
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के बीच राजनैतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। जिस तरह उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में भाजपा विरोधी दलों को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा, उसके बाद सभी दल निकाय चुनाव के माध्यम से अपनी ताकत का परीक्षण करना चाहते हैं। इस नगर निकाय चुनाव में भाजपा विरोधी दल बिना किसी गठबंधन के मैदान में उतरेंगे। अब तक के जो हालात हैं उसे देखकर यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस चुनाव में पार्षदी के टिकट के लिए विधायकी जैसा संघर्ष दिखाई देगा।
बसपा ने शुरू की बूथ लेवल पर तैयारी
बहुजन समाज पार्टी ने बूथ लेवल पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को चुनावी तैयारी की जिम्मेदारी अभी से सौंप दी है। सक्रिय सदस्यता अभियान की शुरुआत हो चुकी है। सक्रिय कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को अपने-अपने वार्ड में नए सदस्यों को पार्टी से जोड़ने की जिम्मेदारी सौपी गई है। पार्टी का टिकट चाहने वाले प्रत्याशियों के आवेदन आने के बाद जिला, जोन और बूथ लेवल के पदाधिकारी समीक्षा करेंगे और जो नाम मजबूत पाया जाएगा, उन्हें टिकट दिया जाएगा। बसपा के लखनऊ जिलाध्यक्ष डॉ हरिकृष्ण गौतम कहते हैं कि टिकट देते समय प्रत्याशी के जातीय समीकरण और उसके जीतने की संभावना को प्रमुख रूप से ध्यान में रखा जाएगा। बसपा का दावा है कि सर्व समाज को टिकट देकर पुराने सामाजिक गठजोड़ के आधार पर चुनावी मैदान में विरोधी दलों को चुनौती देंगे।
कांग्रेस अकेले लड़ेगी चुनाव
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन भले ही बरकरार हो लेकिन निकाय चुनाव दोनों पार्टियां अलग-अलग लड़ेंगी। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव भानू सहाय कहते हैं कि विधान सभा चुनाव में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने जिस तरह से किसानों का मुद्दा उठाया था, उसके बाद लोग कांग्रेस के साथ जुड़ने लगे थे। चुनाव के ठीक पहले सपा से गठबंधन करने से नुकसान यह हुआ कि सपा के प्रति पांच सालों का जो लोगों का गुस्सा था, उसका नुकसान कांग्रेस को भी उठाना पड़ा। ऐसे में कांग्रेस पार्टी अब अकेले दम पर सभी वार्डों में चुनाव लडने की तैयारी कर रही है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी नगर निकाय चुनाव की तैयारियों में जुटी है।
भाजपा काटेगी मौजूदा पार्षदों के टिकट
एक ओर जहाँ विपक्षी दल अपने-अपने स्तर पर नगर निकाय चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं तो दूसरी ओर भाजपा के लिए भी यह चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है। जिस तरह उत्तर प्रदेश के सभी राजनैतिक दल पहली बार नगर निकाय चुनाव में अपने-अपने दलों के सिंबल पर मैदान में उतर रहे हैं, उसके बाद भाजपा ने निकाय चुनाव को लेकर रणनीति पर तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि निकाय चुनाव में भाजपा दिल्ली की तर्ज पर मौजूदा पार्षदों के टिकट काटकर नए प्रत्याशियों को टिकट देगी, जिससे टिकट की चाह में बगावत को रोका जा सके। इसके अलावा पांच साल तक अपने क्षेत्र में निष्क्रिय रहे पार्षदों को टिकट देकर उन क्षेत्रों में पार्टी अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाने के मूड में नहीं दिख रही।
Published on:
13 Sept 2017 07:11 pm
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