
गोमती नगर के विशाल खंड स्थित ठिकानों पर ED की रेड, मेरठ और नोएडा में भी छापेमारी फोटो सोर्स : Social Media
ED Raid Corruption Case Nikant Jain: लखनऊ के एक बहुचर्चित रिश्वत और निवेश घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए निलंबित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश के करीबी निकांत जैन के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। ये छापे लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विशाल खंड, मेरठ और नोएडा के कई स्थानों पर एक साथ डाले गए। निकांत जैन को उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) पहले ही रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार कर चुकी है। अब ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत इस मामले में अपनी सक्रियता और तेज कर दी है।
सूत्रों के अनुसार इस घोटाले की जड़ें उन निवेश प्रोजेक्ट्स में हैं, जिनमें अभिषेक प्रकाश के कार्यकाल के दौरान नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रुपये के निवेश को हरी झंडी दी गई थी। इस पूरे नेटवर्क में निकांत जैन की भूमिका बिचौलिए की बताई जा रही है, जो निवेशकों और सरकारी अधिकारियों के बीच रिश्वत के लेन-देन में अहम कड़ी के तौर पर कार्य कर रहा था। STF द्वारा की गई शुरुआती जांच में सामने आया था कि निकांत जैन ने कई बार सरकारी अनुमति, NOC, नक्शा पास कराने और ज़मीन के उपयोग बदलवाने जैसी प्रक्रियाओं में निवेशकों से मोटी रकम वसूली थी।
प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार सुबह लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विशाल खंड में निकांत जैन के ठिकानों पर दस्तक दी। सूत्रों के अनुसार, इस छापेमारी के दौरान ईडी को कई अहम दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड्स, और संदिग्ध लेनदेन से संबंधित विवरण प्राप्त हुए हैं। ईडी की टीमों ने नोएडा और मेरठ में भी कई आवासीय और व्यावसायिक स्थलों पर रेड की। यह कार्रवाई सुबह 6 बजे से शुरू हुई और देर शाम तक चली। ईडी अधिकारियों का कहना है कि जब्त दस्तावेजों और उपकरणों की गहनता से जांच की जा रही है।
पूर्व लखनऊ जिलाधिकारी रहे IAS अभिषेक प्रकाश पर पहले से ही कई गंभीर आरोप हैं। इस मामले में उनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई थी और शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था। ऐसा आरोप है कि उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स में जानबूझकर अनियमितता बरती और नियमों को ताक पर रखकर निवेश की स्वीकृति दी। ईडी की कार्रवाई से यह संकेत मिल रहा है कि जांच की परिधि अब सिर्फ निकांत जैन तक सीमित नहीं रह जाएगी, बल्कि जल्द ही अभिषेक प्रकाश से भी पूछताछ संभव है।
एसटीएफ ने अपनी जांच के दौरान निकांत जैन से पूछताछ में पाया कि उसने अभिषेक प्रकाश के नाम का इस्तेमाल कर कई निवेशकों को धमकाया और उनसे पैसे वसूले। निकांत जैन की गिरफ्तारी के बाद से ही यह अनुमान लगाया जा रहा था कि जल्द ही ईडी भी इस मामले में शामिल होगी। STF ने ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग के स्पष्ट सुराग सौंपे थे।
ईडी को छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज, फर्जी कंपनियों के कागजात, फर्जी हस्ताक्षर वाली अनुमति-पत्र, नक्शा स्वीकृति की प्रतियां, और बैंकों में हुए संदिग्ध लेन-देन के रिकॉर्ड हाथ लगे हैं। साथ ही कुछ लग्जरी गाड़ियों और प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त से संबंधित कागजात भी जब्त किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार निकांत जैन के पास से कई निवेशकों की सूची भी मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस पूरे घोटाले में कई बड़े बिल्डरों और कारोबारियों की भी संलिप्तता हो सकती है।
इस कार्रवाई से प्रदेश की नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। कई अधिकारियों की नजर अब इस बात पर है कि ईडी अगली कार्रवाई किस पर करती है। चूंकि मामला हाई प्रोफाइल और सत्ता के करीब माने जाने वाले अधिकारियों से जुड़ा है, इसलिए इसकी राजनीतिक गंभीरता और बढ़ जाती है।
Updated on:
7 Aug 2025, 11:26 AM IST
Published on:
7 Aug 2025, 11:25 AM IST
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