कमांडो की तर्ज पर देश के विभिन्न उच्च संस्थानों के एक्सपर्ट द्वारा साइबर अपराध और ठगी को रोकने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। जिस तरह एनएसजी और एसपीजी कमांडो अपने कार्य क्षेत्र में दक्ष होते हैं, यह टीम भी उसी तरह अपने कार्य क्षेत्र में दक्ष (साइबर अपराध को रोकने) है।

साथ ही साइबर कमांडो को हाईटेक तकनीक और टूल्स से लैस किया गया है ताकि साइबर ठगों के नेटवर्क को पूरी तरह से नेस्तनाबूद किया जा सके। साइबर/सीआईडी डीजी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। ऐसे में मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अत्याधुनिक तकनीक से लैस करते हुए ‘साइबर कमांडो’ की विशेष टीम तैयार की गई है। इस टीम में कुल 15 पुलिसकर्मी शामिल हैं।

डिजिटल दुनिया का जिम्मा संभालेंगे कमांडो

ये साइबर कमांडो न केवल साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों पर लगाम लगाएंगे, बल्कि आम नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाएंगे। इन साइबर कमांडो की संरचना और प्रशिक्षण एसपीजी और एनएसजी कमांडो की तर्ज पर दिया गया है। जिस तरह देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के लिए विशेष बल कार्य करते हैं, उसी प्रकार साइबर कमांडो डिजिटल दुनिया में अपराधियों के खिलाफ मोर्चा संभालेंगे।

उन्होंने बताया कि इन 15 साइबर कमांडो को तैयार करने में देश के प्रतिष्ठित तकनीकी और सुरक्षा संस्थानों की विशेषज्ञता ली गई है। इन्हें आईआईटी कानपुर, नया रायपुर, मद्रास और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू), गुजरात के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू), गुजरात और नई दिल्ली से साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल ट्रेसिंग और ऑनलाइन अपराध की जांच से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग ली गई।

15 पुलिसकर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण

साइबर/सीआईडी डीजी ने बताया कि पहले चरण में 15 चयनित पुलिस कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। ये सभी तकनीकी दक्षता, विश्लेषण क्षमता और फील्ड अनुभव के आधार पर चुने गए हैं। यह कमांडो आने वाले समय में अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित करेंगे, जिससे प्रदेश भर में साइबर अपराध से निपटने की क्षमता कई गुना बढ़ेगी।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद साइबर कमांडो को पुलिस जोन और मुख्यालय स्तर पर तैनात किया गया है। इसका उद्देश्य साइबर अपराध की सूचना मिलते ही त्वरित और तकनीकी रूप से सक्षम कार्रवाई करना है। ये कमांडो साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड, ऑनलाइन साइबर हमले, सोशल मीडिया अपराध, डाटा चोरी, फिशिंग और डिजिटल ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों में विशेष भूमिका निभाएंगे।

हर तरह से अपराधी को ट्रैक कर सकेंगे

साथ ही साइबर कमांडो जिला और थाने स्तर के पुलिसकर्मियों को भी तकनीकी प्रशिक्षण दे रहे हैं, ताकि जमीनी स्तर पर भी साइबर अपराधों की पहचान और जांच बेहतर ढंग से हो सके। सरकार ने साइबर कमांडो को हाईटेक उपकरण भी उपलब्ध कराए हैं, जिनमें एडवांस्ड सॉफ्टवेयर, डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स, डाटा एनालिटिक्स सिस्टम और रियल-टाइम मॉनिटरिंग तकनीक शामिल हैं। इन उपकरणों की मदद से साइबर अपराधियों के डिजिटल फुटप्रिंट को ट्रैक करना, लेन-देन का विश्लेषण करना और अपराध के नेटवर्क तक पहुंचना आसान होगा।

सरकार का मानना है कि कानून-व्यवस्था केवल पारंपरिक अपराधों तक सीमित नहीं रह गई है। आज अपराधी डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर आम जनता को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना समय की आवश्यकता है। इसी को देखते हुए साइबर कमांडो नियुक्त किए गए हैं।

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