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RSS के वरिष्ठ प्रचारक का निधन, सीएम योगी ने दी श्रद्धाजंलि

RSS के वरिष्ठ प्रचारक का निधन, सीएम योगी ने दी श्रद्धाजंलि

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लखनऊ

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Ruchi Sharma

Oct 21, 2017

yogi sad

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लखनऊ. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक, भारतीय किसान संघ के पूर्व अखिल भारतीय अध्यक्ष व संरक्षक संकठा प्रसाद सिंह का शुक्रवार को 95 की आयु में निधन हो गया। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ठाकुर संकटा प्रसाद को केशव भवन (माॅडल हाउस) में रखे उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धाजंलि दी।

बता दें वरिष्ठ प्रचारक संकठा काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। सीएम योगी बीमारी के दौरान उनको देखने अस्पताल भी गए थे। वहीं निधन की सूचना मिलने के बाद दुख की लहर दौड़ पड़ी। बड़ी संख्या में संघ के कार्यकर्ताओं का जमावड़ा केशव भवन में लगा। उनके निधन की सूचना पर उनकी पार्थिव शरीर के दर्शन के लिए लखनऊ के स्वयंसेवकों व प्रबुद्धजनों का तांता लगा रहा।

'राष्ट्रधर्म के लिये संकठा जी का पूरा जीवन समर्पित था'

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक संकटा जी का ब्रम्हलीन होना राष्ट्रवादी विचारधारा की अपूरणीय क्षति है। राष्ट्रधर्म के लिये उनका पूरा जीवन समर्पित था। भारतमाता को परम वैभव तक पहुंचाना ही जिनके जीवन का ध्येय था, इस पावन पथ के अमर सेनानी संकटा जी का ब्रम्हलीन होना हम सबकी क्षति है। अपने पवित्र मिशन को उन्होंने अपनी आंखों से सफल होते देखा है। इससे उन्हें अवश्य संतुष्टि रही होगी।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संकठा जी भारतमाता के ऐसे सपूत के दिवंगत होने पर मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। ईश्वर उन्हें सद्गति प्रदान करें और उनके सपने का भारत बने यह कामना करता हूं।

ये लोग रहे उपस्थित

इस मौके पर उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, डॉ. महेन्द्र सिंह, पूर्व मंत्री लालजी टंडन, अपर महाधिवक्ता रमेश सिंह, वीरेन्द्र सिंह, रामलखन, जयपाल सिंह, राजकुमार, सत्यभान, विभाग प्रचारक अजय कुमार, संग्राम सिंह, सुरेश तिवारी, नरेन्द्र सिंह भदौरिया समेत सैकड़ों स्वयंसेवकों ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित किया।

उनका जन्म गाजीपुर के ‘मई’ गांव में कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी 21 नवम्बर, 1923 में हुआ। वहां से उनकी पिताजी जी मीरजापुर के तिलौली गांव में जाकर बस गए। वर्तमान में इनका परिवार मीरजापुर में ही रहता है। इनकी पढ़ाई इण्टरमीडिएट तक मीरजापुर में हुई। ये 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान संघ के सम्पर्क में आये और 1944 में आरएसएस के प्रचारक के नाते भदोही के मडियाहूं तहसील में भेजे गए।