
खूबसूरत नजारे देखने को मिलते
चैत्र महीने में पड़ने वाले गुड़ी पड़वा से खुशियों की नई शुरुआत होती। पंडित शक्ति मिश्रा ने बतायाकि किसान रबी की फसल की कटाई के बाद दुबारा बुवाई करने की खुशी में इस त्यौहार को मनाते हैं। अच्छी फसल की कामना के लिए इस दिन वे खेतों की जोतते भी हैं।
उत्तर प्रदेश के गावो में भी मनाया जाता है, गुड़ी पड़वा
लखनऊ के आसपास के गांव के लोग गुड़ी पड़वा को बहुत ही धूमधाम के साथ मनाते। एक तरफ देवी की पूजा और दूसरी तरफ खेतो में हल चलाकर देवी से अच्छी पैदावार के के लिए प्रार्थना करते हैं। उन्होंने कहाकि जबकि गुड़ी पड़वा मराठी समुदाय का खास पर्व है, लेकिन अब ऐसा नहीं है। जब से गांव के लोग बम्बई कमाने के लिए जाना शुरू किये है, तब से उत्तर प्रदेश के गावों में यह परम्परा देखने को मिलती है।
गुड़ी पड़वा का महत्व
> पंडित शक्ति मिश्रा ने कहा कि गुड़ी का अर्थ विजय पताका और पड़वा का मतलब प्रतिपदा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुड़ी पड़वा यानी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी।
इस दिन ही सतयुग शुरू हुआ था। यह भी कहा जाता है कि प्रभु श्रीराम ने राक्षसराज रावण का वध करके लंका पर विजय प्राप्त की थी, उसकी खुशी में गुड़ी पड़वा मनाते हैं।
> गुड़ी पड़वा के दिन पर घरों में ध्वज लगाते हैं और उसे सजाते हैं। इस दिन भगवान श्रीराम और मां दुर्गा की पूजा करने का विधान है।
Published on:
22 Mar 2023 07:55 am
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