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लखनऊ

न सपा से दोस्ती न बीजेपी से बैर, राज्यसभा चुनाव में राजा भैया करेंगे सियासी खेल

UP Politics: उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए मंगलवार 27 फरवरी को मतदान होना है। 10 सीटों के लिए 11 कैंडिडेट मैदान में हैं।

लखनऊFeb 25, 2024 / 10:19 am

Aman Kumar Pandey

raja bhaiya with akhilesh yadav

राजा भैया और अखिलेश यादव

Rajya Sabha elections 2024: उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए मंगलवार 27 फरवरी को मतदान होना है। 10 सीटों के लिए 11 कैंडिडेट मैदान में हैं। बीजेपी (BJP) से 8 और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) से 3 नेता ताल ठोक रहे हैं। 403 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस समय 399 विधायक हैं। यदि संख्याबल के हिसाब से देखें तो BJP के 7 उम्मीदवारों(Candidate) की जीत तय है और सपा के 2 प्रत्याशी की सीट भी सुरक्षित है। लेकिन बीजेपी के आठवां कैंडिडेट उतार देने से सपा (SP) की तीसरी सीट फंस गई है।
नंबरगेम में फंसी एक राज्यसभा (Rajya Sabha) सीट के लिए सपा और बीजेपी दोनों सक्रिय हैं। दोनों ही पार्टी सपा और भाजपा अपने-अपने स्तर से विधायकों( MLA) की संख्याबल जुटाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इस लिहाज से उत्तर प्रदेश में 2 विधायकों वाली पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक (जेडीएल) और एक विधायक वाली बसपा (BSP) की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया से उनके आवास पर पहुंचकर मुलाकात की। इसके अगले ही दिन यूपी BJP के अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भी राजा भैया से मिलने पहुंच गए।
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BJP ऐसी पार्टी नहीं है। जो सियासी तस्वीर का आंकलन किए बगैर बिना किसी रणनीति के अतिरिक्त कैंडिडेट उतार दे। यूपी में भी BJP सपा के कुनबे में पहले सेंध लगा चुकी है। जब दारा सिंह चौहान (Dara Singh Chauhan) ने विधायक पद से इस्तीफा देकर सत्ताधारी दल बीजेपी का दामन थाम लिया था। ऐसे में सपा भी सतर्क है। अखिलेश यादव( Akhilesh Yadav) की रणनीति अपने कुनबे को बचाए रखते हुए राजा भैया (Raja Bhaiya) की पार्टी को भी अपने पाले में करने की है। जिससे सपा के तीसरे कैंडिडेट के जीतने पर किसी तरह का कोई संशय न रहे।
समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने राजा भैया से उनके आवास पहुंचकर बातचीत की। उन्होंने ही राजा भैया और अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की फोन पर बात कराई। अखिलेश यादव से बात करने के बाद राजा भैया ने यह कहा भी कि सपा हमारे लिए सबसे पहले आती है। हमने अपने सार्वजनिक जीवन के 20 साल दिए हैं। सपा हमारे लिए कोई पार्टी नहीं है। लेकिन इसके अगले ही दिन उत्तर प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी (Bhupendra Chaudhary) भी राजा भैया से मिलने पहुंच गए। सपा के साथ बातचीत के बीच राजा भैया से भूपेंद्र चौधरी की मुलाकात ने अब कई सियालसी सवालों को जन्म दे दिया है।
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अब यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या राजा भैया 2024 में भी 2018 के राज्यसभा चुनाव वाला सियासी खेल करेंगे ? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की राजा भैया से मुलाकात के बाद सपा भी अलर्ट मोड में आ गई है। वहीं अब सपा मुखिया अखिलेश यादव ने खुलकर राजा भैया को साथ आने का न्योता दे दिया है।
साल 2018 में भी इन्हीं 10 राज्यसभा सीटों का चुनाव हुआ था। जिनके लिए अबकी 27 फरवरी को वोट डाले जाने हैं। तब 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले SP-BSP में गठबंधन के लिए बातचीत चल रही थी। राज्यसभा की 8 सीटों पर BJP की जीत तय थी। वहीं आरएलडी(RLD) और अन्य छोटे-छोटे दलों, निर्दलीय विधायक राजा भैया के समर्थन से 2 सीटों पर नंबरगेम SP-BSP गठबंधन के पक्ष में नजर आ रहा था। SP से तब भी एक सीट से जया बच्चन (Jaya Bachchan) उम्मीदवार थीं। और दूसरी सीट से BSP के भीमराव अंबेडकर चुनाव लड़ रहे थे। SP के समर्थन से भीमराव का उच्च सदन यानी राज्यसभा पहुंचना भी तय माना जा रहा था। लेकिन BJP ने नौवां उम्मीदवार उतार दिया।
