
भदोही की कालीन, बनारसी साड़ी, खुर्जा के मिट्टी के बर्तन और फिरोजाबाद की चूड़ियों सहित कई पारंपरिक उत्पाद मिलेंगे (फोटो सोर्स :file photo, Ritesh Singh )
Lucknow Diwali Mela 2026: दीपावली की रौनक, पारंपरिक हस्तशिल्प की खूबसूरती और महिला उद्यमियों के हुनर का संगम इस बार लखनऊ के दिवाली मेले में देखने को मिलेगा। उत्तर प्रदेश आईएएस ऑफिसर्स वाइव्स एसोसिएशन (यूपी आईएएसओवा) की ओर से 24 अक्टूबर को पहली बार दिवाली मेले का आयोजन किया जा रहा है। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों के पारंपरिक उत्पादों के साथ देश के दूसरे हिस्सों की हस्तशिल्प कला और घरेलू उपयोग की वस्तुएं भी प्रदर्शित की जाएंगी।
मेले में 100 से अधिक महिला उद्यमियों के उत्पादों को शामिल किए जाने की जानकारी दी गई है। भदोही की कालीन, खुर्जा के मिट्टी के बर्तन, फिरोजाबाद की चूड़ियां, बनारसी साड़ियां, लखनऊ की चिकनकारी और मीनाकारी के गहनों से लेकर घर सजाने के सामान तक खरीदारों को एक ही छत के नीचे विविध विकल्प मिलेंगे। इस आयोजन का उद्देश्य दीपावली की खरीदारी के साथ छोटे कारोबारियों, हस्तशिल्पियों और महिला उद्यमियों को बाजार उपलब्ध कराना भी है।
दिवाली मेले का आयोजन राजभवन कॉलोनी स्थित सीएसआई क्लब के सामने वाले लॉन में किया जाएगा। आयोजन का समय सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक निर्धारित किया गया है। मेले में हस्तशिल्पियों, महिला उद्यमियों, छोटे कारोबारियों और सामाजिक कल्याण से जुड़े संगठनों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। दीपावली के मद्देनजर यहां घर सजाने, उपहार देने, पारंपरिक परिधान खरीदने और पूजा से जुड़ी जरूरतों के लिए कई तरह की वस्तुएं उपलब्ध होंगी। आयोजकों की योजना इस आयोजन को ऐसा मंच बनाने की है, जहां खरीदारों को विविध उत्पाद मिलें और छोटे कारोबारियों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिले।
मेले में उत्तर प्रदेश की पारंपरिक हस्तशिल्प कला प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेगी। भदोही की कालीन, खुर्जा के सिरेमिक और मिट्टी के बर्तन, फिरोजाबाद की कांच की चूड़ियां तथा बनारसी साड़ियां यहां देखने और खरीदने को मिलेंगी। लखनऊ की चिकनकारी, जरदोजी की जूतियां, मीनाकारी के गहने और पीतल के सामान भी मेले की शोभा बढ़ाएंगे। इसके अलावा मोमबत्तियां, सजावटी वस्तुएं और घर की साज-सज्जा से जुड़े उत्पाद भी रखे जाएंगे। इन वस्तुओं के जरिए खरीदारों को पारंपरिक शिल्प और स्थानीय कारीगरों की कला से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। दीपावली के अवसर पर घरों को सजाने और परिचितों को उपहार देने के लिए भी यहां कई विकल्प उपलब्ध रहेंगे।
इस दिवाली मेले में केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों के पारंपरिक उत्पादों को भी स्थान दिया जाएगा। चंदेरी की साड़ियां, जयपुर के कपड़े और जूते, कच्छ के गहने तथा बाटिक प्रिंट के उत्पाद भी बिक्री के लिए रखे जाएंगे। इसके साथ क्रोशिया से बने सामान, आकर्षक पोटली और उपहारों की सजावटी पैकिंग से जुड़ी वस्तुएं भी उपलब्ध होंगी। अलग-अलग क्षेत्रों की शिल्प परंपराओं को एक मंच पर लाने से खरीदारों को विभिन्न डिजाइन, रंग और कलात्मक शैलियों के उत्पाद देखने का अवसर मिलेगा। इस तरह मेले में पारंपरिक भारतीय कला के साथ आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार वस्तुओं की भी मौजूदगी रहेगी।
