
लखनऊ में खुलने जा रहा हेरिटेज एंड आर्ट म्यूजियम, अवध संस्कृति का आधुनिक अनुभव मिलेगा (फोटो सोर्स : Lucknow Heritage WhatsApp News Group)
Lucknow History: नवाबी शहर लखनऊ की ऐतिहासिक पहचान, कला, संस्कृति और गंगा-जमुनी तहजीब को एक ही छत के नीचे समेटने वाला लखनऊ म्यूजियम ऑफ हेरिटेज एंड आर्ट अब पूरी तरह तैयार हो चुका है। हुसैनाबाद क्षेत्र में विकसित यह अत्याधुनिक संग्रहालय 01 मार्च 2026 को लोकार्पित होने के बाद आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। यह म्यूजियम न केवल अवध की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगा, बल्कि पर्यटन, कला संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का भी कार्य करेगा।
लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) द्वारा लगभग 4973 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में विकसित इस म्यूजियम का निर्माण करीब 41.43 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यह परियोजना राजधानी के सांस्कृतिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने संग्रहालय का निरीक्षण करते हुए भवन की संरचना, प्रदर्शनी दीर्घाओं, पर्यटक सुविधाओं तथा सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को अंतिम तैयारियों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने बताया कि यह म्यूजियम शासन की पर्यटन विकास नीति के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य लखनऊ की ऐतिहासिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है।
लखनऊ म्यूजियम ऑफ हेरिटेज एंड आर्ट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनोखी वास्तुकला है। यह प्रदेश की पहली ऐसी आईकॉनिक इमारत होगी, जहां बिना किसी कॉलम या पिलर के सहारे 45 मीटर लंबा कैंटीलीवर बनाया गया है। यह आधुनिक इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर का उत्कृष्ट उदाहरण है। भवन की डिजाइन पारंपरिक नवाबी स्थापत्य और आधुनिक निर्माण तकनीक का संतुलित मिश्रण प्रस्तुत करती है। इसकी आकर्षक संरचना दूर से ही पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करती है और इसे शहर का नया लैंडमार्क बनाने की क्षमता रखती है।
संग्रहालय में अवध की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और साहित्यिक विरासत को आधुनिक तकनीक और इंटरैक्टिव माध्यमों के जरिए प्रस्तुत किया गया है। विभिन्न विषयों पर आधारित कई विशेष गैलरियां विकसित की गई हैं।
इन गैलरियों के माध्यम से आगंतुक अवध की संस्कृति को केवल देखेंगे ही नहीं, बल्कि अनुभव भी कर सकेंगे।
म्यूजियम में आधुनिक तकनीक का विशेष उपयोग किया गया है। यहां बनाया गया वीआर (Virtual Reality) गेमिंग एरीना दर्शकों को इतिहास के साथ डिजिटल तरीके से जोड़ने का अनूठा अनुभव देगा। दर्शक वर्चुअल माध्यम से नवाबी दौर, ऐतिहासिक घटनाओं और सांस्कृतिक आयोजनों को महसूस कर सकेंगे। यह पहल विशेष रूप से युवाओं और छात्रों को इतिहास से जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार इस म्यूजियम का निर्माण शहर में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है। हुसैनाबाद क्षेत्र पहले से ही बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा और रूमी दरवाजा जैसे ऐतिहासिक स्थलों के कारण पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण रहा है। अब इस संग्रहालय के जुड़ने से यहां आने वाले पर्यटकों को लखनऊ की संस्कृति का समग्र अनुभव एक ही स्थान पर मिलेगा। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
तेजी से बदलते डिजिटल दौर में पारंपरिक संस्कृति और इतिहास से नई पीढ़ी का जुड़ाव कम होता जा रहा है। ऐसे में यह म्यूजियम युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम बनेगा। यहां इंटरैक्टिव डिस्प्ले, डिजिटल इंस्टॉलेशन और ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों के जरिए इतिहास को रोचक और आसान तरीके से समझाया जाएगा। स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए यह एक शैक्षणिक केंद्र के रूप में भी विकसित होगा।
संग्रहालय केवल प्रदर्शनी स्थल नहीं बल्कि स्थानीय कला और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने का मंच भी बनेगा। यहां क्षेत्रीय कारीगरों और शिल्पकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने और बाजार उपलब्ध कराने के अवसर मिलेंगे। इससे पारंपरिक हस्तशिल्प को पहचान मिलेगी। स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह म्यूजियम सांस्कृतिक पर्यटन के साथ-साथ आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
संग्रहालय परिसर में आधुनिक पर्यटक सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिनमें डिजिटल सूचना केंद्र,गाइडेड टूर सुविधा,बैठने एवं विश्राम क्षेत्र,कैफेटेरिया,सुरक्षित प्रवेश व्यवस्था,दिव्यांगजन अनुकूल संरचना शामिल हैं। इन सुविधाओं से पर्यटकों को आरामदायक और यादगार अनुभव मिलेगा।
लखनऊ हमेशा से तहजीब, अदब, कला और खानपान के लिए जाना जाता रहा है। लखनऊ म्यूजियम ऑफ हेरिटेज एंड आर्ट इस पहचान को आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह म्यूजियम राजधानी का नया सांस्कृतिक प्रतीक बनेगा और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा।
Updated on:
26 Feb 2026 09:29 am
Published on:
26 Feb 2026 09:28 am
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