
लखनऊ. पिता जिस कॉलेज में सफाई कर्मचारी के पद पर तैनात थे, उसी संस्थान में बेटी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मानित किया। राष्ट्रपति ने सबसे कम उम्र (15 वर्ष) में पीएचडी में एडमिशन लेने वाली सुषमा वर्मा की तारीफ करते हुए कहा- बेटी, पूरे देश को गर्व है तुम पर। इतना ही नहीं सुषमा वर्मा को राष्ट्रपति के सामने मंच से बोलने का मौका भी मिला। 17 वर्ष की सुषमा वर्मा बीबीएयू से एनवायरमेंट माइक्रोबायॉलजी में पीएचडी कर रही हैं।
कहते हैं कि 'पूत के पांव पालने में ही दिखाई देते हैं' सबसे कम उम्र में पीएचडी करने वाली सुषमा वर्मा पर यह मुहावरा फिट बैठता है। सुषमा वर्मा ने 08 साल की उम्र में 10वीं, 10साल की उम्र में 12वीं, 12 साल की उम्र में ग्रेजुएशन किया और 14 साल की उम्र में मास्टर्स पास किया। वर्ष 2000 में जन्मी सुषमा वर्मा जब 15 वर्ष की थीं, उन्होंने पीएचडी में दाखिला लिया। एडमिशन लेते ही सबसे कम उम्र में पीएचडी करने का खिताब सुषमा वर्मा के नाम आ गया। सबसे कम उम्र में 10वीं पास करने का खिताब (लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स) भी सुषमा वर्मा के नाम है।
बेटे-बेटियों में नहीं समझते कोई फर्क
सुषमा के पिता तेज बहादुर बीबीएयू यूनिवर्सिटी में ही सफाई कर्मचारी के तौर पर काम करते हैं। फिलहाल वह सहायक सुपरवाइजर पद पर हैं। तेज बहादुर गर्व से कहते हैं कि उन्होंने बेटा-बेटी में फर्क नहीं समझा। यही कारण है कि उनके बच्चे कीर्तिमान बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं। बड़ा बेटा इंजीनियर है और बेटी सुषमा पीएचडी करने के बाद डॉक्टर कहलाएगी, जबकि छोटी बेटी भी पढ़ने में तेज हैं।
बिना स्कूल गए ही नौवीं में लिया था एडिमिशन
सुषमा वर्मा का दिमाग इतना तेज है कि जब वह पांच साल की ही थी, बिना स्कूल गए कक्षा नौ के पाठ्यक्रम की खासी जानकारी थी। इसके चलते उसने सीधे कक्षा नौ में एडमिशन लिया था। हालांकि, इसके लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद से अनुमति लेनी पड़ी थी।
Published on:
16 Dec 2017 12:47 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
