
Mayawati once again follow its old BAMSEF
वर्ष 1978 में बीएसपी के संस्थापक कांशी राम ने बामसेफ की स्थापना की थी। इस संस्था में पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और दलितों के कर्मचारियों को जोडऩे का प्रयास किया गया था। इसीलिए इसका नाम पिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मचारी संघ का रखा गया था। बामसेफ के जरिए मायावती ने फिर से पुरानी पहल को दौहराना शुरू कर दिया है।
पिछले दो विधानसभा और एक लोकसभा चुनाव में बसपा का मूल वोट खिसकता देखकर मायावती की चिंता बढ़ गई थी। शायद यही करण है कि मायावती में अपने मूल मतों को बटोरने की चिंता बढ़ गई है। उन्हें उनके पुराने नजदीकियों ने समझाया कि कभी एक कैडर शिविर का आयोजन होता था। इससे लोग जुड़ते थे और पार्टी प्रचार प्रसार करते थे। शिवरों का आयोजन शहरी चकाचौंध से दूर गांवों में किया जाता था, लेकिन इस बार दिल्लीक के तालकटोरा स्टेडियम में इसका आयोजन किया जा रहा है।
मायावती अपने कार्यकर्ताओं को उसी तरह जोडऩे की तैयारी में है जैसी कांशीराम के समय थी। इसीलिए मायावती ने कैडर शिविर में बसपा के कार्यकर्ताओं के लिए राजनीतिक पाठ्यक्रम के बारे में चर्चा करेंगी, ताकि बामसेफ के पदाधिकारी बसपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को संगठन के मूल राजनीतिक चिंतन के बारे में बता सकें। यह भी कहा जा रहा है कि मायावती अपने मूल दलित वोट बैंक को मजबूत करने की बुनियादी राजनीतिक रणनीति पर वापस जा रही हैं।
मायावती ने कहा कि देशभर में तथा ख़ासकर बीजेपी शासित राज्यों उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश , हरियाणा, राजस्थान व महाराष्ट्र आदि में अपराध-नियन्त्रण व कानून-व्यवस्था के साथ-साथ जनहित व विकास का जो काफी ज़्यादा बुरा हाल है वह यह प्रमाणित करता है कि सत्ताधारी बीजेपी एण्ड कम्पनी का हर स्तर पर घोर अपराधीकरण हो गया है। इसका ही परिणाम है कि बीजेपी सरकारों की हर प्रकार की नाकामी, वादाखि़लाफी व भ्रष्टाचार आदि को भुलाकर ज़्यादातर लोग अपनी जान-माल को बचाने की फिक्र में ही लग गये हैं।
Published on:
03 Feb 2018 12:15 pm
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