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Accident Report: लखनऊ में सड़क हादसों का कहर: 59 दिन में 342 दुर्घटनाएं, 128 मौतें, 71% ज्यादा घायल

Lucknow Road Accidents Surge: लखनऊ में सड़क हादसों ने चिंता बढ़ा दी है। 59 दिनों में 342 दुर्घटनाएं, 128 मौतें और 321 लोग घायल हुए हैं, जो पिछले साल की तुलना में बड़ी बढ़ोतरी दर्शाता है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Mar 29, 2026

सड़क हादसों का रिकॉर्ड, 59 दिन में 128 मौतें, प्रशासन अलर्ट (Source: Police Media Cell)

सड़क हादसों का रिकॉर्ड, 59 दिन में 128 मौतें, प्रशासन अलर्ट (Source: Police Media Cell)

Accident Data Report: राजधानी लखनऊ में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या ने प्रशासन और आम जनता दोनों की चिंता बढ़ा दी है। साल के शुरुआती 59 दिनों में ही सड़क दुर्घटनाओं ने पिछले वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में कुल 342 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई, जिनमें 128 लोगों की मौत हो गई, जबकि 321 लोग घायल हुए हैं। इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि सड़क सुरक्षा अभियान चलाने के बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। उल्टा, दुर्घटनाओं, मौतों और घायलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

पिछले साल के मुकाबले तेज बढ़ोतरी

यदि पिछले वर्ष की इसी अवधि से तुलना की जाए, तो सड़क हादसों में लगभग 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, मृतकों की संख्या में करीब 29 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। सबसे चिंताजनक पहलू घायलों की संख्या है, जिसमें लगभग 71 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है। यह आंकड़े न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता पर भी गंभीर चिंता जताते हैं।

सड़क सुरक्षा अभियान के बावजूद हालात खराब

लखनऊ में समय-समय पर सड़क सुरक्षा को लेकर अभियान चलाए जाते रहे हैं। हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए गए हैं। इसके बावजूद हादसों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि या तो इन अभियानों का प्रभाव सीमित है या फिर लोग नियमों का पालन करने में लापरवाही बरत रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि केवल अभियान चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सख्त निगरानी और नियमों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता है।

मंडलायुक्त ने मांगी रिपोर्ट

बढ़ते हादसों को गंभीरता से लेते हुए मंडलायुक्त ने संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हादसों के प्रमुख कारणों की पहचान करें और उसके आधार पर ठोस कार्ययोजना तैयार करें। रिपोर्ट में यह भी देखा जाएगा कि किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं हो रही हैं और वहां किन कारणों से यह स्थिति बन रही है।

ब्लैक स्पॉट्स पर विशेष ध्यान

सड़क हादसों के प्रमुख कारणों में से एक ‘ब्लैक स्पॉट्स’ भी हैं,ऐसे स्थान जहां बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं। मंडलायुक्त ने इन ब्लैक स्पॉट्स को जल्द से जल्द चिन्हित कर उन्हें ठीक करने के निर्देश दिए हैं। इन स्थानों पर सड़क की डिजाइन में सुधार, संकेतकों की व्यवस्था, स्पीड ब्रेकर और रोशनी जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।

लखनऊ संभाग की स्थिति चिंताजनक

लखनऊ संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों में भी सड़क हादसों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। अधिकांश जिलों में दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, हरदोई जिला इस मामले में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है, जहां सड़क हादसों की संख्या अन्य जिलों के मुकाबले कम रही है। यह दर्शाता है कि सही रणनीति और प्रभावी क्रियान्वयन से हादसों को कम किया जा सकता है।

हादसों के पीछे मुख्य कारण

विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार, सड़क हादसों के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। इनमें तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन, खराब सड़कें और अपर्याप्त संकेतक शामिल हैं।इसके अलावा, कई मामलों में वाहन चालकों द्वारा शराब पीकर गाड़ी चलाना और मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी दुर्घटनाओं का कारण बनता है।

आम जनता की भूमिका भी अहम

सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम जनता की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि लोग ट्रैफिक नियमों का पालन करें और जिम्मेदारी से वाहन चलाएं, तो दुर्घटनाओं की संख्या में काफी कमी लाई जा सकती है। हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग, निर्धारित गति सीमा का पालन और सड़क पर सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है।

प्रशासन की नीति

प्रशासन अब सड़क सुरक्षा को लेकर और अधिक सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई, सीसीटीवी निगरानी और जागरूकता अभियानों को और प्रभावी बनाने की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा, स्कूलों और कॉलेजों में भी सड़क सुरक्षा को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवाओं में जागरूकता बढ़ाई जा सके।