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‘नवाबों नहीं, लक्ष्मण की नगरी है लखनऊ’, स्वामी रामभद्राचार्य के बयान से गूंजा कथा पंडाल

Swami Rambhadracharya Ram Katha Lucknow: लखनऊ में आयोजित श्रीराम कथा में स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि शहर की पहचान नवाबों से नहीं, भगवान श्रीराम के अनुज लक्ष्मण से है। कथा में उमड़ी भारी श्रद्धालुओं की भीड़।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jun 04, 2026

Swami Rambhadracharya: स्वामी रामभद्राचार्य बोले, लखनऊ की असली पहचान नवाब नहीं बल्कि भगवान लक्ष्मण हैं (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Swami Rambhadracharya: स्वामी रामभद्राचार्य बोले, लखनऊ की असली पहचान नवाब नहीं बल्कि भगवान लक्ष्मण हैं (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

 Swami Rambhadracharya Ram Katha:  राजधानी लखनऊ का वातावरण इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और राम नाम के रस में सराबोर है। सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के तीसरे दिन तुलसी पीठाधीश्वर पद्म विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज की ओजस्वी वाणी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। विशाल कथा पंडाल “जय श्रीराम” और “जय हनुमान” के उद्घोष से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालु देर रात तक कथा श्रवण में लीन रहे और पूरा परिसर भक्ति रस में डूबा दिखाई दिया।

स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने अपने प्रवचनों में भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म की स्थापना और भारतीय संस्कृति की महानता का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान का अवतार केवल दुष्टों के विनाश के लिए नहीं, बल्कि मानव समाज को सत्य, मर्यादा और कर्तव्य का मार्ग दिखाने के लिए होता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन संपूर्ण मानवता के लिए आदर्श है और उनका चरित्र आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहा है।

भगवान राम का जीवन मानवता के लिए प्रेरणा

कथा के दौरान स्वामी जी ने कहा कि जब-जब संसार में अधर्म, अन्याय और अनीति बढ़ती है, तब-तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतरित होकर धर्म की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने अवतार लेकर रावण जैसे अत्याचारी का अंत किया और धर्म की पुनर्स्थापना की।

उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान राम केवल अयोध्या के राजा नहीं थे, बल्कि वे आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और आदर्श शासक के रूप में पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा हैं। उनका जीवन त्याग, मर्यादा, संयम और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है। स्वामी जी ने कहा कि आज समाज को सबसे अधिक आवश्यकता भगवान राम के आदर्शों को आत्मसात करने की है। यदि व्यक्ति अपने जीवन में राम के चरित्र का थोड़ा सा भी अनुसरण कर ले, तो परिवार, समाज और राष्ट्र में सुख-शांति स्थापित हो सकती है।

'भारत दैट इज इंडिया' होना चाहिए

अपने प्रवचन के दौरान स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने भारतीय संस्कृति और राष्ट्र की पहचान पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संविधान में प्रयुक्त “इंडिया दैट इज भारत” की जगह “भारत दैट इज इंडिया” लिखा जाना चाहिए था, क्योंकि भारत हमारी सनातन पहचान और आत्मा है। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि यह ऋषियों, मुनियों और सनातन संस्कृति की पुण्यभूमि है। यहां की संस्कृति विश्व को सदैव मानवता, शांति और आध्यात्मिकता का संदेश देती रही है। स्वामी जी के इन विचारों पर कथा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने “जय श्रीराम” के उद्घोष के साथ उनका समर्थन किया।

लखनऊ की पहचान लक्ष्मण से

कथा के सबसे चर्चित प्रसंगों में से एक वह रहा, जब स्वामी रामभद्राचार्य जी ने लखनऊ की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ की पहचान केवल नवाबों से नहीं है, बल्कि यह नगर भगवान श्रीराम के अनुज कुमार लक्ष्मण की नगरी है।

उन्होंने कहा कि “लखनऊ” का नाम भी “लक्ष्मणपुर” से विकसित हुआ है और यह शहर अपनी आध्यात्मिक परंपराओं, धार्मिक आयोजनों और सांस्कृतिक विरासत के कारण देशभर में विशिष्ट स्थान रखता है। स्वामी जी ने विशेष रूप से लखनऊ की प्रसिद्ध “बड़ा मंगल” परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां हनुमान भक्तों द्वारा जो विशाल भंडारे आयोजित किए जाते हैं, वे इस शहर की धार्मिक चेतना और सेवा भावना के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा दृश्य पूरे देश में कहीं और देखने को नहीं मिलता। उनके इस वक्तव्य के बाद पूरा कथा पंडाल “बोलो बजरंगबली की जय” के उद्घोष से गूंज उठा।

भजनों ने बांधा समां

कथा के मध्य स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने अपने मधुर और भावपूर्ण अंदाज में कई भजनों की प्रस्तुति भी दी। उनके भजनों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैसे ही स्वामी जी ने श्रीराम और हनुमान जी की महिमा का गुणगान किया, श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमने लगे। कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा परिसर भक्ति के अद्भुत वातावरण से भर उठा। कथा स्थल पर उपस्थित महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी रामधुन में मग्न दिखाई दिए।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी

तीसरे दिन कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। कथा पंडाल पूरी तरह भरा रहा और बड़ी संख्या में लोग बाहर खड़े होकर भी कथा श्रवण करते नजर आए। आयोजकों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं। पूरे परिसर को आकर्षक फूलों और रोशनी से सजाया गया था। मंच पर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की सुंदर झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही।

जनप्रतिनिधियों और विशिष्ट लोगों ने लिया आशीर्वाद

इस अवसर पर प्रदेश सरकार के कृषि विपणन एवं उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेन्द्र सिंह, विधायक डॉ. नीरज बोरा, पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी तथा यूपी कोऑपरेटिव यूनियन के उपसभापति ब्रजकिशोर गुप्ता सहित अनेक गणमान्य लोग कथा स्थल पहुंचे और व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया। सभी अतिथियों ने स्वामी रामभद्राचार्य महाराज के प्रवचनों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करते हैं।

रामकथा से मिल रहा आध्यात्मिक संदेश

नौ दिवसीय इस संगीतमय श्रीराम कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक जागरण और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रसार करना भी है। कथा के माध्यम से लोगों को भगवान राम के आदर्शों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

कथा स्थल पर पहुंच रहे श्रद्धालुओं का कहना है कि स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज की वाणी में अद्भुत शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा है।उनके प्रवचन सुनकर मन को शांति मिलती है और जीवन को नई दिशा प्राप्त होती है। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ रही है, श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पूरे वातावरण में रामनाम की गूंज और भक्ति की धारा बह रही है, जिससे राजधानी लखनऊ इन दिनों सचमुच राममय नजर आ रहा है।