
लखनऊ. किंग जार्ज मेडिकल विश्वविद्यालय के चिकित्सकों और कर्मचारियों को अब एसजीपीजीआई के चिकित्सकों और कर्मचारियों की बराबर वेतन और भत्ते हासिल होंगे। गुरुवार को केजीएमयू के कुलपति प्रोफेसर एमएलबी भट्ट ने प्रेस कांफ्रेस कर बताया कि कार्यपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। उन्होंने 26 और 27 सितंबर को आयोजित कार्यपरिषद की बैठक में लिए गए निर्णयों की भी जानकारी दी।
दीक्षांत समारोह 23 दिसंबर को
कुलपति प्रोफेसर एमएलबी भट्ट ने बताया कि कार्यपरिषद ने चिकित्सा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की तिथि पर अपनी स्वीकृति दे दी है। दीक्षांत समारोह 23 दिसंबर 2017 को आयोजित होगा जिसमें नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट नई दिल्ली के निदेशक डॉ जी के रथ और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के प्रोफेसर ऑफ मेडिसिन डॉ सुधीर गुप्ता को मानद उपाधि देने का निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मणिपाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पद्म विभूषण डॉ बी एम हेगड़े मौजूद रहेंगे।
कई प्रोफेसर्स के रोके गए प्रमोशन
कुलपति ने बताया गया कि डॉ ओ पी सिंह ने अपने प्रमोशन के लिए जो अनुभव प्रमाण पत्र लगाया था, उसके अमान्य होने के कारण उन्हें दिए गए प्रमोशन का लाभ वापस ले लिया गया है। इसी तरह डॉ नईम अहमद ने स्वास्थ्य केंद्र पर तैनाती के दौरान शिक्षण कार्य का जो अनुभव प्रमाण पत्र लगाया था, वह भी अमान्य था। इन दोनों फैकल्टी मेंबर्स के वेतन में एक साल तक बढ़ोत्तरी रोक दी गई है। इनके प्रमोशन के सम्बन्ध में निर्णय कुलाधिपति के यहाँ से किया जायेगा।
अनुशासन समिति के गठन का निर्णय
कुलपति ने बताया कि डॉ संजय खत्री के मामले में कार्यपरिषद ने 6 सदस्यों की अनुशासन कमिटी का गठन करने का निर्देश जारी किया है। डॉ सूर्यकांत के कोर्ट में लंबित प्रकरण के सम्बन्ध में कार्यसमिति में प्रोफेसर सूर्यकांत का स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया। पूर्व में दो सदस्यों की जांच कमिटी द्वारा जांच हो रही थी जो एक्ट के मानकों के मुताबिक नहीं थी इसलिए 6 सदस्यों की कमिटी बनाने का निर्देश जारी किया गया। कार्यपरिषद ने 10 चिकित्सा शिक्षकों को प्रमोशन देने की संस्तुति की और विभिन्न विभागों में नए चयनित अभ्यर्थियों को सहायक आचार्य के तौर पर नियुक्ति देने की संस्तुति की गई। इसके साथ ही केजीएमयू के आईटी सेल द्वारा खरीदे गए लैपटॉप के जांच को लेकर जांच कमिटी की रिपोर्ट सौपी गई जिस पर निर्णय 13 अक्टूबर को लेने की बात की गई। कार्यपरिषद में बताया गया कि डॉ एहसान सिद्दीकी के प्रकरण में भारतीय चिकित्सा परिषद के एक उप कमिटी का निर्णय आना बाकी है। साथ ही कुछ नव निर्मित विभागों के शिक्षकों को उनके मूल विभाग में नियुक्त करने के सम्बन्ध में शासन से नया दिशा निर्देश लेने का निर्णय लिया गया।
Updated on:
28 Sept 2017 05:15 pm
Published on:
28 Sept 2017 05:10 pm
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