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अलीगंज अग्निकांड: बंद रास्तों ने छीनी जिंदगियां, अब गुनहगारों को सजा दिलाने की उठी मांग

Lucknow Aliganj Fire: लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में बंद छत मार्ग और सुरक्षा खामियां सामने आने के बाद बिल्डिंग प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं। एलडीए ने पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jun 23, 2026

बंद था छत का रास्ता, दीवार तोड़कर पहुंची रेस्क्यू टीम (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

बंद था छत का रास्ता, दीवार तोड़कर पहुंची रेस्क्यू टीम (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

Lucknow  Aliganj Fire  LDA Investigation: राजधानी के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। आग की इस दर्दनाक घटना के बाद एक के बाद एक ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, जिन्होंने बिल्डिंग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि जिस बिल्डिंग में आग लगी, उसकी छत पर जाने का रास्ता बंद था। यदि छत तक पहुंचने का रास्ता खुला होता तो कई लोग समय रहते वहां पहुंच सकते थे और शायद इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी।

आग के बीच फंसे लोग, मची अफरा-तफरी

घटना के दौरान पूरी बिल्डिंग में धुआं भर गया और आग तेजी से फैलने लगी। आग लगते ही लोगों में चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन आग इतनी विकराल हो चुकी थी कि किसी के लिए भी अंदर प्रवेश करना संभव नहीं था। देखते ही देखते पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और पुलिस तथा फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई।

कुछ ही देर में अलीगंज पुलिस, मड़ियांव पुलिस और फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के साथ-साथ अंदर फंसे लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया। हालांकि, उन्हें जल्द ही पता चला कि बिल्डिंग की छत पर जाने का रास्ता बंद है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन और भी मुश्किल हो गया।

दीवार तोड़कर अंदर पहुंची टीम

रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की थी। सीढ़ियों और छत तक पहुंचने के रास्ते बंद होने के कारण बचाव दल को काफी मशक्कत करनी पड़ी। हालात ऐसे बन गए कि पुलिस और फायर ब्रिगेड को बिल्डिंग की दीवार तोड़कर अंदर प्रवेश करना पड़ा।

कड़ी मेहनत और जोखिम भरे अभियान के बाद बचावकर्मी अंदर पहुंच सके। कई घंटों तक चले इस अभियान में पुलिसकर्मी और फायरकर्मी लगातार धुएं और आग के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर राहत कार्य में जुटे रहे। रेस्क्यू टीम के इस साहसिक प्रयास की स्थानीय लोग भी सराहना कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने उठाए गंभीर सवाल

घटना के बाद इलाके के लोगों में गहरा आक्रोश है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर छत पर जाने का रास्ता खुला होता तो लोग ऊपर पहुंचकर अपनी जान बचा सकते थे। उनका मानना है कि आपातकालीन स्थिति में छत तक पहुंचने का रास्ता किसी भी बहुमंजिला इमारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।

लोगों का आरोप है कि बिल्डिंग में सुरक्षा मानकों का ठीक से पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होती और निकास के पर्याप्त इंतजाम होते तो हादसे का स्वरूप इतना भयावह नहीं होता।

बिल्डिंग मालिक पर उठे सवाल

इस दर्दनाक घटना के बाद लोगों ने बिल्डिंग मालिक की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मामले में बिल्डिंग मालिक से पूछताछ होनी चाहिए और यह जांच की जानी चाहिए कि आखिर छत पर जाने का रास्ता क्यों बंद था और क्या इमारत में अग्नि सुरक्षा के सभी नियमों का पालन किया गया था।

निवासियों का कहना है कि कई बार सुरक्षा मानकों की अनदेखी केवल कागजों तक सीमित रह जाती है, जिसका खामियाजा ऐसे हादसों के रूप में सामने आता है। लोगों की मांग है कि यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

शासन के बाद LDA भी हरकत में

घटना की गंभीरता को देखते हुए शासन स्तर पर जांच के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) भी सक्रिय हो गया है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।

इस समिति की अध्यक्षता प्राधिकरण के अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा करेंगे। समिति में मुख्य नगर नियोजक के.के. गौतम, मुख्य अभियंता मानवेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता (विद्युत एवं यांत्रिक) मनोज सागर तथा प्रभारी संपत्ति अधिकारी रवि नंदन सिंह को शामिल किया गया है।

हर पहलू की होगी गहन जांच

 LDA  की पांच सदस्यीय समिति को पूरे मामले की विस्तृत जांच का जिम्मा सौंपा गया है। समिति यह पता लगाएगी कि बिल्डिंग के निर्माण में कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई, अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं, और क्या आपातकालीन निकास की व्यवस्था पर्याप्त थी। इसके अलावा यह भी जांच की जाएगी कि इमारत का नक्शा स्वीकृत मानकों के अनुरूप था या नहीं तथा निर्माण के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं बरती गई। समिति को जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

हादसे ने खड़े किए कई बड़े सवाल

अलीगंज अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं है, बल्कि यह शहर की बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। राजधानी में तेजी से बढ़ते निर्माण कार्यों के बीच यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि हर इमारत में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हों और आपातकालीन निकास के रास्ते हमेशा खुले रहें। यह हादसा प्रशासन, बिल्डिंग मालिकों और संबंधित विभागों के लिए एक चेतावनी भी है कि सुरक्षा मानकों से किसी प्रकार का समझौता कितनी बड़ी त्रासदी को जन्म दे सकता है।

जवाबदेही तय होने का इंतजार

फिलहाल पूरे शहर की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि जांच के बाद इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

अलीगंज का यह दर्दनाक अग्निकांड एक बार फिर यह याद दिलाता है कि इमारतों की सुरक्षा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी से जुड़ा बेहद संवेदनशील विषय है। यदि समय रहते सुरक्षा मानकों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया, तो ऐसे हादसे भविष्य में और भी बड़ी त्रासदियों का कारण बन सकते हैं।