
फाइल तस्वीर
अयोध्या. रामनगरी के विवादित स्थल पर न तो दीपदान होगा और न ही नमाज पढ़ी जाएगी। अयोध्या में भव्य व दिव्य दीपोत्सव की तैयारियां के बीच जिला प्रशासन ने विश्व हिंदू परिषद की मांग को ठुकरा दिया है। विहिप ने रामलला के गर्भगृह में 5100 दीपदान करने की अनुमति मांगी थी। विवादित परिसर के रिसीवर कमिश्नर मनोज मिश्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, यहां किसी भी किसी भी गैर परंपरागत कार्यक्रम की अनुमति नहीं है| मुस्लिम पक्षकारों ने भी इसका विरोध करते हुए कहा कि अगर विवादित परिसर में विहिप को दीपदान की अनुमति मिली तो मुस्लिम समाज भी परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति के लिए अपील करेगा। अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और दीपोत्सव के दौरान किसी भी विवाद से बचने के लिए जिला प्रशासन ने विश्व हिंदू परिषद को दीपदान की अनुमति नहीं दी है। गौरतलब है सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई अंतिम चरण में है। 17 अक्टूबर तक बहस पूरी हो जाएगी। फैसला एक महीने बाद आने की संभावना है।
अयोध्या में 24 से 26 अक्टूबर तक होने वाले भव्य दीपोत्सव की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। इस दौरान यहां किसी तरह का विवाद न हो इसके लिए प्रशासन फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। विहिप के दीपदान के आवेदन को निरस्त करना इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। अगले महीने राम मंदिर व बाबरी मस्जिद मुकदमे के संभावित फैसले को लेकर रामनगरी में सरगर्मियां बढ़ गई हैं। सुरक्षा को देखते हुए जिले में 10 दिसंबर तक धारा 144 लागू कर दी गई है। जनपद में निषेधाज्ञा लगी है। जिलाधिकारी के आदेश के मुताबिक, अयोध्या विवाद का संभावित फैसला, दीपोत्सव, चेहल्लुम और कार्तिक मेले को लेकर 2 महीने तक अयोध्या जिले में धारा 144 लागू रहेगी।
विहिप को नहीं मिली दीपदान की अनुमति
सोमवार को विश्व हिंदू परिषद ने मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास, विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा व पार्षद रमेश दास सहित संतों का प्रतिनिधिमंडल कमिश्नर से मिला। उन्होंने दीपावली के दिन 27 अक्टूबर को अयोध्या के विवादित परिसर में दीपदान के लिए अनुमति मांगी थी। कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए विहिप को अनुमति नहीं दी। दीपदान की अनुमति न मिलने से खफा विश्व हिंदू परिषद के नेता अब इजाजत के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। विहिप प्रतिनिधि मंडल ने इसे हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं पर चोट पहुंचाने और दुखी करने वाला फैसला करार दिया। विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि लंका विजय के बाद जब भगवान राम अयोध्या पधारे थे, तब से लेकर आज तक जगह-जगह दीपों का कार्यक्रम होता है। अगर अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि है तो उनकी जन्मभूमि पर भी दीपोत्सव का कार्यक्रम होना चाहिए। हम मांग करेंगे कि रामलला जहां विराजमान है वह भी दीपोत्सव का कार्यक्रम होना चाहिए।
विहिप के नए कदम से विवाद
विहिप के नए कदम से विवाद बढ़ गया है। बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी इकबाल ने कमिश्नर के फैसले का स्वागत करते हुए विहिप की मांग का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि अगर विवादित परिसर में विहिप को दीपावली मनाने की इजाजत दी, तो मुस्लिम समाज भी वहां नमाज अदा करने की मांग करेंगे। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, विवादित परिसर में दीप जलाने की अनुमति नहीं है। हिंदू पक्ष को अगर इसकी अनुमति मिलती है तो हम लोग भी नमाज पढ़ने की अनुमति मांगेंगे।
ऐसे तैयार हो रही अयोध्या
इस बार दीपोत्सव पर अयोध्या का कोना-कोना रोशन होगा। सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए रामनगरी में त्रेता युग की अयोध्या के दर्शन होंगे। 24 अक्टूबर से 26 अक्टूबर तक अयोध्या में होने वाले दीपोत्सव कार्यक्रम को लेकर प्रदेश की योगी सरकार ने भव्य आयोजन की रूपरेखा तय की है| प्रदेश के संस्कृति विभाग ने इस तीन दिवसीय आयोजन में होने वाले कार्यक्रमों की लिस्ट जारी कर दी है | थाईलैंड के पांच इंडोनेशिया के दो श्रीलंका के दो व भारत के 10 रचनाकारों द्वारा रामायण पर आधारित चित्रकला शिविर का आयोजन होगा। तीन दिनों तक अयोध्या में ऐसे भव्य कार्यक्रम होने हैं, जिन्हें देखने दुनिया भर से मेहमान अयोध्या आ रहे हैं। ख़ास बात यह है कि इस बार इस आयोजन का विस्तार लखनऊ तक किया गया है और समय अवधि भी बढ़ाई गयी है| इस बार अंतरराष्ट्रीय रामायण चित्रकला शिविर 17 से 25 अक्टूबर तक लखनऊ में आयोजित होगा|
धारा 144 लागू, डिबेट की अनुमति
अयोध्या विवाद मामले में आखिरी दौर की सुनवाई से पहले जिले में धारा 144 लागू कर दी गई है। जिलाधिकारी अनुज झा के मुताबिक, अयोध्या में आने वाले दर्शनार्थियों और दीपावली महोत्सव पर धारा 144 का कोई असर नहीं पड़ेगा। संभावित फैसले को लेकर 10 दिसंबर तक जनपद में धारा 144 लगाा गई है। जिला प्रशासन अलर्ट है। बताया जा रहा है कि अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में फोर्स मांगी गई है। इसके लिए अयोध्या में रह चुके शीर्ष अधिकारियों को भी दीपावली महोत्सव और सुप्रीम कोर्ट से आने वाले फैसले के मद्देनजर बुलाया जा रहा है। 18 अक्टूबर से पहले चरण की फोर्स आनी शुरू हो जाएगी। इस दौरान किसी भी टीवी चैनल को डिबेट की अनुमति नहीं मिलेगी।
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Updated on:
14 Oct 2019 04:58 pm
Published on:
14 Oct 2019 04:47 pm
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