
लखनऊ. राज्य सरकारों की शक्तियों की खत्म करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि कोई भी राज्य उच्च न्यायालय की मंजूरी के बिना सांसदों या विधायकों के खिलाफ किसी भी आपराधिक मामले को वापस नहीं ले सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में एक आदेश जारी करते हुए भाजपा विधायक संगीत सोम, सुरेश राणा, कपिल देव और साध्वी प्राची के खिलाफ मुकदमे वापस लेने के राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है। इससे योगी सरकार को बड़ा झटका लगा है।
मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना, न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की खंडपीठ ने मंगलवार को सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की पेंडेंसी और विशेष अदालतों की स्थापना मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। बेंच ने आदेश दिया कि, पहला मुद्दा मामलों को वापस लेने के संबंध में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 321 के तहत शक्ति के दुरुपयोग के बारे में है। कोर्ट ने कहा, हम यह निर्देश देना उचित समझते हैं कि सांसदों, विधायक के खिलाफ कोई भी मुकदमा बिना उच्च न्यायालय की अनुमति के वापस न लिया जाए।
सीआरपीसी की धारा 321 का उल्लेख
बेंच ने एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसरिया के अनुरोध के अनुसार निर्देश जारी किया कि सीआरपीसी की धारा 321 के तहत उच्च न्यायालय की अनुमति के बिना किसी संसद सदस्य या विधान सभा, परिषद के सदस्य (वर्तमान और पूर्व) के विरुद्ध किसी भी अभियोजन को वापस लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
कई राज्यों में माननीयों से मुकदमे वापस लेने का मामला
उप्र सरकार ने मुज्जफरनगर दंगों से संबंधित मामलों में विधायक संगीत सोम, सुरेश राणा, कपिल देव, साध्वी प्राची के खिलाफ मुकदमा वापस लेने की मांग की थी। इसी तरह कर्नाटक सरकार के आदेश पर 61 मामलों को वापस लेने के निर्देश जारी किए, जिनमें कई राज्य के निर्वाचित प्रतिनिधियों के खिलाफ हैं।
विधायिकाओं के लिए तय हो न्यूनतम शैक्षिक योग्यता
एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए चुनाव आयोग, विधि आयोग और राष्ट्रीय आयोग द्वारा प्रस्तावित महत्वपूर्ण चुनावी सुधार को लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई है। विधायिकाओं के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता और अधिकतम आयु सीमा निर्धारित करने के साथ ही आपराधिक अपराधों के आरोपित व्यक्तियों को चुनाव लडऩे, राजनीतिक दल बनाने और किसी भी पार्टी के पदाधिकारी बनने से रोकने की भी मांग की गयी है।
मार्च 2021 में राज्य सरकार ने खत्म कर दिया था मुकदमा
योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसी साल मार्च महीने में मुज्जफरनगर दंगा भड़काने और भड़काऊ भाषण देने के आरोपी गन्ना मंत्री सुरेश राणा और सरधना इलाके से विधायक संगीत सोम के खिलाफ एमपी-एमएलए कोर्ट की सिफारिश पर मुकदमा वापस ले लिया था। सितंबर 2013 में एक पंचायत में संगीत सोम और सुरेश राणा ने भड़काऊ भाषण दिया था। इसके बाद दंगा भड़क उठा था। इसी मामले में साध्वी प्राची समेत 11 पर मुकदमा दर्ज हुआ था।
Updated on:
10 Aug 2021 03:30 pm
Published on:
10 Aug 2021 03:28 pm
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