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सिर्फ पांच मिनट में केजीएमयू में होगा डायबिटिक रेटीनोपैथी का ऑपरेशन

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) लखनऊ में लेजर तकनीक से डायबिटिक रेटीनोपैथी पीड़ित का ऑपरेशन संभव हो गया है। यह आपरेशन अब सिर्फ पांच मिनट में हो जाएगा। आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 3.9 लाख से अधिक व्यक्ति डायबिटिक रेटीनोपैथो से पीड़ित हैं। केजीएमसी में अब यह इलाज बेहद मामूली कीमत पर हो सकेगा।

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लखनऊ. डायबिटिक रेटीनोपैथो का इलाज अब आसान हो गया है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) लखनऊ में लेजर तकनीक से डायबिटिक रेटीनोपैथी पीड़ित का ऑपरेशन संभव हो गया है। यह आपरेशन अब सिर्फ पांच मिनट में हो जाएगा। अभी तक इस आपरेशन में कम से कम आधा आधे घंटे का समय लगता था। डॉक्टरों ने कहा कि, इस तरीके से ऑपरेशन की सफलता दर अधिक रहती है।

केजीएयमू में एडवांस डायबिटिक रेटीनोपैथी सेंटर स्वीकृत :- सरकार की ओर से केजीएयमू में एडवांस डायबिटिक रेटीनोपैथी सेंटर स्वीकृत किया गया है। इसके तहत कई नई सुविधाएं शुरू की जा रही हैं। आधुनिक मशीनों से विभाग को लैस किया जा रहा है।

जानें डायबिटिक रेटीनोपैथी क्या है ? :- केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग के डॉ. संदीप सक्सेना ने बताते हैं कि, अनियंत्रित डायबिटिक पीड़ित मरीजों को आंख संबंधी बीमारी का खतरा कई गुना अधिक रहता है। चिकित्सा विज्ञान में इसे डायबिटिक रेटीनोपैथी कहते हैं। इसमें आंख के पर्दे में सूजन आ जाती है। कई बार मरीज की आंख में रक्त का थक्का जम जाता है। इसका ऑपरेशन से सटीक इलाज होता है। अभी तक ऑपरेशन में आधे घंटे का वक्त लगता था।

लेजर मशीन से सफल ऑपरेशन संभव :- डॉ. संदीप सक्सेना ने आगे बताते हैं कि, अब विभाग में हाई एंड मल्टी स्पॉट लेजर मशीन आ गई है। साथ ही स्टेट ऑफ आर्ट लेजर मशीन भी खरीदी गई है। लेजर मशीन से सटीक व और सफल ऑपरेशन संभव हो गया है। अब तक हमारे पास जो मशीन थी वो वन स्पॉट थी। यानी एक बार में एक स्पॉट ही लेजर का कवर करती थी। जबकि इस मशीन के माध्यम से एक बार में 20 स्पॉट लेजर के मारती है। महज पांच से सात मिनट में ऑपरेशन संभव है। वहीं विट्रेक्टमी मशीन भी खरीदी गई है। इससे आंख के पर्दे की अब और बेहतर सर्जरी हो सकेगी।

डायबिटिक रेटिनोपैथी का इलाज महंगा :- एक नेत्र रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि, डायबिटिक रेटिनोपैथी के इलाज के तीन तरीके इंजेक्शन, लेजर उपचार और सर्जरी हैं। यह बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करता हैं। अगर निजी अस्पताल में इलाज कराते हैं तो प्रत्येक इंजेक्शन की कीमत 18,000-25,000 रुपए के बीच होती है। इसमें तीन इंजेक्शनों की जरूरत पड़ती है। इस प्रकार इसकी कुल लागत 75,000 रुपए है। बहुत से लोग इस कीमत को वहन नहीं कर सकते हैं।

यूपी में 3.9 लाख डायबिटिक रेटीनोपैथो पीड़ित :- एनपीसीबीवीआई (NPCBVI) कार्यक्रम से जुड़े एक पूर्व सरकारी अधिकारी को कहना है कि, इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की दृष्टि चली जाती है। पर अब इस पर कंट्रोल किया जा सकता है। आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 3.9 लाख से अधिक व्यक्ति डायबिटिक रेटीनोपैथो से पीड़ित हैं। केजीएमसी में अब यह इलाज बेहद मामूली कीमत पर हो सकेगा।

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यूपी में 18.5 लाख दृष्टिहीन :- आंकड़ों से पता चलता है कि यूपी में अनुमानित 1.85 मिलियन (18.5 लाख) लोग अंधे हैं। इससे भी बुरी बात यह है कि इस आबादी में हर साल तीन लाख से अधिक नए व्यक्ति जुड़ते हैं। प्रयागराज और मेरठ के मेडिकल कॉलेज में भी शीघ्र यह इलाज उपलब्ध हो जाएगा।

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