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भाजपा के इस दांव के बाद अलर्ट मोड में आए सपा प्रमुख अखिलेश ने अपना समर्थन कर रहे विधायकों की बैठक बुला ली। अखिलेश यादव की इस बैठक में प्रतापगढ़ की कुंडा विधानसभा सीट से तब निर्दलीय विधायक रहे राजा भैया भी शामिल हुए। कहा जाता है राजा भैया ने तब अखिलेश यादव को समर्थन का आश्वासन भी दिया था। लेकिन जब मतदान की बारी आई तो उन्हों BJP े BJP के नौवें उम्मीदवार के पक्ष में वोट किया। वोटिंग से पहले अखिलेश यादव की बैठक में पहुंचे राजा भैया ने मतदान करने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) से मुलाकात की थी।
राजा भैया के साथ ही BSP, RLD और निषाद पार्टी जैसे तब के गठबंधन सहयोगियों की क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) का नतीजा यह हुआ कि SP-BSP गठबंधन अपने दूसरे कैंडिडेट के लिए प्रथम वरीयता के 37 वोट नहीं जुटा सका। BSP के भीमराव को 33 वोट मिले और BJP के नौवें कैंडिडेट अनिल अग्रवाल को 22 वोट मिले। बात जब दूसरी वरीयता के वोट पर पहुंच गई। लेकिन यहां बाजी BJP के हाथ लगी। सपा-बसपा गठबंधन जो आसानी से दूसरी राज्यसभा सीट जीतता नजर आ रहा था। वह सीट राजा भैया और कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग की वजह से बीजेपी के हाथ आ गई।
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सपा को अपनी 3 सीटें जीतने के लिए 111 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोट चाहिए। सपा के पास फिलहाल 108 विधायक और कांग्रेस (Congress) के पास 2 विधायक हैं। इंडिया गठबंधन ( India Alliance) में शामिल इन दोनों पार्टियों के विधायकों की संख्या 110 पहुंच रहा है। ऐसे में सपा को जीत सुनिश्चित करने के लिए अपना कुनबा बचाए रखते हुए प्रथम वरीयता का 1 वोट और चाहिए होगा। दूसरी तरफ BJP को सभी 8 उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए प्रथम वरीयता के 296 वोट की जरूरत होगी। बीजेपी गठबंधन( BJP Alliance) के पास फिलहाल 286 विधायक हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में BSP के एक, जेडीएल के 2 विधायक हैं। राजा भैया के विधायक अगर राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का समर्थन करते हैं। तो सपा के तीनों कैंडिडेट जीत जाएंगे। यदि सपा अपने तीसरे प्रत्याशी के लिए प्रथम वरीयता के 37 वोट नहीं जुटा पाती है। तो बात दूसरी वरीयता के वोट तक पहुंच जाएगी। जहां संख्याबल के हिसाब से बीजेपी का पलड़ा भारी है। राज्यसभा चुनाव 2024 के इसी गणित को देखते हुए SP-BJP दोनों ही पार्टियां राजा भैया की पार्टी को अपने पाले में लाने के लिए पूरा जोर लगा रही हैं।
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अखिलेश यादव और सपा को 2018 के राज्यसभा चुनाव में राजा भैया ने गच्चा दे दिया था। लेकिन सपा को उनके समर्थन का विश्वास है। यह तर्क दिए जा रहे हैं कि मायावती (Mayawati) के नेतृत्व वाली बसपा सरकार में अपने उत्पीड़न, जेल जाने और पोटा के तहत एक्शन का दर्द राजा भैया भूले नहीं हैं। वह SP-BSP गठबंधन के खिलाफ थे। लेकिन जब यह हो ही गया तब BSP उम्मीदवार के लिए वोट करने की जगह उन्होंने BJP कैंडिडेट को बेहतर विकल्प समझा।
समाजवादी पार्टी से दूरी और अखिलेश यादव के साथ रिश्ते में आई खटास के बावजूद राजा भैया के संबंध मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव के साथ मधुर रहे हैं। राज्यसभा की इन 10 सीटों के लिए 2018 में हुए चुनाव के मुकाबले 2024 में तस्वीर बिल्कुल अलग है। SP और BSP की राहें जुदा हैं। शिवपाल सिंह यादव भी भतीजे अखिलेश यादव के साथ खड़े हैं। अखिलेश यादव को सपा की सीट सुनिश्चित करने के लिए राजा भैया की जरूरत है। और इसके लिए पहल भी अखिलेश यादव ने खुद ही की है। ऐसे में अब 27 फरवरी की तारीख बताएगी कि राजा भैया सपा का साथ देते हैं या फिर 2018 की कहानी दोहराते हैं।

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