
शिव मंदिर की मुक्ति के लिए लाखन आर्मी ने बड़ी यात्रा निकालने का ऐलान किया (फोटो सोर्स: भाषा WhatsApp News Group)
Raja Kansa Fort Dispute: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजधानी लखनऊ का एक पुराना ऐतिहासिक और धार्मिक विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कलां स्थित कथित राजा कंसा किले और उसके भीतर मौजूद बताए जा रहे शिव मंदिर को लेकर लाखन आर्मी ने बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी ने प्रदेशव्यापी “पासी स्वाभिमान यात्रा” निकालने की घोषणा करते हुए कहा है कि शिव मंदिर की मुक्ति और पासी समाज की ऐतिहासिक विरासत की रक्षा के लिए व्यापक जनसमर्थन जुटाया जाएगा।
सूरज पासी ने बताया कि यह यात्रा 9 जून को हरदोई से शुरू होगी और एक महीने तक प्रदेश के विभिन्न जिलों से गुजरते हुए 9 जुलाई को लखनऊ पहुंचकर समाप्त होगी। यात्रा के समापन पर राजधानी में एक विशाल “पासी स्वाभिमान महासम्मेलन” आयोजित किया जाएगा। संगठन का दावा है कि यह अभियान केवल एक धार्मिक स्थल की मुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पासी समाज के इतिहास, स्वाभिमान और सांस्कृतिक पहचान को पुनर्स्थापित करने का प्रयास भी है।
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह विवाद राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सामाजिक और ऐतिहासिक पहचान से जुड़े मुद्दे चुनावी माहौल में तेजी से प्रभाव डालते हैं। ऐसे समय में राजा कंसा किला और शिव मंदिर का मामला सामने आने से राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
लाखन आर्मी का कहना है कि वह इस मुद्दे को केवल धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि ऐतिहासिक विरासत और सामाजिक सम्मान के प्रश्न के रूप में उठा रही है। संगठन का दावा है कि वर्षों से उपेक्षित इस स्थल को उचित पहचान और संरक्षण मिलना चाहिए।
विवाद का केंद्र मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कलां में स्थित एक स्थल है, जिसे मुस्लिम समुदाय मजार और मस्जिद से जुड़ा धार्मिक परिसर मानता है, जबकि लाखन आर्मी और पासी समाज के कुछ लोग इसे राजा कंसा का ऐतिहासिक किला बताते हैं।
सूरज पासी का आरोप है कि किले के भीतर स्थित प्राचीन शिव मंदिर पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया और समय के साथ वहां मजार तथा मस्जिद का स्वरूप विकसित हो गया। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष इन दावों को खारिज करता रहा है और स्थल को अपने धार्मिक महत्व का हिस्सा बताता है। इसी दावे और प्रतिदावे के कारण पिछले कुछ महीनों से दोनों पक्षों के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है। प्रशासन को भी कई बार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा है।
विवाद उस समय और अधिक बढ़ गया जब बकरीद से पहले लाखन आर्मी ने कसमंडी कलां स्थित स्थल पर हनुमान चालीसा पाठ करने की घोषणा कर दी। संगठन का कहना था कि यह स्थान मूल रूप से हिंदू धार्मिक स्थल है और वहां पूजा-अर्चना की अनुमति दी जानी चाहिए।
हालांकि, संभावित तनाव को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने दोनों पक्षों की गतिविधियों पर रोक लगा दी। न तो लाखन आर्मी को वहां हनुमान चालीसा पाठ की अनुमति मिली और न ही मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने की इजाजत दी गई। प्रशासन का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना था, लेकिन इसके बाद विवाद और अधिक सुर्खियों में आ गया। दोनों समुदायों के बीच इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई और मामला राजनीतिक चर्चाओं तक पहुंच गया।
लाखन आर्मी अपने दावे के समर्थन में अंग्रेजी गजेटियर और स्थानीय ऐतिहासिक विवरणों का हवाला दे रही है। संगठन का कहना है कि उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों में काकोरी और आसपास के क्षेत्र में 11वीं सदी के दौरान राजा कंसा पासी के शासन का उल्लेख मिलता है।
संगठन के अनुसार, जब सालार मसूद गाजी अवध क्षेत्र की ओर बढ़ा था, तब राजा कंसा ने उसका मुकाबला किया था। इसी संघर्ष में सालार मसूद के दो प्रमुख सेनापति सैय्यद हातिम और खातिम मारे गए थे। लाखन आर्मी का दावा है कि कसमंडी कलां का यह स्थल उसी ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है। हालांकि इन दावों को लेकर इतिहासकारों और विभिन्न पक्षों के बीच अलग-अलग मत हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी अभी तक इन दावों की कोई अंतिम पुष्टि नहीं की गई है।
सूरज पासी ने उन दावों को भी चुनौती दी है, जिनमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के कथित सर्वे का हवाला दिया जाता है। उनका कहना है कि कई दस्तावेज और दावे भ्रामक हैं तथा उनकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो संगठन न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएगा। शिव मंदिर की मुक्ति के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी और ऐतिहासिक तथ्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सूरज पासी का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहेगा तथा न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाएगा।
घोषित कार्यक्रम के अनुसार “पासी स्वाभिमान यात्रा” हरदोई, उन्नाव, कानपुर नगर, फतेहपुर, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, कौशाम्बी, प्रयागराज, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर, वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, गोरखपुर, महराजगंज, संत कबीर नगर, बस्ती, अयोध्या, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बाराबंकी और लखनऊ सहित 31 जिलों से होकर गुजरेगी। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर सभाएं, संवाद कार्यक्रम और सामाजिक सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। संगठन का कहना है कि इसके माध्यम से युवाओं को अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक किया जाएगा।
सूरज पासी ने मोहनलालगंज से सांसद आर.के. चौधरी पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संगठन ने सांसद से इस मुद्दे को संसद और प्रशासनिक स्तर पर उठाने की मांग की थी, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उनका आरोप है कि जब सामाजिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर जनप्रतिनिधि सक्रिय भूमिका नहीं निभाते, तब समाज को स्वयं आगे आना पड़ता है। इसी कारण अब संगठन ने स्वतंत्र रूप से आंदोलन का रास्ता चुना है।
विवाद की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी पक्ष को ऐसा कदम उठाने की अनुमति नहीं दी जाएगी जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो। प्रशासन का कहना है कि सभी पक्षों को कानून का पालन करना होगा और किसी भी विवाद का समाधान संवैधानिक और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही किया जाएगा।
फिलहाल, 9 जून से शुरू होने वाली “पासी स्वाभिमान यात्रा” और उसके दौरान होने वाली गतिविधियों पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी। राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे इस मुद्दे ने विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
Published on:
04 Jun 2026 08:23 pm
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