
यह उद्गार यहां रवीन्द्रालय चारबाग में पांच सितम्बर से चल रहे किताबों के मेले में समापन अवसर पर पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने व्यक्त किए। साहित्य की ऐसी पुस्तकों के साथ ही लगभग हर विषय की किताबें पुस्तक प्रेमियों को भा रही हैं। दस दिवसीय इस राष्ट्रीय पुस्तक मेले में आयोजकों का बधाई देने के साथ मुख्यअतिथि क तौर पर बहुत ही कम समय के लिए आई पर्यटन मंत्री ने कहा कि साहित्य और संस्कृति के लिए आज ऐसे आयोजनों की निरंतरता की आवश्यकता है।

उन्होंने यहां विशिष्ट अतिथियों विभावती मिश्रा व कथाकार शिवमूर्ति के साथ् मेले में हुई काव्य प्रतियोगिता के युवा विजेता शुभेन्द्र मिश्र, अतुल मिश्र व उन्नाव के शानू बाजपेयी सहित अन्य प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। बिंदु जैन के संचालन में चले समापन समारोह में संरक्षक अनिल टेकड़ीवाल, दाना पानी के गौरप, रूपा पाण्डेय व संयोजक देवराज अरोड़ा ने भी विचार व्यक्त किए। आभार श्रीमती नीरू अरोड़ा ने व्यक्त किया। समापन समारोह के दूसरे चरण में प्रमुख सहयोगियों व स्टाल धारकों को स्मृतिचिह्न देकर सम्मानित किया गया।

मेले में आए प्रकाशक अशोक शुक्ल ने बताया कि लखनऊ में इस नई जगह पर लगे पहले पुस्तक मेले का अनुभव अलग रहा। आमतौर पर पुस्तक प्रेमियों में मानस में जो एक जगह पहले से अंकित होती है, नई जगह नये लोगों की आमद होती है, जो अच्छी बात है। ललित ने सामान्य बिक्री बताई। अभिनव छाबड़ा का कहना था कि हम तो 12 महीनों किताबों के बीच रहते हैं, किताबों के मेले में नय चेहरे दिखाई देते हैं तो खुशी मिलती है। मेले में आजएक पुस्तक चोर भी पकड़ा गया। उसने दो जगह से चार किताबें खरीदने के साथ कई स्टालों से कहानी, कविता, शब्दकोश जैसी साहित्य की एक दर्जन से ज्यादा पुस्तकें अलग-अलग स्टालों से लेकर बैग में रख ली थीं। पकड़े गये इस युवा चोर से बगैर रसीद वाली सारी पुस्तकें वापस लेकर स्टाल धारकों को वापस कर दी गईं।