कुछ ऐसा होगा डॉक्यूमेंटेशन
म्युनिसिपल डॉक्यूमेंटेशन, यानी निगम के द्वारा अपनी व्यवस्थाओं का ब्यौरा खुद देने के लिए 1400 अंक रखे गए हैं। इसमें निगम कितना डिजिटल हुआ है जैसे कर्मचारियों की बैयोमेट्रिक उपस्तिथि, मोबाइल कम्पेक्टर, कूड़ा ढोने वाले वाहनों में जीपीएस जैसी सुविधाओं, कूड़े का ट्रीटमेंट / सेग्रीगेशन, स्वच्छता अम्बेस्डर्स और स्कूल व होटलों का ब्योरा देना होगा। फिलहाल न ही सभी कूड़ा गाड़ियों में जीपीएस लगे हैं और न ही 17 हज़ार सामुदायिक शौचालय निर्माण का लक्ष्य पूरा हो सका है। हालाँकि बाज़ारों में ट्विन बिन और सुबह शाम सफाई व्यवस्था की सुविधा मुहैया कराइ जा रही है। स्कूलों और महोल्लों में स्वछता कमिटी का गठन अब तक नहीं हुआ है। 5 किसानों को भी पेश करना होगा जो निगम से कम्पोस्ट ले रहे हों। स्टाफ को स्वच्छता सम्बंधित कोर्सेस भी अटेंड करने थे जो नहीं हुए। ऐसे कई बिंदु है जिसपर निगम को खुद नंबर देने हैं और ख़ास बात ये है कि निगम अपनी नाकामियों को छुपा भी नहीं सकता क्यूंकि इस बार नेगिटिव मार्किंग भी की जानी है।