
Do These 10 Things on First Day of Pitra Paksh
लखनऊ. Do These 10 Things on First Day of Pitra Paksh. पितृपक्ष (Pitra Paksh) के 16 दिनों को हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता होती है कि इन दिनों पूर्वज धरती पर आते हैं। इन दिनों में उनके नाम से दान आदि करना और गरीब व ब्राह्मणों को भोजन कराना शुभ माना गया है। मान्यता है कि संगम तीरे पिंडदान करने से मृत आत्माओं को पूर्ण शांति मिलती है। पूर्वज अपने वंशजों को उनका मनोवांक्षित फल देते हैं। हिन्दू धर्म में देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण का महत्व है। पितृ पक्ष में माता-पिता के प्रति तर्पण करके श्रद्धा व्यक्त की जाती है। मान्यता है कि बिना पितृ ऋण से मुक्त हुए जीवन को निरर्थक माना जाता है। इस बार पितृ पर 21 को प्रतिपदा, 22 को द्वितीया, 23 को तृतीया, 24 को चतुर्थी, 25 को पंचमी, 26 को षष्ठी, 27 को सप्तमी, 28 को कोई श्राद्ध नहीं होगा। 29 को अष्टमी, 30 को मातृ नवमी, एक अक्तूबर को दशमी, दो को एकादशी, तीन को द्वादशी, चार को त्रयोदशी, पांच को चतुर्दशी और छह अक्तूबर को अमावस्या श्राद्ध के साथ पितृ विसर्जन होगा।
मान्यता के अनुसार जो लोग पितृपक्ष में दान और श्राद्ध नहीं करते उनके पूरवज भूखे प्यासे ही धरती से लौट जाते हैं। इससे परिवार को पितृदोष लगता है। इसलिए पितृपक्ष में गरीबों व ब्राह्मणों को भोजन कराने को विशेष महत्व दिया गया है। लेकिन श्राद्ध और तर्पण में श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। खासकर भोजन कराने से जुड़े नियमों का विशेष तौर पर ध्यान रखना चाहिए।
1. श्राद्ध के बाद सोने, चांदी, कांस और तांबे के बर्तन पर ही ब्राह्मण को भोज कराना अच्छा माना जाता है। श्राद्ध और तर्पण में लोहे और स्टील के बर्तन का इस्तेमाल नहीं करें।
2. ऐसी मान्यता है कि चांदी के बर्तन में भोजन कराने से पुण्य प्राप्त होता है। पितृ भी तृप्त होते हैं।
3. श्राद्ध पर भोजन के लिए ब्राह्मणों को दक्षिण दिशा में बैठाएं। ऐसी मान्यता है कि दक्षिण में पितरों का वास होता है।
4. सबसे खास बात कि श्राद्ध के बाद जब भी ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराएं तो इस बात का ध्यान रखें उसे केले के पत्ते पर नहीं परोसें। मान्यता है कि इससे पितरों को तृप्ति नहीं मिलती है।
5. ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद उन्हें कपड़े, अनाज, दक्षिणा आदि देकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।
6. इसका भी ध्यान रखें कि गाय, चींटी, कौए और देवता को भोजन कराने के बाद ही ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए।
7. भोज और दान-दक्षिणा देने के बाद ब्राह्मणों को उन्हें छोड़ने द्वार तक जाएं। मान्यता है कि ब्राह्मणों के साथ पितरों की भी विदाई होती है।
8. ब्राह्मणों के भोजन के बाद ही स्वयं और अपने रिश्तेदारों को भोजन कराएं।
9. डॉग और कौए का भोजन, डॉग और कौए को ही खिलाया जाए। देवताओं और चींटी के नाम पर निकाले भोजन को गाय को खिलाया जा सकता है।
10. बहन, दामाद और भांजे को भी भोजन कराएं। उनके भोजन से मान्यता है कि पितृ प्रसन्न होते हैं।
Updated on:
20 Sep 2021, 8:58 AM IST
Published on:
20 Sep 2021, 2:03 AM IST
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