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पान मसाला और गुटखा खाते हैं तो हो जाएं सावधान, कत्थे की जगह चमड़े को रंगने वाला गैंबियर केमिकल इस्तेमाल कर रही कंपनियां

अलीगढ़ में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा लिए गए शिखर, प्रधान व पान बहार मसालों के नमूनों की रिपोर्ट में पुष्टि हुई है। इस जांच में पता चला है कि पान मसाला तैयार करने में कत्थे की जगह कानपुर की टेनरियों में चमड़े को रंगने में प्रयोग किए जाने वाले गैंबियर मिलाया जा रहा है।

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Many Companies Mix Gambier Chemical in PAN Masala and Guthka

Many Companies Mix Gambier Chemical in PAN Masala and Guthka

अगर आप पान मसाला खाने के शौकीन हैं, तो सावधान हो जाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि पान मसाला में कत्था नहीं बल्कि सेहत को नुकसान करने वाले चमड़े को रंगने वाले केमिकल गैंबियर कंपनियां मिला रही हैं। अलीगढ़ में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा लिए गए शिखर, प्रधान व पान बहार मसालों के नमूनों की रिपोर्ट में पुष्टि हुई है। इस जांच में पता चला है कि पान मसाला तैयार करने में कत्थे की जगह कानपुर की टेनरियों में चमड़े को रंगने में प्रयोग किए जाने वाले गैंबियर मिलाया जा रहा है। मामले में कंपनियों को नोटिस भी जारी किया गया है। एफडीए डीओ सर्वेश मिश्रा के मुताबिक, गैंबियर कानपुर की टेनरियों में आता है। लेकिन इसका इस्तेमाल सस्ते पान मसाला और गुटखा में किया जाता है।

इंडोनेशिया से आता है गैंबियर

सर्वेश मिश्रा ने कहा कि इंडोनेशिया में गैंबियर बबूल के जंगलों की तरह फैला हुआ है। यह पेड़ की छाल, पत्तियों और जड़ को पीसकर बनाया जाता है। भारत में इसका निर्यात होने से पहले इसे कई चरणों में रसायनों को भी मिलाया जाता है। गैंबियर का इस्तेमाल चमड़े की टैनिंग में होता है।

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समझें कत्था और गैंबियर का फर्क

पान मसाला बनाने वाली कई कंपनियां गैंबियर के विकल्प के तौर पर कत्था का इस्तेमाल करती हैं। अगर सेहत के लिहाज से देखें तो इसे सुरक्षित नहीं माना जाता। भारतीय कत्था खैर नाम के पौधे की लकड़ी से तैयार होता है, जिसकी पैदावार उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और नेपाल के जंगलों में होती है। गैंबियर कई तरह की धातुओं में पाई जाती है।