18 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

2027 के लिए BJP का मास्टर कार्ड! विनोद तावड़े को क्यों सौंपी गई यूपी की कमान? जानें 5 बड़े कारण

Vinod Tawde UP BJP Incharge Strategy: बीजेपी ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर संगठन में अहम बदलाव किया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया है।
3 min read
Google source verification
Vinod Tawde

बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े (फाइल फोटो

UP Assembly Election 2027 BJP Masterplan: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा और रणनीतिक फैसला लिया है। पार्टी ने राज्यसभा सांसद और अनुभवी संगठनकर्ता विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया है। महाराष्ट्र से आने वाले इस नेता को यूपी जैसी विशाल और जटिल राजनीति वाले राज्य की कमान सौंपना कई सवाल खड़े कर रहा है। पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर तावड़े को ही क्यों चुना गया। जानकारों के अनुसार यह फैसला 2027 के चुनाव को ध्यान में रखकर लिया गया ‘मास्टर कार्ड’ है। आइए जानते हैं इसके पीछे के पांच बड़े कारण।

बिहार चुनाव में शानदार सफलता और गठबंधन प्रबंधन

    विनोद तावड़े की सबसे बड़ी उपलब्धि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में मानी जाती है। बतौर बिहार प्रभारी उन्होंने एनडीए को 202 सीटों का प्रचंड बहुमत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने नीतीश कुमार, चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी जैसे घटक दलों के बीच सामंजस्य बिठाने का काम कुशलता से किया। चिराग पासवान की मांगों को लेकर जब गतिरोध पैदा हुआ तो तावड़े ने नित्यानंद राय को उनके घर भेजने जैसी रणनीति अपनाई। इसके अलावा उन्होंने लोक गायिका मैथिली ठाकुर समेत कई युवा चेहरों को पार्टी से जोड़ा। बिहार में तेजस्वी यादव के आरजेडी को महज 25 सीटों तक सीमित कर देने का श्रेय भी उनके संगठन कौशल को दिया जा रहा है। यही अनुभव अब अखिलेश यादव के खिलाफ यूपी में काम आएगा, क्योंकि दोनों जगह मुस्लिम-यादव वोटबैंक और कांग्रेस गठबंधन जैसी समानताएं हैं।

    केरल और हरियाणा में साबित हो चुकी संगठन क्षमता

      बिहार के बाद तावड़े को केरल चुनाव की जिम्मेदारी दी गई। संगठन स्तर पर कमजोर पार्टी होने के बावजूद उन्होंने जी-जान से मेहनत की और नेमोम, कझाकूटम तथा चतन्नूर जैसी सीटें बीजेपी को दिलाईं। 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में एंटी-इंकंबेंसी के बावजूद मनोहर लाल खट्टर सरकार की जीत सुनिश्चित करने में भी उनकी भूमिका रही। 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू और 2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव में भी उन्होंने पार्टी को सफलता दिलाई। ये अनुभव उन्हें यूपी जैसे बड़े राज्य के लिए आदर्श उम्मीदवार बनाते हैं।

      बचपन से संगठन का अनुभव और लंबा राजनीतिक सफर

        विनोद तावड़े का संगठन कौशल कोई नया नहीं है। 1980 के दशक में कॉलेज के दिनों में ही वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े। 1994 में बीजेपी की सदस्यता ली। 2002 से महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य रहे, 2011 में विपक्ष के नेता बने और 2014 में बोरीवली से विधायक चुने गए। देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री भी रहे। 2020 से केंद्रीय संगठन में सक्रिय हैं और 2021 से महासचिव का पद संभाल रहे हैं। बिहार की सफलता के बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया। मराठा (क्षत्रिय) समाज से आने वाले तावड़े सामाजिक समीकरणों को भी अच्छी तरह समझते हैं।

        पिछले छह महीने से यूपी में सक्रिय भूमिका

          तावड़े पिछले छह महीने से उत्तर प्रदेश में लगातार सक्रिय दिख रहे हैं। योगी आदित्यनाथ के कैबिनेट विस्तार और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की टीम गठन में भी उनका प्रभाव साफ नजर आया। पार्टी के अंदर कई नेता पहले से अनुमान लगा रहे थे कि प्रभारी का जिम्मा उन्हीं को मिल सकता है। यूपी की जमीन पर पहले से सक्रिय होना उनके लिए बड़ा फायदा है।

          आंतरिक एकता, गठबंधन और केंद्र-राज्य समन्वय की चुनौती संभालने की क्षमता

            यूपी में बीजेपी की जीत सुनिश्चित करने के लिए तावड़े को पार्टी के अंदर नाराजगी दूर कर एकजुट टीम तैयार करनी होगी। गठबंधन के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे को सुचारू रूप से निपटाना और केंद्र तथा राज्य की टीम के बीच सेतु की भूमिका निभाना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियां होंगी। बिहार में साबित हो चुकी इन क्षमताओं के कारण पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।