मेले का एक प्रमुख उद्देश्य महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करना और उनके उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाना है। आयोजन में 100 से अधिक महिला उद्यमियों के उत्पाद शामिल किए जाने की जानकारी दी गई है। इन उत्पादों के माध्यम से महिलाओं के कौशल, रचनात्मकता और कारोबार को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। छोटे स्तर पर अपना काम शुरू करने वाली महिलाओं के लिए ऐसे आयोजन ग्राहकों से सीधे जुड़ने, उत्पादों की पहचान बनाने और बिक्री के नए अवसर तलाशने में मददगार हो सकते हैं। महिला उद्यमियों की भागीदारी से मेले में हस्तनिर्मित वस्तुओं, घरेलू उत्पादों और सजावटी सामानों की विविधता भी बढ़ेगी।
मेले में आकांक्षा समिति की आजीविका पहल से जुड़े उत्पादों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। यूपी आईएएसओवा की सामाजिक सेवा इकाई आकांक्षा समिति के मसाला मठरी केंद्र में तैयार मसाले और नाश्ते के उत्पाद यहां बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। समिति के अनुसार, लखनऊ स्थित इस केंद्र के माध्यम से 100 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला है। इन महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को मेले में जगह मिलने से उन्हें ग्राहकों तक पहुंचने और अपने काम को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आय के साधन उपलब्ध कराने के साथ उनकी आर्थिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
मेले में महिला शरणालय में तैयार हस्तनिर्मित उत्पाद भी बिक्री के लिए रखे जाएंगे। इसके अलावा दृष्टि एनजीओ की भागीदारी भी प्रस्तावित है। सामाजिक संस्थाओं की मौजूदगी से आयोजन में ऐसे उत्पादों को भी मंच मिलेगा, जिनके निर्माण से जुड़ी पहलें सामाजिक सहयोग और आजीविका से संबंधित हैं। खरीदारों को इन वस्तुओं के माध्यम से हस्तनिर्मित उत्पादों की खरीदारी का अवसर मिलेगा। आयोजकों की मंशा है कि मेले के जरिए कारोबार के साथ सामाजिक कल्याण से जुड़ी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जाए।
दिवाली मेले में परिवारों और बच्चों के लिए मनोरंजन की गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। यहां खाने-पीने के स्टॉल, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, खेल और बच्चों के लिए विभिन्न गतिविधियां होंगी। सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक चलने वाले इस आयोजन में लोग खरीदारी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खानपान का आनंद ले सकेंगे। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य शिविर और पैथईजी लैब्स की ओर से रक्त जांच की सुविधा भी प्रस्तावित है। आयोजकों ने मेले में कुछ विशेष स्टॉल शामिल करने की भी योजना बनाई है। इनमें बडीज पेट केयर के पालतू जानवरों के भोजन से जुड़े उत्पाद और सोल पाथ विद अनु की ओर से टैरो रीडिंग की सुविधा शामिल है।
आकांक्षा समिति की स्थापना वर्ष 1987 में यूपी आईएएसओवा की सामाजिक सेवा इकाई के रूप में हुई थी। संस्था महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और आय बढ़ाने से संबंधित गतिविधियों पर काम करती है। दिवाली मेले में समिति की आजीविका पहल से जुड़े उत्पादों को अन्य हस्तशिल्पियों और कारोबारियों के साथ मंच उपलब्ध कराया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार वस्तुओं को खरीदारों तक पहुंचाने और महिला उद्यमियों के काम को पहचान दिलाने का अवसर मिलेगा।
Updated on:
17 Oct 2026 01:54 pm
Published on:
17 Oct 2026 01:53 pm
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