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Ram Janmabhoomi: “खाता न बही, जो अखिलेश कहे वही सही” : राम मंदिर विवाद पर ओम प्रकाश राजभर का तंज

Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर चढ़ावे को लेकर उठे सवालों पर सियासत तेज हो गई है। अखिलेश यादव के आरोपों के बाद ओम प्रकाश राजभर और भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jun 08, 2026

(फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

(फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

Ram Mandir Donation BJP vs SP: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि को लेकर उठे विवाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए एक ट्वीट के बाद राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। जहां एक ओर अखिलेश यादव ने मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी राशि को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर एनडीए सहयोगी और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर तथा भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए सपा प्रमुख पर तीखा हमला बोला है।
राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर से जुड़े किसी भी विषय पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। यही वजह है कि अखिलेश यादव के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे पर बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

राजभर का तीखा हमला

अखिलेश यादव के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग केवल भ्रम और अफवाह फैलाने का काम करते हैं। राजभर ने कहा, “खाता न वही जो अखिलेश कहें, वही सही। यह पूरी तरह से लोगों को गुमराह करने की कोशिश है।”

उन्होंने आगे कहा कि राम मंदिर और उससे जुड़े मामलों को लेकर बिना तथ्यों के बयान देना उचित नहीं है। राजभर ने दावा किया कि ऐसे बयान समाज में भ्रम पैदा करने के उद्देश्य से दिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग आरोप लगा रहे हैं, उन्हें पहले तथ्यों की जानकारी हासिल करनी चाहिए और उसके बाद सार्वजनिक मंच पर कोई बात रखनी चाहिए।

राजभर ने व्यंग्यात्मक लहजे में यह भी कहा कि आरोप लगाने वाले लोगों को शायद यह भी जानकारी नहीं होगी कि अयोध्या में मंदिर का प्रवेश द्वार किस दिशा में है। उनका कहना था कि केवल राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों को विवाद का हिस्सा बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

भाजपा ने भी किया पलटवार

इस पूरे विवाद पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। जालौन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अखिलेश यादव के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है और उसके संचालन की अपनी निर्धारित व्यवस्था है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सरकार का विषय नहीं है, बल्कि ट्रस्ट के प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन से संबंधित मामला है। ऐसे में बिना किसी प्रमाण के सरकार को घेरने का प्रयास राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित दिखाई देता है।

पंकज चौधरी ने कहा कि राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को कोई शंका है तो उसे संबंधित मंचों पर तथ्यों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए, न कि केवल राजनीतिक बयानबाजी करनी चाहिए।

अखिलेश यादव ने उठाए थे सवाल

दरअसल, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया था कि राम मंदिर में चढ़ावे की राशि को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने इस विषय को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की थी।

अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा था कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की आशंका है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और संबंधित पक्षों को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई।

आस्था और राजनीति के बीच बहस

राम मंदिर से जुड़ा यह विवाद केवल राजनीतिक नहीं बल्कि धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंदिर निर्माण को लेकर लंबे समय तक चले आंदोलन और करोड़ों लोगों की भावनात्मक भागीदारी के कारण इससे जुड़े हर विषय पर लोगों की विशेष नजर रहती है।

राजनीतिक विश्लेषक नीरज का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए ऐसे मुद्दों पर राजनीतिक दलों की सक्रियता और बढ़ सकती है। एक ओर विपक्ष सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाब मांग रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इन आरोपों को निराधार और भ्रामक बता रहा है।

जनता की निगाहें आधिकारिक पक्ष पर

इस पूरे विवाद के बीच आम श्रद्धालुओं और नागरिकों की नजरें संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं। लोगों का मानना है कि आस्था से जुड़े किसी भी संस्थान में पारदर्शिता और स्पष्टता बनी रहनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की भ्रांति की स्थिति उत्पन्न न हो।

फिलहाल राम मंदिर चढ़ावा विवाद राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में है। एक ओर विपक्ष सवाल उठा रहा है तो दूसरी ओर सरकार और उसके सहयोगी दल इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले पर क्या आधिकारिक स्थिति सामने आती है और राजनीतिक बहस किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं।