
खुशखबर, सीडीआरआई ने बनाई कोरोना की स्वदेशी दवा उमीफेनोविर
लखनऊ. केंद्रीय औषधिक अनुसंधान संस्थान (Central Drug Research Institute ) (सीडीआरआई), लखनऊ ने कोरोनावायरस की स्वदेशी दवा बनाई है। और इस जादुई दवा का नाम उमीफेनोविर (Umifenovir) रखा गया है। यह दवा कोरोना के हल्के, मध्यम लक्षण व उच्च जोखिम वाले मरीजों में कारगर पाई गई है। पांच दिन में वायरल लोड (viral load) को खत्म कर देता है। यह दवा डेल्टा वैरिंएट में भी असरदार है। पर डेल्टा प्लस वैरिएंट को लेकर कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। पांच दिन की दवा का खर्च सिर्फ 600 रुपए है। यह अभी तो टैबलेट के रूप में है। पर जल्द ही सिरप और इनहेलर के रूप में बाजार में मिलेगी। दवा बनाने की तकनीकी गोवा की मेडिजेस्ट मैसर्स को सौंपी गई है।
सीडीआरआई निदेशक प्रो. तपस कुंडू ने बताया कि, औषधि महानियंत्रक, भारत सरकार (डीसीजीआई) ने जून 2020 में केजीएमयू (KGMU), एरा लखनऊ मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (ELMCH) और राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RMLIMS) के सहयोग से सीडीआरआई को लक्षणविहीन, हल्के और मध्यम कोविड-19 रोगियों पर तीसरे चरण के क्लिनिकल परीक्षण की अनुमति दी थी। सीएसआईआर ने 16 दवाएं सुझाई थीं, जिनमें से ट्रॉयल के लिए उमीफेनोविर (आर्बिडोल) का चयन किया गया।
डेल्टा वेरिएंट में भी कारगर :- निदेशक प्रो. कुंडू ने बताया कि, परीक्षण में ऐसे मरीज भी शामिल थे, जिनमें वायरस का डेल्टा वेरियंट मिला था। इस आधार पर माना जा रहा है कि, यह डेल्टा वेरिएंट पर भी कारगर हो सकती है। उमीफेनोविर का 132 मरीजों पर क्लिनिकल परीक्षण किया गया। संस्थान नई दवा उमीफेनोविर का पेटेंट कराने में जुटा है।
खर्च सिर्फ 600 रुपए :- सीडीआरआई निदेशक प्रो. तपस कुंडू (CDRI director Professor Tapas Kundu) ने बताया कि, उमीफेनोविर कोरोनावायरस के सेल कल्चर को नष्ट करता है और मानव सेल में इसके प्रवेश को रोकता है। पांच दिन की दवा का खर्च करीब 600 रुपए आता है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने क्लीनिकल परीक्षण रिपोर्ट का मूल्यांकन किया है और आपातकालीन स्वीकृति देने और अधिक संख्या में हल्के लक्षण वाले रोगियों पर अध्ययन जारी रखने के लिए कहा है।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए इंतजार :- टीम समवन्यक डॉ. आर रविशंकर ने बताया कि, उमीफेनोविर एक व्यापक स्पेक्ट्रम एंटीवायरल है। रूस, चीन और अन्य देशों में करीब 20 साल से एन्फ्लुएंजा, निमोनिया के लिए एक सुरक्षित, बिना सलाह उपलब्ध दवा है। दवा के इस्तेमाल की अनुमति मिलने के बाद इसे गर्भवती महिलाओं और बच्चों को भी दिया जा सकता है।
स्वदेशी आरटीपीसीआर किट शीघ्र :- डॉ. कुंडू ने बताया कि सीडीआरआई की डायग्नोस्टिक लैब में करीब तीन लाख मरीजों के नमूनों की जांच की गई है। संस्थान ने एक स्वदेशी आरटीपीसीआर किट इंडीजीनियस भी विकसित की है।
Published on:
15 Sept 2021 08:29 pm
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