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सड़क निर्माण में प्रयोग हो रही ‘FDR टेक्नोलोजी’, दर्जनों राज्यों के अधिकारी ट्रेनिंग लेने आ रहे यूपी

उत्तर प्रदेश में सड़क निर्माण में सरकर अब क्वालिटी सुधारने के लिए हाइ टेकनीकी का प्रयोग कर रही है। जिसका इस्तेमाल सबसे पहले उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में किया जा रहा है। इस नई तकनीकी को एफडीआर यानी 'फुल डेप्थ रेक्लेमेशन तकनीक' के तौर पर देखा जा रहा है। इस तकनीकी से सड़क निर्माण करने के बाद से ही अब दूसरे राज्यों के एक्सपर्ट भी यहाँ आकर इसे सीख रहे हैं। जिससे वो अपने यहाँ इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।  

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लखनऊ

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Dinesh Mishra

Sep 10, 2022

FDR Technology in UP Road PWD

FDR Technology in UP Road PWD

उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण से प्रभावित होकर देश के विभिन्न राज्यों से इसका प्रशिक्षण लेने के लिए इंजीनियर, कंसल्टेंट यहाँ आ रहे हैं। साथ ही कई बड़ी बड़ी कंपनियाँ भी यहाँ आ रही हैं। ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी भानू चंद्र गोस्वामी के अनुसार प्रधानमंत्री सड़क निर्माण योजना के तहत लगभग 57 हजार किलो मीटर सड़क निर्माण होना है। वर्ष 2022 - 2023 तक 5500 किमी सड़क को बेहतर करने और बनाने के लिए भी इसका प्रयोग हो रहा है। यूपी में एफडीआर तकनीक से प्रदेश के 63 जिलों में सड़क बनाई जाएगी। पीडब्ल्यूडी ने भी इस तकनीक से अपनी रोड बनाने का फैसला लिया है।


क्या है एफ़डीआर टेक्नोलोजी
उत्तर प्रदेश के सड़क निर्माण में प्रयोग की जाने वाली एफ़आरडी टेक्नोलोजी पूरी तरह से वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम से प्रभावित है। इसके निर्माण में तारकोल यानी डामर का प्रयोग नहीं होता है। पुरानी सड़क की गिट्टी समेत अन्य चीजों का इस्तेमाल दोबारा सड़क बनाने में किया जाता है। ऐसे में ट्रांसपोर्टेशन पर खर्च नहीं होता है।

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एफ़डीआर तकनीकी से बनी सड़क की लाइफ भी काफी ज्यादा होती है। जिससे किसी भी राज्य पर बजट की बचत होती है। पुरानी रोड की गिट्टी समेत अन्य चीजों का ही इस्तेमाल किया जाता है। सड़क को जापान और नीदरलैंड की मशीन से सीमेंट और एडिटिव को मिक्स करके बनाया जाता है। इसके बाद एक लेयर केमिकल की बिछाई जाती है. विदेशों में इसी तकनीक से रोड को बनाया जाता है। इस तकनीक से बनी सड़क की लाइफ दस साल होती है, जबकि सामान्य तरीके से बनी सड़क की लाइफ पांच साल होती है।


उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी भानू चंद्र गोस्वामी के अनुसार 'वर्तमान में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पुरानी सड़क के निर्माण में एफडीआर तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, जो पूरे देश में मॉडल के तौर पर पहचान बना रहा है। तकनीक से जहां एक ओर कम खर्च में सड़क बन रही है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी ये ज्यादा बेहतर है।'

यूपी में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 100 किलो मीटर निर्माण
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पहले 100 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया गया था, इसके सफल परिणाम आने के बाद 1200 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया। एफडीआर तकनीक से सड़क निर्माण में खर्च भी कम आता है। सामान्य तरीके से साढ़े पांच मीटर चौड़ी और एक किलोमीटर लंबी सड़क बनाने में एक करोड़ 30 लाख का खर्च आता है, जबकि इस तकनीक से सड़क बनाने में करीब 98 लाख रुपये का खर्च आता है।

Uttar Pradesh Road Developement officer
उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी भानू चंद्र गोस्वामी के अनुसार इस समय देश के आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों के अधिकारी और कंपनियों के एक्सपर्ट यूपी में हमारे यहाँ आकार इस तकनीकी को सीख रहे हैं।

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भानु चन्द्र गोस्वामी कहते हैं कि, बड़े बड़े इंजीनियर, कंसल्टेंट और तकनीकी विशेषज्ञ इसका प्रशिक्षण की डिमांड कर रहे हैं। इसमें प्रमुख तौर पर त्रिपुरा, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड व असम राज्यों से टीम प्रशिक्षण के लिए आ चुकी है। साथ ही हमारी टीम ने राजस्थान, बिहार में एफडीआर तकनीक से रोड बनाने का प्रशिक्षण देने जा चुकी है।

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उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अभियंत्रण विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार सड़कों के निर्माण में बड़ी एजेंसियों द्वारा भी अभी तक इस तकनीक को नहीं अपनाया गया है। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने इसे एक नई चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए इस तकनीक को अपनाने का काम किया है। इससे सड़कें सामान्य परंपरागत तकनीक से बनाई गई सड़कों से कहीं अधिक टिकाऊ होंगी। वहीं इनकी निर्माण लागत भी अपेक्षाकृत कम होगी। यही नहीं इनके निर्माण में कार्बन उत्सर्जन में कमी होने से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।